एक मसीही अभिभावक को अपनी किशोर बेटी को कैसे सम्भालना चाहिए, जो गर्भवती हो गई है?


प्रश्न: एक मसीही अभिभावक को अपनी किशोर बेटी को कैसे सम्भालना चाहिए, जो गर्भवती हो गई है?

उत्तर:
ऐसा प्रतीत होता है कि मसीहियों को स्मरण रखने के लिए सबसे कठिन बातों में से एक यह है कि गर्भवती होना एक पाप नहीं है। वैवाहिक सीमा से बाहर गर्भवती होना पाप नहीं है और अविवाहित माता-पिता के द्वारा जन्म लेना पाप नहीं है। वैवाहिक जीवन की सीमा से बाहर यौन सम्बन्ध बनाना पाप है — और यह उस पुरूष के लिए जितना अधिक पाप है, उतना ही अधिक उस स्त्री के लिए भी है। परन्तु गर्भावस्था की तुलना में गैर-बाइबल सम्बन्धी अन्तरंग सम्बन्ध को आलोचना से भरी हुई आँखों से छिपाना अधिक आसान होता है और दुर्भाग्य से, मसीही समुदाय में एक परिवार की प्रतिष्ठा को कम मात्रा में क्षति पहुँचाने वाली एक बात होती है।

एक किशोर बेटी के गर्भधारण का पता चलना निराशाजनक और अत्यधिक आश्चर्य में डाल देने वाला हो सकता है, यह परमेश्‍वर के राज्य के दृष्टिकोण पर चलने के लिए भी महत्वपूर्ण है। पाप किया गया है। जिस भी प्रभाव के कारण एक किशोरी इस पाप में ले जाने के लिए प्रेरित हुई थी, उससे अब बचा नहीं जा सकता है। यह नई स्थिति वैवाहिक-जीवन-से बाहर यौन सम्बन्ध की नैतिकता या परिवार की प्रतिष्ठा के बारे में नहीं है। यह एक बच्चे के विकास के बारे में है। सभी बच्चे परमेश्‍वर की ओर से आशीष हैं, और उसके पास प्रत्येक के लिए एक योजना है (भजन संहिता 139:13-18)। चाहे बच्चा किसी भी परिस्थिति में आए जो कि आदर्शपूर्ण परिस्थिति से कम बहुत ही क्यों न रही हो, वह बच्चा तौभी भी उतना ही बहुमूल्य है, जिसे किसी अन्य बच्चे की तरह परमेश्‍वर के द्वारा उतना ही प्रेम किया जाता है।

गर्भवती बेटी भी परमेश्‍वर के लिए बहुमूल्य है। माता-पिता की भूमिका, अपने बच्चों को चाहे वे कैसी भी परिस्थितियों का सामना ही क्यों न करें, ईश्‍वरीय जीवन को जीने की शिक्षा देने और मार्गदर्शन करने की होती है। ऐसा करना एक मुख्य अवसर होता है। हो सकता है कि लड़की डरी हुई, शर्मिन्दा, और भावनात्मक रूप से अस्थिर हो, और यह उसके माता-पिता का दायित्व है कि वे अतीत की भावनाओं को एक किनारे करते हुए अपने स्वर्गीय पिता के पास चले जाएँ।

कुछ अभिभावक को डर होता है कि उनकी बेटी को अपने प्रेम और समर्थन को देने से यह उसमें ऐसे व्यवहारों को प्रोत्साहित करेगा जो गर्भावस्था की ओर ले जाएगा। परन्तु, एक बार फिर से कहना, गर्भवती होना और एक बच्चे को जन्म देना एक पाप नहीं है, और गर्भवती किशोरियों के साथ सक्रिय रूप से और सार्वजनिक रूप से खड़े होने के कई अन्य लाभ हैं। यह एक ऐसे वातावरण को बढ़ावा देता है, जिसमें बच्चे को एक आशीष के रूप में मूल्यवान् समझा जाता है। यह पिता को अपने दायित्व को भयरहित ले लेने के लिए प्रोत्साहित करता है। और यह गर्भपात को एक बहुत ही कम इच्छित् विकल्प बना देता है।

यदि कोई परिवार अपने गर्भवती किशोरी — को भावनात्मक रूप से त्याग देता है — तब उसके द्वारा अधिक हानिकारक निर्णय लेने की सम्भावना होगी। वह सोच सकती है कि बच्चे के पिता से ही विवाह करना एकमात्र विकल्प बचा है। उसे पता ही नहीं होगा कि अपने बच्चे के स्वास्थ्य और बच्चे की देखभाल कैसे की जाती है। अन्य गर्भवती किशोरियाँ सम्बन्धों की अस्थिरता को देख सकती हैं और अपनी इस तरह की अवस्था को ही गुप्त रख सकती हैं।

इसके विपरीत, एक लड़की अपने और उसके बच्चे के भविष्य के बारे में अधिक समझ से भरे हुए निर्णय को लेने में सक्षम होगी यदि वह अपने अभिभावकों की स्वीकृति और प्रेम-दिशानिर्देशों को प्राप्त करने में विश्‍वास कर सकती है। इस यात्रा को उसके लिए भावनात्मक रूप से और अधिक कठिन बनाना उसके लिए स्पष्ट सोच को प्रोत्साहित नहीं करेगा। समझदार माता-पिता अपनी बेटी के बच्चे को गोद लेने या अपनाने के विकल्प में उसे सहायता प्रदान करेंगे। इसमें पिता और उसके परिवार को सम्मिलित करना भी लाभदायक हो सकता है; उसे उतना ही अधिक स्वामित्व को लेने की आवश्यकता है, जितना की बच्चे की माँ ले रही है। सावधानीपूर्वक प्रार्थना करने के पश्चात्, अभिभावकों को स्पष्ट होना चाहिए कि वे बच्चे के पालन-पोषण में अपना समर्थन कितना अधिक दे सकते हैं। संकटकाल के लिए बने हुए मसीही गर्भावस्था केन्द्रों का उपयोग करें।

हमारा परमेश्‍वर ऐसा सर्वसामर्थी ईश्‍वर है, जो हमारे पापों के द्वारा भी आनन्द और आशीष को ला सकता है। गर्भवती किशोरी और उसके परिवार के लिए अविश्‍वसनीय रूप से कठिन समय हो सकता है, परन्तु हमारा परमेश्‍वर ऐसा ईश्‍वर है, जो छुटकारा प्रदान करता है।

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