यहेजकेल की पुस्तक


लेखक : भविष्यद्वक्ता यहेजकेल ही यहेजकेल की पुस्तक का लेखक है (यहेजकेल 1:3)। वह दोनों अर्थात् यिर्मयाह और दानिय्येल का समकालीन था।

लेखन तिथि : यहेजकेल की पुस्तक के 583 और 565 ईसा पूर्व में किसी समय यहूदियों को बेबीलोन की बन्धुवाई के समय लिखे जाने की सम्भावना पाई जाती है।

लेखन का उद्देश्य : यहेजकेल ने उसके समय की उस पीढ़ी में सेवकाई की जो दोनों ही अर्थात् तीव्रता के साथ पाप से पूर्ण और पूरी तरह से आशाहीन हो चुकी थी। भविष्यद्वाणी की सेवकाई के द्वारा उसने तुरन्त पश्चाताप और सुदूर भविष्य में आश्‍वासन को लाने का प्रयास किया। उसने यह शिक्षा दी : (1) परमेश्‍वर मानवीय सन्देशवाहकों के द्वारा कार्य करता है; (2) यहाँ तक कि पराजय और हताशा में भी परमेश्‍वर के लोगों को परमेश्‍वर की प्रभुता में ही पुष्टि करने की आवश्यकता है; (3) परमेश्‍वर का वचन कभी असफल नहीं होता है; (4) परमेश्‍वर विद्यमान है और उसकी आराधना कहीं भी हो सकती है; (5) यदि लोग परमेश्‍वर की आशीषों को पाने की अपेक्षा करते हैं, तो उन्हें परमेश्‍वर की आज्ञा का पालन करना चाहिए; और (6) परमेश्‍वर का राज्य आएगा।

कुँजी वचन : यहेजकेल 2:3-6, "उसने मुझ से कहा, 'हे मनुष्य के सन्तान, मैं तुझे इस्राएलियों के पास अर्थात् बलवा करनेवाली जाति के पास भेजता हूँ, जिन्होंने मेरे विरूद्ध बलवा किया है; उनके पुरखा और वे भी आज के दिल तक मेरा अपराध करते चले आए हैं। इस पीढ़ी के लोग जिनके पास मैं तुझे भेजता हूँ, वे निर्लज्ज और हठीले हैं;' और तू उन से कहना, 'प्रभु यहोवा यों कहता है, इस से वे, जो बलवा करनेवाले घराने के हैं, चाहे वे सुनें या न सुनें, तौभी वे इतना जान लेंगे कि हमारे बीच एक भविष्यद्वक्ता प्रगट हुआ है। हे मनुष्य के सन्तान, तू उन से न डरना; चाहे तुझे काँटों, ऊँटकटारों ओर बिच्छुओं के बीच भी रहना पड़े, तौभी उनके वचनों से न डरना; यद्यपि वे विद्रोही घराने के हैं, तौभी न तो उनके वचनों से डरना, और न उनके मुँह देखकर तेरा मन कच्चा हो।'"

यहेजकेल 18:4, "देखो, सभों के प्राण तो मेरे हैं; जैसा पिता का प्राण, वैसा ही पुत्र का भी प्राण है; दोनों मेरे ही हैं। इसलिये जो प्राणी पाप करे वही मर जाएगा।"

यहेजकेल 28:12-14, "'हे मनुष्य के सन्तान, सोर के राजा के विषय में विलाप का गीत बनाकर उस से कह; परमेश्‍वर यहोवा यों कहता है : तू तो उत्तम से भी उत्तम है; तू बुद्धि से भरपूर और सर्वांग सुन्दर है। तू परमेश्‍वर की अदन नाम बारी में था; तेरे पास आभूषण, माणिक, पद्मराग, हीरा, फीरोज़ा, सुलैमानी मणि, यशब, नीलमणि, मरकद, और लाल सब भाँति के मणि और सोने के पहिरावे थे; तेरे डफ और बाँसुलियाँ तुझी में बनाई गई थीं; जिस दिन तू सिरजा गया था; उस दिन वे भी तैयार की गई थीं। तू छानेवाला अभिषिक्त करूब था, मैंने तुझे ऐसा ठहराया कि तू परमेश्‍वर के पवित्र पर्वत पर रहता था; तू आग सरीखे चमकनेवाले मणियों के बीच चलता फिरता था।"

यहेजकेल 33:11, "इसलिये तू उनसे यह कह, 'परमेश्‍वर यहोवा की यह वाणी है, मेरे जीवन की सौगन्ध, मैं दुष्ट के मरने से कुछ भी प्रसन्न नहीं होता, परन्तु इससे कि दुष्ट अपने मार्ग से फिरकर जीवित रहे; हे इस्राएल के घराने, तुम अपने अपने बुरे मार्ग से फिर जाओ; तुम क्यों मरो?'"

यहेजकेल 48:35, "और उस दिन से आगे को नगर का नाम 'यहोवा शाम्मा' रहेगा।"

संक्षिप्त सार : आप कैसे इस भटके हुए संसार के साथ चल सकते हैं? यहेजकेल को तीस वर्ष की आयु में ही एक याजक के रूप में जीवन पर्यन्त सेवकाई करने के लिए नियुक्त करने के कारण, उसे अपनी जन्मभूमि को छोड़ना पड़ा और वह पच्चीस-वर्ष की आयु में बेबीलोन बन्धुवाई में ले जाया गया। लगभग पाँच वर्षों तक उसने हताशा से भरा हुआ जीवन व्यतीत किया। तीस वर्षों की आयु में उसे बेबीलोन की बन्धुवाई में रहने के समय यहोवा परमेश्‍वर के वैभवशाली दर्शन की महिमा ने अपने में भर लिया। याजक/भविष्यद्वक्ता ने पाया कि परमेश्‍वर यहेजकेल की मातृभूमि की संकीर्ण बाध्यताओं तक ही सीमित नहीं था। इसकी अपेक्षा, वह एक विश्‍वव्यापी परमेश्‍वर था, जो लोगों और जातियों को आदेश देता और उन्हें अपने नियंत्रण में रखता है। बेबीलोन में, परमेश्‍वर ने यहेजकेल के मन में उसके लोगों के लिए उसके वचन को भर दिया। उसकी बुलाहट के अनुभव ने यहेजकेल को परिवर्तित कर दिया। वह उत्सुकतापूर्वक परमेश्‍वर के वचन के प्रति समर्पित हो गया। उसने जान लिया, कि बन्धुवाई में आए हुए लोगों को उनकी बुरी परिस्थितियों में सहायता करने के लिए उसके पास व्यक्तिगत् रूप से कुछ भी नहीं था, परन्तु उसे दृढ़ निश्चय था, कि परमेश्‍वर के वचन ने उनकी परिस्थितियों के प्रति बात की थी और वह इसमें भी उन्हें विजय प्रदान कर सकता है। यहेजकेल ने उसके लोगों को परमेश्‍वर का वचन देने के लिए विभिन्न तरीकों को उपयोग किया। उसने यरूशेलम के चित्र को चित्रित करने के लिए कला, प्रतीकात्मक कार्यों और उनके ध्यान को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए असामान्य व्यवहार का उपयोग किया। उनके अपने बाल और दाढ़ी को यह प्रदर्शित करने के लिए काट दिया, कि परमेश्‍वर यरूशेलम और इसके निवासियों के साथ क्या करेगा।

यहेजकेल की पुस्तक को चार खण्डों में विभाजित किया जा सकता है:
अध्याय 1-24: यरूशेलम के उजड़ जाने के प्रति भविष्यद्वाणियाँ
अध्याय 25-32: इसके निकट रहने वाले अन्य राष्ट्रों के प्रति परमेश्‍वर के दण्ड के प्रति भविष्यद्वाणियाँ
अध्याय 33: इस्राएल को पश्चाताप करने के लिए एक अन्तिम बुलाहट
अध्याय 34-48: इस्राएल की भविष्य में होने वाली पुनर्स्थापना अर्थात् बहाली के सम्बन्ध में भविष्यद्वाणियाँ

प्रतिछाया : यहेजकेल 34 वह अध्याय है, जहाँ पर परमेश्‍वर इस्राएल के अगुवों को झूठे चरवाहे कहते हुए निन्दा करता है, क्योंकि वे उसके लोगों की अच्छी तरह से देखभाल नहीं करते हैं। इस्राएल की भेड़ों की देखभाल करने की अपेक्षा, वे स्वयं की देखभाल करते हैं। वे अच्छा भोजन खाते, अच्छे कपड़े पहनते और उन्हीं लोगों के द्वारा उनकी अच्छी रीति से देखभाल हो रही है, जिनके ऊपर उन्हें नियुक्त किया गया है (यहेजकेल 34:1-3)। इसके विपरीत, यीशु अच्छा चरवाहा है, जो अपने जीवन को अपनी भेड़ों के लिए न्योछावर कर देता है और उन्हें उन लोमड़ियों से बचाता है, जो झुण्ड को नाश करने को आती हैं (यूहन्ना 10:11-12)। अध्याय 34 का वचन 4 उन लोगों का वर्णन करता है, जिनकी सेवा करने में चरवाहे असफल हो गए, परिणामस्वरूप वे कमजोर, घायल और खो चुकी हैं। यीशु ऐसा महान् वैद्य है, जो हमारे जख्मों को क्रूस के ऊपर अपनी मृत्यु के द्वारा चंगा करता है (यशायाह 53:5)। वही केवल एकमात्र ऐसा है जो उन्हें ढूंढ़ता और बचाता है जो खो गए हैं (लूका 19:10)।

व्यवहारिक शिक्षा : यहेजकेल की पुस्तक अब्राहम, मूसा और भविष्यद्वक्ताओं के साथ ताजी और जीवित मुठभेड़ में सम्मिलित होने के लिए बुलाहट देती है। हमें जय पाए हुए लोग होना चाहिए या हम जय पाएँगे। यहेजकेल हमें यह परमेश्‍वर की सामर्थ्य, ज्ञान, शाश्‍वतकालीन उपस्थिति और पवित्रता का अनुभव करने के लिए जीवन परिवर्तन कर देने वाले दर्शन के अनुभव को प्राप्त करने की चुनौती देता है; परमेश्‍वर हमारा मार्गदर्शन करे; प्रत्येक मनुष्य के मन में वास करती हुई बुराई के प्रति गहनता भरी समझ और समर्पण को प्रदान करे; यह पहचान दे कि परमेश्‍वर उसके सेवक को दुष्ट पुरुषों पर आने वाले संकट के लिए दी जाने वाली चेतावनी के लिए उत्तरदायी ठहराता है; यीशु मसीह के साथ जीवित सम्बन्ध का अनुभव प्रदान करे, जिसने कहा कि नई वाचा केवल उसके लहू में ही मिलती है।


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