एक रोमांटिक सम्बन्ध के लिए छोटा होने का अर्थ कितना छोटा होना होता है?



प्रश्न: एक रोमांटिक सम्बन्ध के लिए छोटा होने का अर्थ कितना छोटा होना होता है?

उत्तर:
एक रोमांटिक सम्बन्ध के लिए "छोटा होने" का अर्थ कितना छोटा होना व्यक्तिगत् परिपक्वता, लक्ष्यों और मान्यताओं के ऊपर निर्भर करता है। अक्सर, जितना अधिक हम उम्र में छोटे होते हैं, उतना ही अधिक हम जीवन के अनुभव की कमी के कारण कम परिपक्व होते हैं। जिस समय हम केवल यह पता लगा रहे होते हैं कि हम कौन हैं, तब हो सकता है कि हम आत्मिक रीति से ठोस रोमांटिक बन्धन को पर्याप्त रूप में दृढ़ता से निर्मित करने के लिए सक्षम न हो और या हो सकता है कि हम अज्ञानतापूर्ण निर्णयों को लेने की प्रवृत्ति रखते हैं जो हमें भावनात्मक, शारीरिक, मनोवैज्ञानिक, और आध्यात्मिक नुकसान में धकेल दें।

किसी के साथ प्रेमपूर्ण सम्बन्ध में होना एक व्यक्ति को लगभग निरन्तर बनी रहने वाली परीक्षा में डाल देता है, विशेष रूप से जब भावनाएँ विकसित होना आरम्भ करती हैं, और अपने साथी के प्रति आकर्षण गहन होने लगता है। जवान किशोर — यहाँ तक कि बड़े किशोर भी — हार्मोन सम्बन्धी और सामाजिक दबावों से घिरे हुए होते हैं, जो समय-समय पर लगभग असहनीय होने लगते हैं। प्रत्येक दिन नई भावनाएँ आनन्द और रोमांच के साथ मिले हुए — सन्देहों, डरों और उलझनों से आरम्भ होता है — जो बहुत ही अधिक उलझन भरा हो सकता है। जवान अपना अत्यधिक समय केवल इसी बात में खर्च कर देते हैं, कि वे कौन हैं, और उन्हें कैसे इस संसार और उनके चारों के लोगों के साथ सम्बन्धित होना है। इस अवस्था में किसी के साथ बन्धन भरे सम्बन्ध को जोड़ना स्वयं से बहुत अधिक की मांग करने जैसा है, विशेषरूप से, जब दूसरा साथी भी उस तरह के उथल-पुथल का अनुभव कर रहा है। इस तरह के जल्दबाजी में किए हुए सम्बन्ध नाजुक और स्वयं-के-निर्मित हो रहे आत्म-प्रतिष्ठा को नुकसान से बचाने के लिए अधिक कठिन हो जाता है, इसमें प्रलोभन का विरोध करने की समस्या का उल्लेख न ही किया जाए तो बहुत ही अच्छा है। यदि विवाह-करने का मन अभी दूर का एक स्वप्न है, तो कदाचित् अविवाहित स्त्री पुरुष का आपस में मुलाकातें करना या प्रणय निवेदन इत्यादि का आरम्भ बहुत ही जल्दबाजी हो सकता है। सभों के लिए सबसे सुरक्षित सामूहिक गतिविधियाँ में संलिप्त होना है, जहाँ पर जवान स्वयं के लिए सामाजिक कुशलताओं और मित्रता को रोमांटिक बन्धनों में बँधे बिना, बिना किसी दबाव और निहित परेशानियों को विकसित कर सकते हैं।

चाहे कुछ भी क्यों न हो जब भी एक व्यक्ति एक रोमांटिक सम्बन्ध को आरम्भ करने का निर्णय लेता है, तब ही समय होता है कि वह विश्‍वास की नींव को निर्मित करना आरम्भ करे जिसकी उसे शिक्षा दी गई है, यह जानने के लिए कि परमेश्‍वर उससे क्या चाहता है। हम कभी भी इस रोमांचक प्रक्रिया का आरम्भ करने के लिए कभी भी छोटे नहीं होते हैं। "कोई तेरी जवानी को तुच्छ न समझने पाए; पर वचन, और चाल-चलन और प्रेम और विश्‍वास और पवित्रता में विश्‍वासियों के लिये आदर्श बन जा" (1 तीमुथियुस 4:12)।



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