क्या ट्यूरिन का कफन प्रमाणिक है?


प्रश्न: क्या ट्यूरिन का कफन प्रमाणिक है?

उत्तर:
ट्यूरिन का कफन मलमल का एक कपड़ा है, जिसके लिए कुछ लोगों के द्वारा विश्‍वास किया जाता है कि यीशु मसीह के शरीर को इस के द्वारा ढकते हुए कब्र में गाड़ गया था। चारों सुसमाचारों में से प्रत्येक इसका वृतान्त को मलमल के एक कपड़े का होने के द्वारा यीशु के शरीर को ढकने के द्वारा देते हैं (मत्ती 27:59, मरकुस 15:46, लूका 23:53, यूहन्ना 19:40)। ट्यूरिन के कफन की "खोज" की गई थी, या इसे कम से कम पहली बार 14वीं श्ताब्दी में सार्वजनकि प्रदर्शनी के लिए रखा गया था। इसे ट्यूरिन का कफन इसलिए कह कर पुकारा जाता है, क्योंकि यह स्थाई रूप से — इटली के ट्यूरिन नामक शहर में पड़ा हुआ है।

यहाँ पर यहाँ एक वैबसाइट को दिया गया है, जिसमें ट्यूरिन के कफन के कुछ चित्र/दृश्य सम्मिलित हैं: http://www.shroud.com/examine.htm. ऐसा आभासित होता है कि ट्यूरिन का कफन एक ऐसे व्यक्ति के ऊपर लपेटा गया था, जिसे क्रूसित किया गया था। उस व्यक्ति के घाव यीशु को दी हुई क्रूसीकरण की यातना के समय सिर, पीठ और पाँवों के ऊपर आए हुए घावों के अनुरूप ही पाए गए हैं।

क्या ट्यूरिन के कफन में ही वास्तव में यीशु मसीह को गाड़ा गया था? ट्यूरिन के कफन की प्रामाणिकता के ऊपर बहुत अधिक तर्क वितर्क पाया जाता है। कुछ लोग पूरी तरह से आश्‍वस्त हैं कि यह मसीह को गाडे जाने वाला ही कपड़ा है। दूसरों का मानना है कि यह एक बनावटी या कला का कार्य है। ट्यूरिन के कफन की तिथि निर्धारित जाँच ने इसे 10 वीं शताब्दी ईसा पूर्व के होने की तिथि दी है। अन्य परीक्षणों में ऐसे बीजाणु/पराग या कवक पाए गए हैं, जो कि इस्राएल में सामान्य रूप से पाए जाते हैं और इन्हें 1ली शताब्दी की तिथि का होना कहा जा सकता है। तथापि, इसकी कोई निर्णायक तिथि या ऐसी ही कोई तिथि नहीं पाई जाती है।

ट्यूरिन के कफन की प्रामाणिकता के विरूद्ध दिए जाने वाला तर्क यह है कि गाडे जाने के लिए इस तरह के कफन के लिए बाइबल के पास पूर्ण रूप से प्रमाण की कमी का होना है। जैसा कि पहले ही कह दिया गया है कि बाइबिल मलमल के एक पूरे टुकड़े का उल्लेख करती है, जिसे यीशु के शरीर के ऊपर क्रूस से उतारे जाने के लिए उपयोग किया गया था। इस मलमल को कदाचित् अरमतिया के यूसुफ के द्वारा यीशु की देह को निकट की किसी कब्र में ले जाने के उपयोग किया गया था। गाडे जाने के लिए कब्र की शीघ्रता से तैयारी की गई थी; जिसमें शरीर को धोने और इसे फिर से लपेटना इत्यादि सम्मिलित था। लूका 24:12 में "कपड़ों के टुकड़ों" का ही उल्लेख करता है। इन्हीं टुकड़ों (बहुवचन) का वर्णन यूहन्ना 20:5-6 में दो बार किया गया है। और यूहन्ना 20:7 कहता है कि "एक कपड़ा था, जिसे यीशु के सिर के चारों ओर लिपटा हुआ था।" ये वृतान्त वास्तविक रूप से गाड़े जाने वाले — एक बड़े टुकड़े की अपेक्षा मलमल के छोटे "टुकड़ों" का है; और एक पृथक कपड़े ने सिर को ढका हुआ था — जो इस दावा का अस्वीकृत करता हुआ प्रतित होता है कि ट्यूरिन का कफन मसीह के गाड़े जाने का वाला कपड़ा नहीं था।

इस कारण, हमें ट्यूरिन के कपड़ों के क्या अर्थ लेने चाहिए? हो सकता है कि क्रूस पर चढ़ाए हुए किसी एक व्यक्ति के गाड़े जाने का कफन होगा, परन्तु इसका यीशु की मृत्यु के साथ किसी तरह के कोई सम्बन्ध की सम्भावना नहीं है। चाहे यह मसीह को गाड़े जाने वाला प्रामाणिक कफन का कपड़ा ही क्यों न था, तथापि, ट्यूरिन के कफन की आराधना या पूजा नहीं की जानी चाहिए। क्योंकि ट्यूरिन के कफन का सन्देहपूर्ण स्वभाव है, इसे मसीह के पुनरुत्थान के प्रमाण के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता है। हमारा विश्‍वास ट्यूरिन के कफन के ऊपर नहीं अपितु परमेश्‍वर के वचन के ऊपर निर्भर होना चाहिए।

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क्या ट्यूरिन का कफन प्रमाणिक है?