ध्यान मग्न कर देने वाली प्रार्थना क्या है?


प्रश्न: ध्यान मग्न कर देने वाली प्रार्थना क्या है?

उत्तर:
1990 के पश्चात् से मसीहियत के विभिन्न खण्डों में मिस्टीसिज़्म अर्थात् रहस्यवाद के ऊपर अधिक ध्यान दिया जाने लगा। गूढ़ बातों के ऊपर आधारित हो इन रहस्यवादी अनुभवों ने "वास्तविक विश्‍वास" और "महसूस किए जाने वाले विश्‍वास" के मध्य में विभाजन को और अधिक विस्तृत कर दिया और शुद्ध बाइबल आधारित शिक्षा को भावनात्मक रूप से प्रेरित प्रतिक्रिया में परिवर्तित करने के खतरे को उत्पन्न कर दिया। सोकिंग प्रेयर अर्थात् ध्यान मग्न कर देने वाली प्रार्थना ऐसी ही एक रहस्यवादी गतिविधि है। इसे परमेश्‍वर की उपस्थिति में विश्राम करने के रूप में वर्णित किया जाता है। इसकी प्राप्ति आराधना के कुछ सौम्य भजनों को गा कर, या बैठे हुए या लेटे हुए, और छोटी और सरल प्रार्थनाओं को समय की विस्तारित अवधि का उपयोग करते हुए किया जाता है, अन्यथा अपने मन को अन्य विचारों से मुक्त रखा जाता है। जिस क्षण आप परमेश्‍वर की उपस्थिति को सिहरन वाली त्वचा, गर्मी या ठण्ड की संवेदना, या यहाँ तक कि अपने शरीर के द्वारा मृदु हवा के माध्यम से परमेश्‍वर की उपस्थिति का अहसास करते हैं, तो उस समय आप उसकी उपस्थिति में "ध्यान मग्न" हो जाते हैं या पूर्ण रीति से उसमें ही डूब जाते हैं।

यद्यपि, हो सकता है कि यह कुछ लोगों के लिए थोड़ा सा अनोखा प्रतीत हो, परन्तु यह अचानक से अनिवार्य रूप में बुरे अनुभव को नहीं लाता है। तथापि, जिस मापदण्ड से हम हमारे जीवन के अनुभवों को मापते हैं, वह बाइबल है (2 तीमुथियुस 3:16-17), और जब बात ध्यान मग्न कर देने वाली प्रार्थना को बाइबल के आधार पर जाँच किए जाने की आती है, तब हम पाते हैं कि इसके लिए बाइबल आधारित समर्थन की आवश्यकता होती है। बाइबल में हम कहीं भी इस तरह की प्रार्थना के नमूने को नहीं पाते हैं, जिसमें ध्यान मग्न कर देने वाली प्रार्थना सम्मिलित होती है।

बाइबल में प्रार्थना का सबसे सरलतम रूप प्रभु के नाम को पुकारने के रूप में दिया गया है (उत्पत्ति 4:26), और प्रत्येक उदाहरण में, जहाँ कहीं प्रार्थना बाइबल में पाई जाती है, यह परमेश्‍वर के साथ वार्तालाप के वर्णनात्मक रूप में दी गई है। ध्यान मग्न कर देने वाली प्रार्थना ऐसी ही आरम्भ होती है, परन्तु शीघ्रता के साथ ही यह एक समाधि — जैसे ध्यान की अवस्था में भटक जाती है। जब ऐसा होता है, तब ध्यान मग्न कर देने वाली प्रार्थना बाइबल आधारित नहीं रहती है और बहुत कुछ न्यू ऐज़ अर्थात् नव युगवादी अभ्यास के जैसी हो जाती है या ऐसी जैसे कि हिन्दू धर्म के अनुयायी अपने ध्यान में भाग लेते हैं।

इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि परमेश्‍वर की उपस्थिति का अनुभव करना सामर्थ्य प्रदान और जीवन परिवर्तन करने वाला हो सकता है। ऐसा लक्ष्य ध्यान मग्न कर देने वाली प्रार्थना का नहीं है, जो कि बाइबल के अनुसार त्रुटिपूर्ण है; यही इसकी पद्धति है। ध्यान मग्न कर देने वाली प्रार्थना रहस्यमय अभ्यासों के माध्यम से परमेश्‍वर की उपस्थिति की खोज के द्वारा एक आत्मिक अनुभव को प्राप्त करने के ऊपर केन्द्रित है। इस में यह "चिन्तनशील प्रार्थना" और चिन्तनशील आध्यात्मिकता के समान है, जो समान रूप से बाइबल सम्मत नहीं हैं। बाइबल आधारित प्रार्थना परमेश्‍वर की इच्छा को ध्यान में रखते हुए परमेश्‍वर के साथ वार्तालाप करना है (1 यूहन्ना 5:14)। बाइबल आधारित प्रार्थना में विश्‍वास करने वाला एक विश्‍वासी पहले से ही यह समझ चुका होता है कि परमेश्‍वर की उपस्थिति सदैव उसके साथ है (भजन संहिता 139:7; मत्ती 28:20; 1 कुरिन्थियों 6:19; 1 थिस्सलुनीकियों 4:8; 2 तीमुथियुस 1:14), और उसे इसे प्रमाणित करने के लिए किसी भी शारीरिक उत्तेजना के अनुभव की आवश्यकता नहीं है।

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ध्यान मग्न कर देने वाली प्रार्थना क्या है?