अपुल्लोस कौन था?


प्रश्न: अपुल्लोस कौन था?

उत्तर:
अपुल्लोस एक प्रचारक, धर्मशास्त्री, कलीसियाई अगुवा और प्रेरित पौलुस का मित्र था। अपुल्लोस मिस्र के सिकन्दरिया का एक यहूदी था, जिसे "विद्वान", "पवित्रशास्त्र का अच्छा जानकार", "आत्मा में जोशीला" और "मन लगाकर यीशु के विषय ठीक ठीक सुनाता और सिखाता था" के रूप में वर्णित किया गया है (प्रेरितों के काम 18:24)। ईस्वी सन् 54 में, उसने इफिसुस की यात्रा की, जहाँ उसने यहूदी आराधनालय में बड़े साहस के साथ शिक्षा दी। यद्यपि, उस समय, अपुल्लोस की सुसमाचार के प्रति समझ अधूरी थी, क्योंकि वह "केवल यूहन्ना के बपतिस्मा की बात जानता था" (प्रेरितों के काम 18:25)। इसका कदाचित् यही अर्थ है कि अपुल्लोस ने मसीह में पाए जाने वाले पश्‍चाताप और विश्‍वास का प्रचार किया था - वह कदाचित् यह भी मानता था कि नासरत का यीशु ही प्रतिज्ञा किया हुआ मसीहा था - परन्तु वह यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान के पूर्ण माप को नहीं जानता था। पौलुस के मित्र अक्विला और प्रिस्किल्ला ने अपुल्लोस के साथ कुछ समय व्यतीत किया और यीशु मसीह के बारे में उसकी समझ में पाए जाने वाले अन्तराल को भर दिया (प्रेरितों के काम 18:26)। अपुल्लोस, सन्देश से पूरी तरह सुसज्जित होते हुए, तुरन्त सुसमाचार प्रचार करना आरम्भ करता है और उसे सुसमाचार के लिए प्रभावी तरीके से क्षमा देने वाले के रूप में परमेश्‍वर के द्वारा उपयोग किया गया (प्रेरितों के काम 18:28)।

अपुल्लोस ने अखाया में से होते हुए यात्रा की और अन्ततः कुरिन्थुस के लिए अपना मार्ग पर चल दिया (प्रेरितों के काम 19:1), जहाँ उसने उन्हें "सींचा" जिन्हें पौलुस ने "बोया" था (1 कुरिन्थियों 3:6)। कुरिन्थियों के पहले पत्र का अध्ययन करते समय इस बात को स्मरण रखना महत्वपूर्ण है। अपुल्लोस, अपने स्वाभाविक वरदानों के साथ, कुरिन्थियों की कलीसिया में से उसने स्वयं की ओर बहुत से लोगों को आकर्षित किया था, परन्तु साधारण प्रशंसा विभाजन को बढ़ा रही थी। अपुल्लोस की इच्छाओं के विरूद्ध, कुरिन्थियों में एक ऐसा गुट था, जिसने पौलुस और पतरस के बहिष्कार करते हुए, उसे ही अपने आत्मिक गुरु के रूप में होने का दावा किया था। पौलुस 1 कुरिन्थियों 1:12-13 में इस पक्षपात से निपटारा करता है। मसीह बँटा हुआ नहीं है, और न ही हमें होना चाहिए। हम सत्य की तुलना में किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व को प्रेम नहीं कर सकते।

बाइबल में अपुल्लोस का अन्तिम उल्लेख पौलुस के द्वारा तीतुस को लिखे हुए पत्र में आया है: "जेनास व्यवस्थापक और अपुल्‍लोस को यत्न करके आगे पहुँचा दे, और देख कि उन्हें किसी वस्तु की घटी न होने पाए" (तीतुस 3:13)। स्पष्ट है, कि अपुल्लोस इस समय क्रेते (जहाँ तीतुस था) के माध्यम से अपने मार्ग पर था। और, स्पष्ट रूप से जैसा कि दिखाई देता है, कि पौलुस अभी भी अपुल्लोस को अपने साथ सेवा करने वाला एक मूल्यवान सह-कर्मी और मित्र मानता था।

कुछ लोग विश्‍वास करते हैं कि अपुल्लोस अन्ततः कलीसिया में सेवा करने के लिए इफिसुस लौट आया था। यह सम्भावना अधिक पाई जाती है कि उसने ऐसा ही किया हो, यद्यपि इस विवरण की कोई बाइबल पुष्टि नहीं पाई जाती है। इसके अतिरिक्त, कुछ लोग अपुल्लोस को इब्रानियों की पुस्तक के अज्ञात लेखक के रूप में भी पहचानते हैं; एक बार फिर से, इस तरह की पहचान के लिए बाइबल की ओर से कोई समर्थन नहीं पाया जाता है। इब्रानियों का लेखक अभी भी अज्ञात ही है।

सारांश में, अपुल्लोस परमेश्‍वर के प्रति उत्साही और उपदेश देने के वरदान को साथ लिए हुए एक विद्वान व्यक्ति था। उसने प्रभु के कार्य में परिश्रम किया, प्रेरितों की सेवकाई का समर्थन किया और विश्‍वासपूर्वक कलीसिया का निर्माण किया। उसका जीवन हममें से प्रत्येक को “यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ने” (2 पतरस 3:18) और सत्य में वृद्धि करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

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