सफेद जादू के बारे में बाइबल क्या कहती है?



प्रश्न: राशिफल का उद्देश्य किसी व्यक्ति के चरित्र और भविष्य की भविष्यवाणी में?

उत्तर:
सफेद जादू को "अच्छे" जादू के रूप में वर्णित किया गया है, यह काले जादू के विरोध में है, जो बुरी आत्माओं की शक्तियों से अपनी शक्ति को प्राप्त करता है। काले और सफेद जादू के मध्य में पाए जाने वाले अन्तरों को लेकर कई भिन्न विचार पाए जाते हैं, इस विचार से आगे बढ़ते हुए कि यह एक ही बात के अक्षरश: दो नाम हैं, इस विश्‍वास की ओर आगे बढ़ना कि वे विशेष रूप से अपने लक्ष्यों और मंशाओं में पूरी तरह से एक दूसरे से भिन्न हैं। बाइबल "अच्छे" और "बुरे" जादू के मध्य में किसी तरह का कोई अन्तर को नहीं करती है। जहाँ तक बाइबल का सम्बन्ध है, जादू तो जादू ही होता है। पवित्रशास्त्र यह अन्तर नहीं करता है कि क्या जादू को अच्छे या बुरे के लिए उपयोग किया जाना चाहिए; यह तो पूरी तरह से निषिद्ध किया गया है, क्योंकि यह परमेश्‍वर के अतिरिक्त शक्ति के अन्य स्रोत से आग्रह करता है।

जो लोग सफेद जादू का अभ्यास करते हैं, उन्हें अक्सर विक्कावादी या विस्कावादी कहा जाता है, ये लोग सृष्टिकर्ता की अपेक्षा सृष्टि की आराधना करते हैं, और जबकि हो सकता है कि वे शैतान या बुरी आत्माओं को कार्य करने के लिए आग्रह न करते हों, तथापि, वे अक्सर "धरती माँ", स्वर्गदूतों, और/या तत्वों से आग्रह तो करते ही हैं। विक्कावाद का केन्द्रीय विषय, "यदि इससे किसी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुँचाता है, तो अपनी इच्छा को पूरा करें।" कई लोग जो सफेद जादू में गोते खाते हैं, वे स्वयं को विक्कावादी कहते हैं, चाहे वे वास्तव में विक्कावादी हों या नहीं। यद्यपि, विक्कावादी बहुत ही अधिक खुले-विचारों वाले होते हैं और उनके विश्‍वास के भीतर ही कई भिन्न तरह के "सम्प्रदाय" और धर्मसैद्धान्तिक दृष्टिकोण पाए जाते हैं, वहीं कुछ ऐसी निश्चित मान्यताएँ, प्रथाएँ और परम्पराएँ पाई जाती हैं, जो सफेद जादू के अनुयायियों को विक्कावाद के साथ जोड़ देती हैं।

चाहे धरती "माँ" तत्वों, या स्वर्गदूतों का पूजन करने की मंशा हो या न हो और एक व्यक्ति केवल अच्छा कार्य करने की ही मंशा क्यों न रखता हो, वास्तविकता तो यह है कि अन्ततः सफेद और काले जादू के मध्य में कोई अन्तर नहीं है, क्योंकि वे दोनों परमेश्‍वर के अतिरिक्त किसी अन्य की आराधना करते हैं। यह सोचने में भयावह बात है कि सफेद जादू के अनुयायी अनजाने में ही और उसी परमेश्‍वर से प्रार्थना कर रहे हैं अर्थात् शैतान से जिसके अनुयायी काले जादू के लोग भी हैं।

पूरे पवित्रशास्त्र के पुराने और नए नियमों में सभी प्रकार के जादू टोने को परमेश्‍वर की व्यवस्था के उल्लंघन के रूप में ठहराया गया है और इसकी निन्दा की गई है (व्यवस्थाविवरण 18:10-16; लैव्यव्यवस्था 19:26, 31,20: 27; प्रेरितों के काम 13: 8-10)। फिरौन के जादूगरों ने अपनी "गुप्त जादू की कलाओं" का उपयोग करके मूसा और हारून के आश्चर्यकर्मों को दोहराने का प्रयास किया था, जो "जादूगरों और टोन्हों की प्रथाओं या अनुष्ठानों को जैसे कि : मन्त्र, जादूई शब्दों का उच्चारण, वशीकरण, ताबीजों और सुरक्षा कवच इत्यादि को बाँधने" से है और उनकी अपनी मंशा को प्राप्त करने के लिए उपयोग किए जाने को उद्धृत करते हैं (निर्गमन 7:11, 8:7)। प्रेरित पौलुस इलीमास टोन्हें की निन्दा करता है, उसे "शैतान की सन्तान" घोषित करता है, जो "सारे कपट और सब चतुराई" से भरा हुआ था और "प्रभु के सीधे मार्गों को टेढ़ा करना नहीं" छोड़ रहा था (प्रेरितों के काम 13:10)। बाइबल में कहीं पर भी किसी टोन्हें या जादूगर को एक सकारात्मक प्रकाश के रूप में चित्रित नहीं किया है। इन सभों की निन्दा परमेश्‍वर की ओर से की गई है।

पवित्रशास्त्र कहता है कि परमेश्‍वर को सभी तरह के जादू से घृणा है। ऐसा क्यों है? क्योंकि यह परमेश्‍वर की ओर से नहीं आया है। शैतान ने लोगों को इस सोच के साथ धोखा दिया है कि सफेद जादू लाभदायी है। वह ऐसा इसलिए कर सकता है, क्योंकि वह ज्योति के दूत का दिखावा करता है (2 कुरिन्थियों 11:14), परन्तु उसकी इच्छा यह है कि जितना अधिक हो सके उतने अधिक प्राणों को फँदे में फँसा ले। बाइबल उससे और उसकी बुरी युक्तियों के विरूद्ध चेतावनी देती है। "सचेत हो; और जागते रहो, क्योंकि तुम्हारा विरोधी शैतान गर्जनवाले सिंह के समान इस खोज में रहता है कि किस को फाड़ खाए" (1 पतरस 5:8)।

"परन्तु आत्मा स्पष्टता से कहता कि आने वाले समयों में कितने लोग भरमानवाली आत्माओं, और दुष्टात्माओं की शिक्षाओं पर मन लगाकर विश्‍वास से बहक जाएँगे" (1 तीमुथियुस 4:1)। वास्तविक आध्यात्मिक सामर्थ्य केवल परमेश्‍वर की ओर से ही यीशु मसीह में विश्‍वास करने के द्वारा उसके साथ बने हुए एक सही सम्बन्ध से और पवित्र आत्मा से जो विश्‍वासियों के मनों में वास करता है, आती है।

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