बाइबल के पठन् को आरम्भ करने के लिए कौन सा अच्छा स्थान है



प्रश्न: बाइबल के पठन् को आरम्भ करने के लिए कौन सा अच्छा स्थान है

उत्तर:
नए लोगों के लिए, इस बात की जानकारी होना अत्यन्त महत्वपूर्ण है कि बाइबल एक साधारण पुस्तक नहीं है जिसे बड़े आराम से पहले से लेकर अन्तिम पृष्ठ तक पढ़ लिया जाए। यह वास्तव में पुस्तकों का एक पुस्तकालय, एक संग्रह 1500 वर्षों के मध्य में कई भाषाओं में विभिन्न लेखकों के द्वारा लिखा गया था। मार्टिन लूथर ने कहा था कि बाइबल "मसीह का पालना" है क्योंकि बाइबल आधारित सारा इतिहास और भविष्यद्वाणियाँ अन्तत: यीशु की ओर ही संकेत करती हैं। इसलिए, किसी भी व्यक्ति के द्वारा बाइबल का पहली बार पठन् सुसमाचारों से आरम्भ किया जाना चाहिए। मरकुस का सुसमाचार आरम्भ करने के लिए त्वरित और शीघ्रता से समाप्त होने वाला एक अच्छा स्थान है। तब हो सकता है कि आप यूहन्ना का सुममाचार पढ़ना चाहेंगे, जो उन बातों के ऊपर ध्यान केन्द्रित करता है जिसे यीशु ने स्वयं के बारे में दावा किया है। मरकुस उन बातों के बारे में बात करता है जिन्हें यीशु ने किया था, जबकि यूहन्ना उन बातों के बारे में बात करता है जिन्हें यीशु ने कहा था और जो कुछ यीशु स्वयं था। यूहन्ना में कुछ सबसे सरल और स्पष्ट संदर्भ पाए जाते हैं, परन्तु साथ ही इसमें कुछ बहुत ही गहरे और सबसे अधिक महत्वपूर्ण संदर्भ भी पाए जाते हैं। सुसमाचारों (मत्ती, मरकुस, लूका, यूहन्ना) को पढ़ने से आप मसीह के जीवन और सेवकाई के साथ परिचित हो जाएँगे।

इसके पश्चात्, कुछ पत्रियों को पढ़ें (रोमियों, इफिसियों, फिलिप्पियों)। वे हमें यह शिक्षा देती हैं कि कैसे हमें अपने जीवन को इस तरह जीवन यापन करना चाहिए जो परमेश्‍वर की महिमा को लाता हो। जब आप पुराने नियम का पढ़ना आरम्भ करते हैं, तो उत्पत्ति की पुस्तक के पठन् से आरम्भ करें। यह हमें बताती है कि कैसे परमेश्‍वर ने इस संसार की रचना की और कैसे मनुष्य पाप में गिर गया, साथ ही पाप में गिरने के परिणाम को भी जो इस संसार के ऊपर आ गया। निर्गमन, लैव्यव्यवस्था, गिनती और व्यवस्थाविवरण पढ़ने में कठिन हो सकता है क्योंकि यह उन सभी व्यवस्थाओं के बारे में वार्तालाप करते हैं जो परमेश्‍वर ने यहूदियों को जीवन यापन करने के लिए दी थी। जबकि आपको इन पुस्तकों को अन्देखा नहीं करना चाहिए, तौभी कदाचित इन्हें बाद में अध्ययन के लिए छोड़ दिया जाना ज्यादा अच्छा होगा। किसी भी परिस्थिति में, इनके पठन् के द्वारा इनमें ही उलझ कर न रह जाएँ। यहोशू से लेकर इतिहास की पुस्तकें इस्राएल के अच्छे इतिहास की जानकारी को पाने के लिए पढ़ें। भजन संहिता से लेकर सुलेमान के पठन् के द्वारा आपको इब्रानियों की काव्य और बुद्धि साहित्य की अच्छी जानकारी हो जाएगी। भविष्यद्वाणियों की पुस्तकें यशायाह से लेकर मलाकी तक हैं, जिन्हें समझना भी कठिन हो सकता है। स्मरण रखें, बाइबल को समझने की कुँजी परमेश्वर से बुद्धि की माँग करना है (याकूब 1:5)। परमेश्‍वर बाइबल का लेखक है, और वह चाहता है कि आप उसके वचन को समझें।

यह जानकारी अत्यन्त अवश्य है कि हर कोई बाइबल का एक सफल विद्यार्थी नहीं होता है। केवल वही जिनके पास परमेश्‍वर के वचन का अध्ययन करने के लिए आवश्यक "योग्यताएँ" होती हैं, ऐसा परमेश्‍वर की आशीष के द्वारा कर सकते हैं:
क्या आप यीशु मसीह में विश्‍वास के द्वारा बचे हुए हैं (1 कुरिन्थियों 2:14-16)?
क्या परमेश्‍वर के वचन के लिए भूखे हैं (1 पतरस 2:2)?
क्या आप परमेश्‍वर के वचन की खोज परिश्रम के साथ करेंगे (प्रेरितों के काम 17:11)?

यदि इन तीनों प्रश्नों में आपका उत्तर "हाँ" है तो आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि परमेश्‍वर आपके प्रत्येक प्रयास को उसे और उसके वचन को जानने के लिए आपको आशीषित करेगा, चाहे आप इसे कहीं से भी क्यों आरम्भ करें और चाहे आप किसी भी तरीके को अध्ययन के लिए उपयोग क्यों न करें। यदि आप सुनिश्चित नहीं हैं कि आप एक मसीही विश्‍वासी हैं - कि आप मसीह में विश्‍वास के द्वारा बचाए हुए हैं और यह कि पवित्र आत्मा आपके भीतर वास करता है - तब आपके लिए असम्भव होगा कि आप पविशास्त्र के शब्दों के अर्थ को समझ सकें। बाइबल की सच्चाई उन लोगों से छिपी हुई है जो मसीह में विश्‍वास के द्वारा उसके पास नहीं आए हैं, परन्तु यह उनके लिए स्वयं में जीवन हैं जो उसमें विश्‍वास करते हैं (1 कुरिन्थियों 2:13-14; यूहन्ना 6:63)।



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