क्या सभी माताओं को घर में ही रहना चाहिए?


प्रश्न: क्या सभी माताओं को घर में ही रहना चाहिए?

उत्तर:
घर पर रहने वाली माताएँ एक ऐसा विषय है, जिसने बहुत अधिक विवाद को उत्पन्न किया है, विशेष रूप से पश्‍चिमी देशों में जहाँ कई स्त्रियाँ घर के बाहर काम करने जाती हैं। वास्तव में केवल दो प्रत्यक्ष वचन/सन्दर्भ ऐसे हैं, जो अपने बच्चों के साथ घर पर रहने वाली माताओं के बारे में बात करते हैं। तीतुस 2:3-5 कहता है कि, "इसी प्रकार बूढ़ी स्त्रियों का चाल-चलन पवित्र लोगों–सा हो; वे दोष लगानेवाली और पियक्‍कड़ नहीं, पर अच्छी बातें सिखानेवाली हों ताकि वे जवान स्त्रियों को चेतावनी देती रहें कि अपने पतियों और बच्‍चों से प्रीति रखें; और संयमी, पतिव्रता, घर का कारोबार करनेवाली, भली, और अपने-अपने पति के अधीन रहनेवाली हों, ताकि परमेश्‍वर के वचन की निन्दा न होने पाए।" दूसरी प्रत्यक्ष वचन 1 तीमुथियुस 5:14 है, जो यह कहता है कि, "इसलिये मैं यह चाहता हूँ कि जवान विधवाएँ विवाह करें, और बच्‍चे जनें और घरबार संभालें, और किसी विरोधी को बदनाम करने का अवसर न दें।" तीतुस वचन 2 में दिए हुए वाक्यांश "घर का कारोबार करने में" के लिए एक और अनुवाद "घर की रखवाली करने वाली" है।

कुछ अप्रत्यक्ष वचनों पर भी विचार करें। नीतिवचन 14:1 कहता है कि एक स्त्री के द्वारा अपने घर में निवेश करना बुद्धिमानी है। जबकि आपके घर में निवेश करने के लिए घर पर रहना आवश्यक नहीं है, हम उस प्राथमिकता को देखते हैं, जिसे परमेश्‍वर घर और स्त्री के द्वारा भागी होने के रूप दिखाता है। स्पष्ट है, कि घर के लिए बाहर जाकर रोजगार प्राप्त करने को उपेक्षित नहीं किया जाना चाहिए। व्यवस्थाविवरण 6:4-9 निरन्तर हमारे बच्चों को शिक्षा देने के महत्व को सिखाता है। नि:सन्देह, यह पिता और माताओं के लिए सम्बोधित किया गया है। बच्चों के साथ घर पर रहना केवल बच्चों को परमेश्‍वर के तरीके सिखाने के लिए और अधिक अवसरों को ही प्रदान करेगा। इस तरह से, पवित्रशास्त्र के इस सन्दर्भ को शाब्दिक रूप से लागू करके बच्चों के जीवन में एक सकारात्मक निवेश को किया जाना चाहिए।

अन्त में, नीतिवचन 31 उत्तम पत्नी और माता के बारे में जाना-पहचाना सन्दर्भ है। इसमें दिए हुए विवरण से, हम सीखते हैं कि इस माँ ने घर के बाहर जाकर काम किया था। यद्यपि, उसके परिवार में कभी भी किसी वस्तु की घटी नहीं रही थी। उसने उचित सन्तुलन बनाए रखा, इसलिए उसका परिवार कभी दुखित नहीं हुआ। उसका परिवार सदैव उसकी प्राथमिकता रही थी। जबकि बाइबल स्त्रियों को इस विषय के ऊपर निर्णय लेने के लिए छोड़ देती है कि बच्चों के साथ घर पर रहना चाहिए या घर के बाहर काम करना चाहिए, तथापि निश्‍चित रूप से बच्चों के साथ घर पर रहना एक प्रशंसनीय बात है और उन्हें पूर्णकालिक प्रशिक्षण देने के लिए समर्पित होना है। स्त्रियों को निश्‍चित रूप से तीतुस 2 और 1 तीमुथियुस 5 में अपने बच्चों के साथ घर पर रहने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। जिसे कुछ स्त्रियाँ चुनती भी हैं, उसे अपने घर को प्राथमिकता देनी और घर को अपने प्रभाव का प्राथमिक क्षेत्र बनाए रखना चाहिए।

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