स्वर्गदूतों के विभिन्न प्रकार क्या हैं?


प्रश्न: स्वर्गदूतों के विभिन्न प्रकार क्या हैं?

उत्तर:
स्वर्गदूत दो श्रेणियों: "अपतित" स्वर्गदूत और पाप में पतित स्वर्गदूत में पाए जाते हैं। पाप में पतित न होने वाले स्वर्गदूत वे हैं, जो अपने अस्तित्व में पवित्र बने रहे हैं और तद्नुसार उन्हें "पवित्र स्वर्गदूत" कहा जाता है। पवित्रशास्त्र में, सामान्य रूप से जब कभी भी स्वर्गदूतों का उल्लेख किया जाता है, तब यही पवित्र स्वर्गदूतों की यही श्रेणी ध्यान में होती है। इसके विपरीत, पाप में गिरने वाले पतित स्वर्गदूत वे हैं, जिन्होंने अपनी पवित्रता को नहीं बनाए रखा।

पवित्र स्वर्गदूत विशेष श्रेणियों में पाए जाते हैं और कुछ विशेष स्वर्गदूतों का नाम और उल्लेख किया जाता है। मिकाएल प्रधान स्वर्गदूत कदाचित् सभी पवित्र स्वर्गदूतों का प्रधान है और उसका नाम है "कौन परमेश्‍वर के जैसा है?" (दानिय्येल 10:21; 12:1; 1 थिस्सलुनीकियों 4:16; यहूदा 1:9; प्रकाशितवाक्य 12:7-10)। जिब्राएल परमेश्‍वर के प्रमुख स्वर्गदूतों में से एक है, उसके नाम का अर्थ "ईश्‍वर का नायक" है और उसे महत्वपूर्ण सन्देशों को लोगों तक जैसे कि दानिय्येल (दानिय्येल 8:16; 9:21) जकर्याह (लूका 1:18-1 9) और मरियम (लूका 1:26-38) पहुँचाने के लिए सौंपा गया था।

अधिकांश पवित्र स्वर्गदूतों को बाइबल में नाम नहीं दिया गया है, परन्तु केवल कुछ को ही "चुने हुए स्वर्गदूतों" (1 तीमुथियुस 5:21) के रूप में वर्णित किया गया हैं। अभिव्यक्तियों जैसे कि "अधिकारों" और "सामर्थ्यों" का उपयोग सभी स्वर्गदूतों के लिए किया जाता है, चाहे वे पाप में पतित या फिर पवित्र स्वर्गदूत ही क्यों न हो (लूका 21:26; रोमियों 8:38; इफिसियों 1:21; 3:10; कुलुस्सियों 1:16; 2:10, 15; 1 पतरस 3:22)। कुछ स्वर्गदूतों को "करुब" के रूप में नाम दिया गया है, जो जीवित प्राणी हैं, जो पाप की किसी भी अशुद्धता से परमेश्‍वर की पवित्रता की रक्षा करते हैं (उत्पत्ति 3:24; निर्गमन 25:18, 20)। "साराप" स्वर्गदूतों की एक और श्रेणी है, यशायाह 6:2-7 में पवित्रशास्त्र में इन्हें केवल एक ही बार वर्णित करता है और उनके पास पंखों के तीन जोड़े होने के रूप में वर्णित करता हैं। वे स्पष्ट रूप से परमेश्‍वर की स्तुति करने का कार्य करते हैं, उनका सरोकार पृथ्वी पर परमेश्‍वर के दूत होने के नाते और विशेष रूप से परमेश्‍वर की पवित्रता से है। पवित्रशास्त्र में पवित्र स्वर्गदूतों के अधिकांश सन्दर्भ उनकी सेवकाई को सन्दर्भित करते हैं, जो कि बहुत ही अधिक व्यापक हैं। पवित्र स्वर्गदूत सृष्टि की रचना, व्यवस्था देने, मसीह के जन्म के समय उपस्थित थे और उसके पुनरुत्थान, स्वर्गारोहण और वे कलीसिया के मेघारोहण अर्थात् बादलों में हवा पर उठा लिया जाना और मसीह के दूसरे आगमन के ऊपर उपस्थित होंगे।

पवित्र स्वर्गदूतों के समूह से पूरी तरह विपरीत, पाप में गिरने वाले स्वर्गदूतों की सँख्या भी असँख्य हैं, यद्यपि ये पवित्र स्वर्गदूतों से बहुत ही कम हैं और उनकी पहली अवस्था से पाप में गिरने के रूप में वर्णित हैं। शैतान के नेतृत्व में, जो मूल रूप से एक पवित्र स्वर्गदूत था, पाप में गिरने वाले स्वर्गदूतों ने स्वयं को बिगाड़ लिया, उन्होंने परमेश्‍वर के विरूद्ध विद्रोह किया और अपने स्वभाव और काम में पापी हो गए। पाप में गिरने वाले स्वर्गदूतों को दो वर्गों में: अर्थात् एक जो स्वतन्त्र हैं और दूसरे जो बन्धे हुए हैं, में विभाजित किया गया है। पाप में गिरने वाले स्वर्गदूतों में से अकेले शैतान का बाइबल में विशेष उल्लेख दिया गया है। जब शैतान पाप में गिर गया (यूहन्ना 8:44; लूका 10:18), तब उसने इसके पश्‍चात् एक तिहाई स्वर्गदूतों को अपनी ओर आकर्षित किया। उनमें से कुछ न्याय की प्रतीक्षा करते हुए जंजीरों में जकड़े हुए कैद हैं (1 कुरिन्थियों 6:3; 2 पतरस 2:4; यहूदा 1:6), और शेष स्वतन्त्र हैं और दुष्टात्माएँ या शैतान हैं, जिनके सन्दर्भ में पूरे नए नियम में पाए जाते हैं (मरकुस 5:9, 15; लूका 8:30; 1 तीमुथियुस 4:1)। वे अपने सभी लिए हुए कार्यों में शैतान के दास हैं और उसके साथ अपना विनाश साझा करते हैं (मत्ती 25:41; प्रकाशितवाक्य 20:10)।

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