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प्रश्न

त्रित्वईश्‍वरवाद क्या है? क्या त्रित्वईश्‍वरवाद बाइबल आधारित है?

उत्तर


त्रित्वईश्‍वरवाद की शिक्षा यह है कि परमेश्‍वर त्रिएक है, यह कि उसने स्वयं को तीन स्व-समानता और स्व-शाश्‍वतकालीन व्यक्तित्वों में प्रकाशित किया है। त्रिएकत्व के बारे में बाइबल आधारित पूर्ण प्रस्तुतिकरण के लिए कृपया हमारे उस लेख को देखें, जो त्रिएकत्व के बारे में बाइबल की शिक्षा देता है। इस लेख का उद्देश्य मसीही जीवन और उद्धार के सम्बन्ध में त्रित्वईश्‍वरवाद की महत्वपूर्णता के ऊपर विचार विमर्श करना है।

हमें अक्सर यह प्रश्न पूछा जाता है, "क्या मुझे उद्धार पाने के लिए त्रिएकत्व के ऊपर विश्‍वास करना होगा?" इसका उत्तर नहीं और हाँ में मिलता है। क्या बचाए जाने के लिए एक व्यक्ति को त्रित्वईश्‍वरवाद के प्रत्येक पहलू से सहमत होना या इसे पूर्ण रीति से समझना आवश्यक है। नहीं, बिल्कुल भी नहीं। क्या त्रित्वईश्‍वरवाद के कुछ ऐसे पहलू हैं जो उद्धार के प्रति मुख्य भूमिकाओं को अदा करते हैं? हाँ, ऐसा ही है। उदाहरण के लिए, उद्धार के धर्मसिद्धान्त के लिए यीशु मसीह का ईश्‍वरत्व अति महत्वपूर्ण है। यदि यीशु परमेश्‍वर नहीं है, तब उसकी मृत्यु पाप के असीमित जुर्माने को अदा नहीं कर सकती है। क्योंकि केवल परमेश्‍वर ही असीमित परमेश्‍वर है — उसका कोई आरम्भ, और कोई अन्त नहीं है। अन्य सभी प्राणी, जिसमें स्वर्गदूत, भी सीमित हैं; उन्हें समय के किसी निश्चित बिन्दु पर रचा गया था। केवल एक असीमित तत्व की मृत्यु ही पूरे अनन्तकाल में मनुष्य के पाप के लिए प्रायश्चित कर सकती है। यदि यीशु परमेश्‍वर नहीं है, तब वह उद्धारकर्ता, मसीह, परमेश्‍वर का मेम्ना नहीं हो सकता है, जो संसार के पाप को उठा ले जाता है (यूहन्ना 1:29)। यीशु के ईश्‍वरीय स्वभाव के बारे में गैर-बाइबल आधारित दृष्टिकोण का परिणाम उद्धार के प्रति पथभ्रष्ट दृष्टिकोण का होना है। प्रत्येक "मसीही" भ्रान्त शिक्षा देने वाला सम्प्रदाय मसीह के सच्चे ईश्‍वरत्व का इन्कार करते हुए यह शिक्षा देता है कि हमें बचाए जाने के लिए मसीह की मृत्यु के साथ स्वयं के कामों को जोड़ना अवश्य है। त्रित्वईश्‍वरवाद का एक पहलू, मसीह का सच्चा और पूर्ण ईश्‍वरत्व, इस धारणा का खण्डन करता है।

ठीक उसी समय, हम जानते हैं कि मसीह के कुछ ऐसे सच्चे विश्‍वासी हैं, जो पूर्ण त्रित्वईश्‍वरवाद के धर्मसिद्धान्त को नहीं मानते हैं। जबकि हम पर्यायवाद को अस्वीकार करते हैं, हम यह इन्कार नहीं करते हैं कि एक व्यक्ति तब भी बचाया जा सकता है, जब वह यह मानता है कि परमेश्‍वर तीन व्यक्ति नहीं है, अपितु इसकी अपेक्षा उसने तो स्वयं को मात्र तीन "तरीकों" से प्रगट किया है। त्रिएकत्व एक रहस्य है, जिसे कोई भी सीमित मानवीय प्राणी पूर्ण या सिद्ध रीति से समझ नहीं पाया है। क्योंकि उद्धार की प्राप्ति के लिए, परमेश्‍वर केवल यीशु मसीह, उद्धारकर्ता के रूप में, देहधारी परमेश्‍वर, में विश्‍वास किए जाने की मांग करता है। क्योंकि उद्धार की प्राप्ति के लिए, परमेश्‍वर बाइबल के खरे धर्मविज्ञान के प्रत्येक सिद्धान्त के पूरी तरह से पालन किए जाने की मांग नहीं करता है। उद्धार की प्राप्ति के लिए त्रित्वईश्‍वरवाद के सभी पहलुओं से सहमत होने या इनकी पूर्ण समझ होना आवश्यक नहीं है।

हम दृढ़ता के साथ मानते हैं कि त्रित्वईश्‍वरवाद एक बाइबल-आधारित धर्मसिद्धान्त है। हम धर्मसैद्धान्तिक रूप से घोषणा करते हैं कि बाइबल आधारित त्रित्वईश्‍वरवाद को समझना और इसमें विश्‍वास करना परमेश्‍वर, उद्धार, और मसीही विश्‍वासियों में परमेश्‍वर के चलते हुए कार्य को समझने के लिए अति आवश्यक है। ठीक उसी समय, मसीह का अनुसरण करने वाले ऐसे वास्तविक और भक्त विश्‍वासी भी हुए हैं, जिनमें त्रित्वईश्‍वरवाद के पहलुओं को लेकर कुछ असहमति रही है। यह स्मरण रखना आवश्यक है कि हमने किसी सिद्ध धर्मसिद्धान्त में विश्‍वास करने के द्वारा उद्धार नहीं पाया है। हमने हमारे सिद्ध उद्धारकर्ता में विश्‍वास करने के द्वारा उद्धार पाया है (यूहन्ना 3:16)। क्या हमें उद्धार पाने के लिए त्रित्वईश्‍वरवाद के कुछ पहलुओं में विश्‍वास करना होगा? हाँ, करना होगा। क्या हमें उद्धार पाने के लिए त्रित्वईश्‍वरवाद के सभी पहलुओं के साथ पूर्ण सहमत होना होगा। नहीं, ऐसा नहीं है।

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त्रित्वईश्‍वरवाद क्या है? क्या त्रित्वईश्‍वरवाद बाइबल आधारित है?
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