कैदी आत्माएँ कौन थीं?


प्रश्न: कैदी आत्माएँ कौन थीं?

उत्तर:
यीशु ने अपनी मृत्यु और पुनरुत्थान के मध्य में किए गए कार्यों के सन्दर्भ में "कैदी आत्माओं" का उल्लेख किया है। पहला पतरस 3:18-20 कहता है, "इसलिये कि मसीह ने भी, अर्थात् अधर्मियों के लिये धर्मी ने, पापों के कारण एक बार दु:ख उठाया, ताकि हमें परमेश्‍वर के पास पहुँचाए; वह शरीर के भाव से तो घात किया गया, पर आत्मा के भाव से जिलाया गया। उसी में उसने जाकर कैदी आत्माओं को भी प्रचार किया, जिन्होंने उस बीते समय में आज्ञा न मानी, जब परमेश्‍वर नूह के दिनों में धीरज धरकर ठहरा रहा, और वह जहाज बन रहा था, जिसमें बैठकर थोड़े लोग अर्थात् आठ प्राणी पानी के द्वारा बच गए।" ध्यान दें कि यीशु की देह मृत थी और पुनरुत्थान की प्रतीक्षा कर रही थी, परन्तु वह उस समय में आत्मिक रूप से जीवित था जब उसने कैदी आत्माओं से मुलाकात की। इस लेख की पृष्ठभूमि के रूप में, कृपया हमारे लेख "यीशु अपनी मृत्यु और पुनरुत्थान के मध्य के तीन दिनों में कहाँ था" को पढ़ें?

हम 1 पतरस 3:19 में वर्णित आत्माओं के बारे में चार बातों को जानते हैं। वे अभौतिक हैं, वे कैद हैं, उन्होंने जल प्रलय के आने से पहले पाप थे और यीशु ने सुसमाचार के शुभ सन्देश को देने के लिए उनके कैदी स्थान में उनके साथ मुलाकात की। ये आत्माएँ वास्तव में कौन हैं, वर्षों से कुछ अनुमानों का विषय रही हैं।

सबसे पहले, आइए शब्द आत्मा को देखते हैं। यह यूनानी शब्द न्यूमासिन का अनुवाद है, जिसका अर्थ "वायु, सांस, हवा" से है। इसका प्रयोग नए नियम में स्वर्गदूतों (इब्रानियों 1:14), दुष्टात्माओं (मरकुस 1:23), यीशु की आत्मा (मत्ती 27:50), पवित्र आत्मा (यूहन्ना 14:17) और मनुष्य के आत्मिक भाग (1 कुरिन्थियों 2:11) के लिए किया जाता है। जबकि बाइबल यह स्पष्ट करती है कि मनुष्यों के पास आत्मा होती है (इब्रानियों 4:12), बाइबल मनुष्यों को कभी भी मात्र "आत्माओं" के रूप में ही सन्दर्भित नहीं करती है। इसके विपरीत, परमेश्‍वर पवित्र आत्मा, स्वर्गदूत और दुष्टात्माओं के पास आत्मा को होना कभी नहीं कहा गया है; वे आत्माएँ हैं। इसलिए वाक्यांश कैदी आत्माओं में आए हुए शब्द आत्माओं के लिए मानक अर्थ मनुष्यों की आत्मा से अतिरिक्त कुछ और तर्क देती हैं।

कैदी आत्माएँ पवित्र स्वर्गदूत नहीं हो सकती हैं, क्योंकि उन्होंने पाप नहीं किया है और कैद में नहीं हैं। और यदि कैदी आत्माएँ मृत मनुष्यों की आत्माएँ नहीं हैं, तो यह हमें केवल एक ही विकल्प के साथ छोड़ देती हैं — कैदी आत्माएँ दुष्टात्माएँ हैं। अब, यह स्पष्ट है कि सभी दुष्टात्माओं को कैद नहीं किया गया है। नया नियम पृथ्वी पर दुष्टात्माओं की गतिविधि के कई उदाहरण देता है। इस कारण कैदी आत्माओं को दुष्टात्माएँ का एक चुना हुआ समूह ही होना चाहिए, जो उनके शेष सहयोगी दुष्टात्माओं के विपरीत, कैदी बनाई गई हैं।

सारी नहीं परन्तु कुछ ही दुष्टात्माओं के कैद में होने के लिए क्या कारण हो सकता है? यहूदा 1:6 हमें एक महत्वपूर्ण संकेत देता है: "फिर जिन स्वर्गदूतों ने अपने पद को स्थिर न रखा वरन् अपने निज निवास को छोड़ दिया — उसने उनको भी उस भीषण दिन के न्याय के लिये अन्धकार में, जो सदा काल के लिये है, बन्धनों में रखा है।" ये पाप में गिरने वाले कुछ ऐसे स्वर्गदूत हैं, जिन्होंने किसी प्रकार का कोई गम्भीर अपराध किया है; यहूदा 1:6 इसका विवरण नहीं देता है, परन्तु दुष्टात्माओं का पाप इस बात से सम्बन्धित था कि उन्होंने "अपने पद को स्थिर न रखा वरन् अपने निज निवास को छोड़ दिया।" प्रकाशितवाक्य 9:1-12, 14-15 और 2 पतरस 2:4 भी वर्तमान में बन्धे बहुत दुष्ट स्वर्गदूतों के एक समूह के बारे में भी बातें करते हैं।

कैदी आत्माएँ उत्पत्ति 6:1-4 में से एक हो सकती हैं, जो "परमेश्‍वर के पुत्र" को "मनुष्यों की पुत्रियों" के साथ मिलकर संग करने और जिन्होंने दानवों की जाति नपीली लोगों को उत्पन्न किया को लिपिबद्ध करता है। यदि "परमेश्‍वर के पुत्र" पाप में गिरे हुए स्वर्गदूत थे, तब तो उत्पत्ति 6 के पाप में सम्मिलित स्वर्गदूतों ने उस स्थान को छोड़ दिया था, जहाँ वे जल प्रलय से पहले अनाज्ञाकारिता के कार्य को करने से पहले रह रहे थे — और यह प्रेरित पतरस के द्वारा 1 पतरस 3:19 में बताए गए के अनुरूप पाया जाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि दुष्टात्माओं ने मनुष्य की स्त्रियों के साथ सहवास किया था, उन्हें उनके इस पाप को दोहराने से रोकने और अन्य दुष्टात्माओं को ऐसा करने से हतोत्साहित करने के लिए परमेश्‍वर ने उन्हें कैद कर दिया था।

1 पतरस 3:19 के अनुसार, यीशु ने कैदी आत्माओं को "प्रचार" किया। "घोषणा" या "प्रचार" शब्द का अनुवाद "सार्वजनिक रूप से घोषणा करने" या "शुभ सन्देश को देने के लिए" किया जाता है। पतरस कहता है कि यीशु अथाह गड़हे में उतर गया और वहाँ उसने पाप में गिरे हुए कैदी स्वर्गदूतों को अपनी विजय की घोषणा की। वे पराजित हो चुके थे और यीशु ने जय पा ली थी। क्रूस सभी बुराइयों के ऊपर जय था (कुलुस्सियों 2:15 देखें)।

English


हिन्दी के मुख्य पृष्ठ पर वापस जाइए
कैदी आत्माएँ कौन थीं?