क्या इस जीवन में पूर्ण पवित्रता/पापरहित पूर्णता की प्राप्ति सम्भव है?


प्रश्न: क्या इस जीवन में पूर्ण पवित्रता/पापरहित पूर्णता की प्राप्ति सम्भव है?

उत्तर:
इफिसियों 4:13 कहता है कि मसीह की देह को विकसित होने के लिए तब तक दिए गए हैं, "जब तक कि हम सब के सब विश्‍वास, और परमेश्‍वर के पुत्र की पहिचान में एक न हो जाएँ, और एक सिद्ध मनुष्य न बन जाएँ और मसीह के पूरे डील डौल तक न बढ़ जाएँ।" कुछ अनुवाद कहते हैं कि हम ("सिद्ध" की अपेक्षा) "पूर्ण" बन जाएँ, और इस कारण कुछ लोगों ने गलत सोचा है कि हम इस जीवन में पाप रहित पूर्णता प्राप्त कर सकते हैं। बाइबल शिक्षा देती है कि जब तक हम शरीर में हैं, तब तक हम सदैव पाप के स्वभाव के साथ संघर्षरत् होंगे (देखें रोमियों 7:14–24)। कोई भी तब तक "सिद्ध" (पाप रहित) नहीं हो सकता है, जब तक हम स्वर्ग में नहीं पहुँच जाते हैं।

इफिसियों 4:13 में आया हुआ यूनानी शब्द टिलीओस का अनुवाद "सिद्ध" के रूप में हुआ है। इसे पूरे नये नियम में "परिपूर्ण," "पूर्ण," "पूर्ण विकसित," और "परिपक्व" के अर्थ को देने के लिए उपयोग किया गया है। इफिसियों 4:13 शिक्षा देता है, वह यह है कि जितना अधिक हम मसीह में वृद्धि करते जाते हैं, उतना ही अधिक हम कलीसिया के रूप में अधिक दृढ़ और एकता में आते चले जाते हैं। वचन यह शिक्षा नहीं देता है कि हम पाप करना बन्द कर देंगे।

एक और सन्दर्भ कुलुस्सियों 1:26 है, जिससे लोग कई बार उलझन में पड़ जाते हैं, जो यह कहता है कि, कुछ अनुवादों में, कि पौलुस प्रत्येक व्यक्ति को "मसीह यीशु में सिद्ध करके उपस्थित" करना चाहता था। साथ ही कुलुस्सियों 4:12 में, पौलुस प्रार्थना करता है कि हम "सिद्ध होकर पूर्ण विश्‍वास के साथ परमेश्‍वर की इच्छा पर स्थिर रहें।" दोनों ही वचनों में, सिद्ध के लिए यूनानी शब्द को "परिपक्व" या "पूर्ण-विकसित" या "किसी तरह के पाप से रहित" के अर्थ को देते हुए समझा जाना चाहिए।

मनुष्य के रूप में हम इस संसार में आदम के स्वभाव के साथ बँधे हुए हैं। चाहे हम कितना भी कठोर प्रयास ही क्यों न कर लें, फिर भी हम परमेश्‍वर के विरुद्ध पाप करते ही रहेंगे। यह सभों के लिए सत्य है। प्रेरित पौलुस ने पक्षपात दिखाने के लिए पतरस को ताड़ना दी थी (गलातियों 2:11–13)। अपनी सेवकाई के अन्त में, पौलुस स्वयं को सभी पापियों में सबसे बड़ा कहकर पुकारता है (1 तीमुथियुस 1:15)। पतरस, याकूब, यूहन्ना और पौलुस ने स्वीकार किया है कि वे सिद्ध नहीं थे। तब मैं और आप कैसे भिन्न होने का दावा कर सकते हैं?

सच्ची पूर्णता कलीसिया के मेघारोहण होने तक नहीं आएगी, जब हम मसीह के साथ मुलाकात करने के लिए हवा में उठा लिए जाएँगे (1 थिस्सलुनीकियों 4:17)। उस समय मसीह में मरे हुए मुर्दे पुनरुत्थित हो जाएँगे और जीवित परिवर्तित हो जाएँगे (फिलिप्पियों 3:20, 21; 1 कुरिन्थियों 15:54)। हम सभी मसीह के न्याय सिंहासन के सामने खड़े होंगे (2 कुरिन्थियों 5:10) जहाँ पर हमारे सभी कामों का न्याय होगा और हमें प्रतिफल दिया जाएगा (1 कुरिन्थियों 3:9–15)। हमारा छुटकारा पूर्ण हो जाएगा और हमारे पाप सदैव के लिए चले जाएँगे। हम मसीह के साथ सदैव के लिए पाप रहित अवस्था में रहेंगे और राज्य करेंगे।

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