नशे करना करने के बारे में बाइबल क्या कहती है?


प्रश्न: नशे करना करने के बारे में बाइबल क्या कहती है?

उत्तर:
बाइबल सीधे रूप में किसी भी प्रकार की दवाओं के अवैध उपयोग को सम्बोधित नहीं करती है। कोकीन, हेरोइन, उन्माद (एमडीएमए), या मेथेम्फेटामाइन्स (मेथ) के विरूद्ध कोई स्पष्ट प्रतिबन्ध नहीं है। मारिजुआना, कैनाबिस, पेयोटे, जादूई मशरूम, या एसिड (एलएसडी) का कोई उल्लेख नहीं है। हाँफना, सूँधना, दम भरना, धूम्रपान, चिल्लाना, चाटना या इंजेक्शन की किसी अन्य विधि के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है। यद्यपि, ऐसा कहने का यह अर्थ नहीं है कि मनोरंजक दवा के उपयोग की अनुमति दी गई है। इसके विपरीत, बाइबल के कई बहुत ही स्पष्ट सिद्धान्त हैं, जो स्वीकार्य व्यवहार से बाहर दवाओं की सीमा के उपयोग को रख देते हैं।

विषय को आरम्भ करने के लिए, मसीही विश्‍वासी देश सम्बन्धी कानूनों का सम्मान करने और उनका पालन करने के लिए सार्वभौमिक जनादेश के अधीन हैं (सभोपदेशक 8:2-5; मत्ती 22:21; 23:2-3; रोमियों 13:1-7; तीतुस 3:1; 1 पतरस 2:13-17)। केवल एक ही उदाहरण ऐसा मिलता है, जिसमें हमें देश के कानूनों का उल्लंघन करने की अनुमति है, जब कानून किसी भी ईश्‍वरीय आदेश सूचक का उल्लंघन करता है (दानिय्येल 3 और 6; प्रेरितों के काम 5:29)। इस नियम के प्रति कोई अन्य अपवाद नहीं पाया जाता हैं। लोकप्रिय धारणा के विपरीत, व्यवस्था के प्रति असहमति होने से उस व्यवस्था को तोड़ना लाइसेंस नहीं बन जाता है।

कई लोगों ने यह तर्क दिया है कि मारिजुआना निषेध की गारंटी नहीं देता है। वे तर्क देते हैं कि व्यवस्था की अवहेलना में धूम्रपान की राख का डिब्बा इन आधारों पर वैद्य और अनावश्यक खरपतवार की पैदावार का पाखण्ड निकोटीन और अल्कोहल की खपत की अनुमति के प्रकाश में (जिसे वे समझते हैं कि ऐसा है) उचित है। जो लोग इस बिन्दु पर तर्क विर्तक करते हैं, वे उनकी दृढ़ मान्यता में ईमानदार हो सकते हैं, परन्तु तौभी वे गलत हैं। व्यवस्था के लिए मन से महसूस किया असन्तोष उसके प्रति अशुद्धता को न्यायसंगत नहीं ठहरा सकता है, जैसा कि हमारे प्रभु ने स्वयं स्पष्ट किया है। मूसा की व्यवस्था को अत्यधिक दमनकारी जूए में बदलने के लिए फरीसियों को ताड़ना देते हुए, मसीह ने अपने अनुयायियों को उनकी अनुचित कठोर मांगों को छोड़ते हुए समर्पित होने की आवश्यकता के ऊपर बल दिया (मत्ती 23:1-36, विशेष रूप से 1-4)। अधार्मिकता से भरी हुई पीड़ा और/या कथित अन्याय (1 पतरस 2:18-23) के माध्यम से अधिकार और धैर्य वाली दृढ़ता के लिए कर्तव्य प्रस्तुत करना हमारे लिए परमेश्‍वर का उच्च मानक है, भले ही इसका अर्थ "अनुचित" कानून के साथ समझौता करते हुए मारिजुआना से दूर रहना ही क्यों न सम्मिलित हो।

हमें न केवल अपने अधिकारियों के प्रति अधीन होना है, परन्तु साथ ही मसीही विश्‍वासियों को सुसमाचार के कारण कंलक के जीवन से ऊपर बने रहने के लिए एक जनादेश के प्रति बाध्य किया गया है (1 कुरिन्थियों 10:32; 2 कुरिन्थियों 4:2; 6:3; तीतुस 2:1-8; 2 पतरस 3:14)। कहने की आवश्यकता नहीं है, अपराध अत्यधिक अपमानजनक होता है।

स्पष्ट है कि, यह पहला सिद्धान्त नीदरलैंड जैसे देशों में रहने वाले दवाईयों के उपयोगकर्ताओं को प्रभावित नहीं करता है, जहाँ मनोरंजक दवाओं का उपयोग कानूनी और अनुमति प्राप्त है। यद्यपि, अधिक सार्वभौमिक रूप से लागू किए गए सिद्धान्त भी पाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, मसीही विश्‍वासियों को अपनी राष्ट्रीय पहचान के पश्‍चात्, जो कुछ भी सौंपा गया है, उसके प्रति भी अच्छे भण्डारी होने की आवश्यकता है (मत्ती 25:14-30)। इसमें हमारे सांसारिक इकाईयाँ भी सम्मिलित हैं। दुर्भाग्यवश, अवैध दवाओं का उपयोग शारीरिक रूप से नहीं अपितु मानसिक और भावनात्मक रूप से भी आपके स्वास्थ्य को नष्ट करने का एक अत्यधिक प्रभावी तरीका है।

मारिजुआना, जबकि सभी अवैध दवाओं में सबसे कम हानिकारक होने के पश्‍चात् भी, घातक है। मारिजुआना को लेने वाले उत्साही लोग ("मारिजुआना का आदी व्यक्ति") इस तथ्य में सांत्वना पाते हैं कि अधिकांश अन्य अवैध दवाओं के विपरीत, इसकी सामान्य खपत (अर्थात् इसके धूम्रपान से) कोई नुक्सान नहीं पहुँचाती है। परन्तु यह मारिजुआना के धूम्रपान के कारण फेफड़ों के कैंसर, फेफड़े की वातस्फीति बीमारी, और दीर्घकालिक अवरोधक फुफ्फुसीया बीमारी (सीओपीडी) के सम्भावित रूपों से घातक जोखिम को कम नहीं करता है। जबकि मारिजुआना धूम्रपान किए बिना भी निगला जा सकता है, जिससे इन जोखिमों को समाप्त कर दिया जाता है, तौभी प्रजनन प्रणाली, प्रतिरक्षा प्रणाली, और संज्ञानात्मक क्षमता को नुकसान सहित नकारात्मक शारीरिक और मनोवैज्ञानिक परिणाम बने रहते हैं।

भण्डारीपन से परे, मसीही विश्‍वासियों के रूप में, हमारे शरीर हमारे नहीं हैं। हम "दाम देकर" (1 कुरिन्थियों 6:19-20), "चाँदी-सोने अर्थात् नाशवान् वस्तुओं के द्वारा नहीं; पर निर्दोष और निष्कलंक मेम्ने, अर्थात् मसीह के बहुमूल्य लहू के द्वारा" (1 पतरस 1:17-19) "मोल लिए गए" है। हमें मसीह के जीवन के द्वारा खरीदे जाने के पश्‍चात्, वह हमें पूरी तरह से नए, कुछ सीमा तक विचित्र बनाने में आनन्दित होता है। हम में अपने आत्मा के साथ रहने के द्वारा, उसने हमें जैविक मन्दिरों में परिवर्तित कर दिया है। इसलिए अब, अपने स्वास्थ्य की देखभाल करना केवल अच्छे परिश्रम का विषय ही नहीं रह गया है। यह आदरणीय पवित्रता का विषय है। यह अद्भुत और भय योग्य दोनों ही है।

बाइबल का एक और सिद्धान्त धोखे के प्रति हमारी संवेदनशीलता से सम्बन्धित है। पतित प्राणियों के रूप में हम भ्रमित हो जाने की प्रवृति रखते हैं। और क्योंकि हम परमेश्‍वर के लिए तीव्र लगाव की वस्तुएँ हैं, इसलिए उसके शत्रु हमारे शत्रु हैं। इसमें शत्रु, शैतान, झूठ का पिता (यूहन्ना 8:44), एक सबसे अधिक भयानक और निर्धारित प्रतिद्वन्द्वी सम्मिलित है। प्रेरितों के द्वारा दिए गए सभी उपदेश शान्त-मनोदशा में और सतर्क बने रहने के लिए रूपरेखित किए गए हैं (1 कुरिन्थियों 15:34; 1 थिस्सलुनीकियों 5:4-8; 2 तीमुथियुस 4:5; 1 पतरस 1:13; 4:7; 5:8) और हमें स्मरण दिलाते हैं कि हमें शैतान की चालाकियों के विरूद्ध सतर्क रहना चाहिए (1 पतरस 5:8), जो हमें धोखे से फंसाने का प्रयास करता है। प्रार्थना के लिए नम्रता भी महत्वपूर्ण है (1 पतरस 4:7), वैसे ही जैसे परमेश्‍वर की आज्ञाकारिता महत्वपूर्ण है (यशायाह 1:1-17)।

जहाँ तक नशीली दवाओं की लत की बात है, सभी अवैध दवाएँ शारीरिक रूप से नशे की लत के लिए नहीं हैं। तौभी, वे सभी मनोवैज्ञानिक रूप से नशे का आदी बनाने के लिए होती हैं। जबकि अधिकांश लोग शारीरिक लत से परिचित हैं, जिस में शरीर ठीक से काम करने में सक्षम होने के लिए किसी पदार्थ के ऊपर शारीरिक रूप से निर्भर हो जाता है, मनोवैज्ञानिक लतें कम ज्ञात् है। मनोवैज्ञानिक लतें मन की गुलामी होती है, जो अक्सर जुनूनी प्रवृत्तियों और छोड़ने की इच्छा की कमी की विशेषताएँ होती हैं। जबकि शारीरिक लतें शरीर को अधीनता में लाती है, मनोवैज्ञानिक लतें इच्छा को अपने अधीन कर लेती हैं। उपयोगकर्ता ऐसी बातें कहते हैं, "यदि मैं चाहता हूँ, तो मैं छोड़ सकता हूँ, परन्तु मैं बस ऐसा नहीं करना चाहता हूँ।" यही व्यवहार नशीली दवाओं के उपयोग की दीर्घकालिक पद्धति को सुनिश्‍चित करता है, जिसमें उपयोगकर्ता बाइबल के सिद्धान्त के विरोध में एक बहुत ही क्रूर सिद्धान्त का भक्त बन जाते हैं। सच्चाई तो यह है कि कोई भी पूरी तरह से दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता है (मत्ती 6:24; लूका 16:13)। ड्रग्स अर्थात् दवाईयों के देवता के सामने घुटने टेकने के लिए व्यतीत किया गया समय बाइबल के परमेश्‍वर की ओर अपनी पीठ फिरने के लिए व्यतीत किया गया समय है।

संक्षेप में, बाइबल हमें शिक्षा देती है कि "हम अभक्‍ति और सांसारिक अभिलाषाओं से मन फेरकर इस युग में संयम और धर्म और भक्‍ति से जीवन बिताएँ" (तीतुस 2:12)।

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