क्यों ऐसा प्रतीत होता है कि परमेश्वर संसार के लाखों भूखे बच्चों की परवाह नहीं करते हैं?


प्रश्न: क्यों ऐसा प्रतीत होता है कि परमेश्वर संसार के लाखों भूखे बच्चों की परवाह नहीं करते हैं?

उत्तर:
कुछ लोग संसार में भूख से मर रहे बच्चों की सँख्या के लिए परमेश्वर को दोषी मानते हैं, उस पर सामर्थी न होने या देखभाल की कमी का आरोप लगाते हैं। यह सच है कि हमारे संसार में कई लोगों के लिए भूख एक समस्या है, और कई बच्चे कुपोषण से पीड़ित हैं। कम्पैशन इंटरनेशनल की रिपोर्ट यह बताती है कि 30 लाख से अधिक बच्चे प्रतिवर्ष कुपोषण के कारण मर जाते हैं। विकासशील देशों में, 25 प्रतिशत बच्चे कम वजन के होते हैं और उनके पोषण की कमी के कारण उन पर दीर्घकालिक प्रभाव का खतरा होता है। समस्या वास्तविक है, परन्तु बाइबल सिखाती है कि परमेश्वर का प्रेम उतना ही वास्तविक है।

प्रत्येक प्रश्न जो हमारे पास परमेश्वर के बारे में हो सकता है, उसके लिए उसने अपने वचन, बाइबल में हमें पहले से ही अन्तर्दृष्टि, सुराग और उत्तर प्रदान किए हैं। यीशु ने सिखाया कि बच्चे परमेश्वर के लिए महत्वपूर्ण हैं: “जो कोई मेरे नाम से एक ऐसे बालक को ग्रहण करता है वह मुझे ग्रहण करता है। पर जो कोई इन छोटों में से जो मुझ पर विश्‍वास करते हैं एक को ठोकर खिलाए, उसके लिये भला होता कि बड़ी चक्‍की का पाट उसके गले में लटकाया जाता, और वह गहरे समुद्र में डुबाया जाता” (मत्ती 18:5–6)। फिर, वचन 10 में, यीशु ने कहा, “देखो, तुम इन छोटों में से किसी को तुच्छ न जानना; क्योंकि मैं तुम से कहता हूँ कि स्वर्ग में उनके दूत मेरे स्वर्गीय पिता का मुँह सदा देखते हैं।” तथ्य यह है कि परमेश्वर परवाह करता है।

राहत सामग्री प्रदान करने वाले संगठन और सरकारी एजेंसियां इस बात से सहमत हैं कि संसार में सभी को खिलाने के लिए भरपूर भोजन है। समस्या भोजन की कमी नहीं है, अपितु भोजन तक पहुँच की कमी है। पूरी जनसँख्या को खिलाने के लिए संसार में पर्याप्त भोजन का होना, किसी भी तरह से परमेश्वर को दोषी नहीं ठहराता है। अपितु, दोष मनुष्य के भ्रष्ट स्वभाव के साथ है। संसार के संसाधनों के प्रति विश्वासयोग्य भण्डारी के रूप में कार्य करने की अपेक्षा, राष्ट्र और लोग अक्सर भोजन की जमाखोरी, संसाधनों का कुप्रबन्धन करते हैं और लोगों को खिलाने की अपेक्षा धन को व्यर्थ में उड़ा देते हैं।

परमेश्वर मनुष्य की मूर्खता के लिए जिम्मेदार नहीं है। न ही वह लालच, स्वार्थ, घृणा, घमण्ड, आलस्य, जमाखोरी, निर्दयता, घबराहट, उपद्रव, या किसी अन्य पाप के लिए जिम्मेदार है जो संसार की भूख में योगदान देते हैं। परमेश्वर में किसी तरह की कोई अधार्मिकता नहीं है (भजन संहिता 92:15)। सभी लोग पापी हैं (रोमियों 3:23), और “पाप की मजदूरी मृत्यु है” (रोमियों 6:23)। संसार की त्रासदियों-विशेष रूप से रोके जाने वाली त्रासदियों जैसे कि वैश्विक भूख — पाप का परिणाम हैं (रोमियों 8:22 को देखें)।

परमेश्वर संसार के बच्चों की परवाह करता है। वह अपनी देखभाल ऐसे प्रमाणित करता है कि उसने पाप के अभिशाप से हमें छुड़ाने के लिए अपने पुत्र को संसार में भेजा। “जो प्रेम परमेश्‍वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ कि परमेश्‍वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है कि हम उसके द्वारा जीवन पाएँ” (1 यूहन्ना 4:9)।

परमेश्‍वर अपनी देखभाल को भी दिखाता है जिस में वह मसीह के अनुयायियों को संसार की भूख को कम करने में सहायता करने का संकेत देता है। वर्तमान में परमेश्वर कई क्रिश्चियन एजेंसियों जैसे — कम्पैशन इंटरनेशनल, वर्ल्ड विजन, वर्ल्ड हेल्प, फीड द हंग्री, समरिटन्स पर्स — इस सूची का अन्त नहीं है के माध्यम से संसार के भूखे बच्चों को खिलाने का काम कर रहा है। क्रिश्चियन मिशनरी पूरे संसार में लोगों को उनकी मूल आवश्यकताओं के साथ परमेश्वर का वचन सिखाते हुए सहायता कर रहे हैं। वे ऐसा अपने प्रभु और लोगों के प्रति प्रेम में होकर करते हैं। वे ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि वे “उसके बनाए हुए हैं, और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए” (इफिसियों 2:10)।

परमेश्वर हर समय भला है। परन्तु संसार में इस तरह की बुराई और पीड़ा को देखने के लिए अक्सर हतोत्साहित किया जाता है। हम जानते हैं कि बुराई परमेश्वर के कारण नहीं, अपितु शैतान, पाप और मानव जाति की गिरी हुई अवस्था के कारण विद्यमान है। हम आशा नहीं छोड़ते हैं। हम “बुरे दिन का सामना करते हैं” (इफिसियों 6:13)। हम अपने पड़ोसियों को अपने जैसा प्रेम करते हैं, हम ऐसा परमेश्वर के लिए करते हैं जिसने “संसार से इतना अधिक प्रेम किया कि उसने अपने एकलौते पुत्र” को दे दिया (यूहन्ना 3:16)। एक दिन, हमारा परमेश्वर सभी चीजों को सही कर देंगा, और “फिर स्राप न होगा” (प्रकाशितवाक्य 22:3)।

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