क्या यीशु श्वेत था?


प्रश्न: क्या यीशु श्वेत था?

उत्तर:
पश्चिम में पाई जाने वाली अधिकांश कलाओं में, यीशु की त्वचा को श्वेत और हल्के बालों के रूप में चित्रित किया गया है। क्या यीशु वास्तव में ऐसा दिखता था? यदि नहीं, तो उसे अक्सर इस तरह क्यों चित्रित किया जाता है?

सबसे पहले, यह स्मरण रखना महत्वपूर्ण है कि बाइबल कहीं भी यीशु का शारीरिक विवरण नहीं देती है। बाइबल यीशु की ऊँचाई, वजन, त्वचा के रंग, बालों के रंग या आँखों के रंग के बारे में कुछ नहीं कहती है। यीशु कौन है, इसे समझने के लिए ऐसी बातें महत्वपूर्ण नहीं हैं। यशायाह 53:2 में यीशु किस तरह से दिखाई देता था, का सबसे निकट पाए जाने वाला गैर-विस्तृत रेखाचित्र मिलता है कि यीशु कैसा नहीं दिखाई देता था: "उसकी न तो कुछ सुन्दरता थी कि हम उसको देखते, और न उसका रूप ही हमें ऐसा दिखाई पड़ा कि हम उसको चाहते।" यशायाह 53:2 कह रहा है कि यीशु साधारण सा दिखाई देने वाला था। प्रकाशितवाक्य 1:14-15 में यीशु के दिए हुए श्वेत बाल और पीतल की त्वचा वाले विवरण को शाब्दिक रूप से तब तक नहीं समझा जाना चाहिए जब तक आप विश्वास नहीं करते कि यीशु के दाहिने हाथ में सात तारे हैं, उसके मुँह में तलवार है, और उसका मुँह ऐसा प्रज्‍वलित है, जैसा सूर्य कड़ी धूप के समय चमकता है। (प्रकाशितवाक्य 1:16)।

बाइबल के अनुसार, यीशु एक यहूदी था, अर्थात्, एक इब्री या इस्राएली था। यीशु मध्य पूर्व में रहता था और वह सामी वंश का था। परिणामस्वरूप, इस बात की बहुत अधिक सम्भावना है कि वह हल्के मध्यम-भूरे रंग की त्वचा, भूरी आँखें और काले-भूरे से लेकर काले बालों वाला हो सकता है। जबकि मध्य पूर्व के लोगों में कभी-कभी हल्की त्वचा पाई जाती है, जिसकी तुलना यूरोपीय लोगों से की जा सकती है, ऐसी त्वचा का रंग संसार के उस हिस्से में दुर्लभ ही पाया जाता है। क्या यीशु श्वेत था? इसका उत्तर यह है कि उसके श्वेत होने की सम्भावना कम है।

इसलिए, यदि यीशु की सम्भावना श्वेत रंग वाली नहीं थी, तो वह अक्सर इस तरह क्यों चित्रित किया जाता है? यदि आप पूरे संसार के कलाकारों के द्वारा किए गए यीशु के चित्रणों की जाँच करें, तो आप पाएंगे कि वे अक्सर यीशु को उसी तरह से चित्रित करते हैं, जैसे लोग उस विशेष संस्कृति में दिखते हैं। यूरोपीय लोग यीशु को एक यूरोपीय के रूप में चित्रित करते हैं। अफ्रीकी लोग अफ्रीकी के रूप में चित्रित करते हैं। एशियाई लोग यीशु को इस तरह चित्रित करते हैं, जो उसे एशियाई दिखाता हो। लोग यीशु को उनकी तरह देखना पसन्द करते हैं, या कम से कम उन लोगों को तरह जिनसे वे परिचित होते हैं।

क्या ऐसा करना गलत है? आवश्यक नहीं है। जब तक हम यीशु के प्रति अपने पसन्दीदा स्वरूप को एक मूर्ति नहीं बनने देते हैं, तब तक बाइबल में ऐसा कुछ भी नहीं है, जो यीशु को एक निश्चित तरीके से देखने की कल्पना करने के विरुद्ध बोलता हो। यीशु "सभी जातियों" के लिए उद्धारकर्ता है (मत्ती 28:19; गलातियों 3:8)। यह बात कोई अर्थ नहीं रखती है कि किसी व्यक्ति की त्वचा का रंग, नस्ल, जाति या राष्ट्रीयता क्या है, वह क्रूसित और जी उठे हुए मसीह के माध्यम से परमेश्वर की ओर से पाप की क्षमा और मेल-मिलाप का अनुभव कर सकता या सकती है। यीशु का प्रेम त्वचा के रंग से बढ़कर है। यीशु का कोई शारीरिक विवरण नहीं होने के कारण, लोग स्वाभाविक रूप से मनुष्य के पुत्र को अपने जैसा बनाने की कल्पना करते हैं।

इसलिए, हमें यीशु को अपनी पसन्दीदा चित्रण में धर्मसैद्धान्तिक नहीं होना चाहिए। तथ्य यह है कि बाइबल कहीं भी शारीरिक विवरण को नहीं देती है, इस विषय पर अहंकार आने और अनुमान लगाने के विरुद्ध सावधानी से काम करना चाहिए। यीशु कैसा दिखाई देता था, यह वास्तव में कोई अर्थ नहीं रखता। उसकी शारीरिक बनावट का उसके संसार के उद्धारकर्ता होने के साथ कुछ भी लेना-देना नहीं है (यूहन्ना 3:16)।

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