सर्प का वंश सिद्धान्त क्या है?


प्रश्न: सर्प का वंश सिद्धान्त क्या है?

उत्तर:
सर्प का वंश धर्मसिद्धान्त बाइबल की कमजोर व्याख्या और अंधविश्‍वास के आधार पर निर्मित एक विश्‍वास है। यह उन लोगों के लिए एक प्राथमिक सैद्धान्तिक संसाधन है, जो नस्लीय पूर्वाग्रह को सही ठहराने के लिए पवित्रशास्त्र का उपयोग करना चाहते हैं। सर्प का वंश सिद्धान्त मसीही पहचान आन्दोलन और केनाइट अर्थात् कैन आधारित धर्मसिद्धान्त जैसी अन्य गलत मान्यताओं के साथ बहुत अधिक निकटता से सम्बन्धित है। कई झूठी मान्यताओं की तरह, इसमें एक अन्तर्निहित बचाव तन्त्र कार्यरत् है; अर्थात्, जो भी इस से असहमत है, उन पर सर्प का पुत्र होने का आरोप लगा दिया जाता है। सर्प का वंश सिद्धान्त के साथ सबसे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण समस्याओं में से एक यह है कि यह पूर्वाग्रह के ऊपर निर्भर करता है और बाइबल की व्याख्या से उलझा हुआ है, जिसके कारण तर्कसंगत तरीके से इसके प्रति चर्चा करना बहुत अधिक कठिन हो सकता है।

सरल शब्दों में कहना, सर्प का वंश सिद्धान्त यह शिक्षा देता है कि हव्वा का पाप सरल रूप से आज्ञा की अवहेलना मात्र नहीं था, परन्तु सर्प के साथ यौन सम्पर्क था, और कैन हव्वा और शैतान का पुत्र था। कैन के वंशज इस दृष्टिकोण के अनुसार शैतान के पुत्र हैं, और इसमें कोई भी जाति या समूह सम्मिलित है, जिसे सर्प-वंश आधारित विश्‍वासी चुनने के लिए पसन्द नहीं करता है। यह विचार अंधविश्‍वासवादी मान्यताओं में निहित है और विशेष रूप से स्वयं को सर्वोच्च मानने वाले श्वेत रंग वाले और सामवादी-विरोधी लोगों के मध्य में लोकप्रिय है; यूनीफीकेशन चर्च भी इस विचार का समर्थन करता है। शेफर्ड चैपल के अर्नोल्ड मुरे और विलियम ब्रैनहम जैसे झूठे भविष्यद्वक्ताओं और झूठे शिक्षकों ने भी इस विचार को स्वीकार किया। यद्यपि गलत तरीके से लागू होने के कारण किसी एक विचार की आलोचना नहीं की जानी चाहिए, परन्तु जब यह तार्किक रूप से पाप की ओर जाता है, तो ऐसी ही किसी भी विचार की निन्दा करना उचित है। एक ऐसा दर्शन जो यह शिक्षा देता है कि कुछ जातियाँ अथवा नस्लें या लोग सार्वभौमिक रूप से शैतानी हैं, जैसे कि सर्प का वंश धर्मसिद्धान्त में पाया जाता है।

जो सर्प-का वंश विचारों का समर्थन करते हैं, वे बाइबल में से कई सन्दर्भों को प्रमाण के रूप में बताते हैं कि उनका विचार सही है। लगभग किसी भी अपवाद के बिना, इन "प्रमाणों" को एक व्याख्या की आवश्यकता होती है, जो एक वचन के सन्दर्भ के लिए पूरी तरह से अनुचित होता है। उदाहरण के लिए, उत्पत्ति 3:13 को अक्सर दावा किया जाता है कि "छल" दिया या "धोखा दिया" शब्द का अनुवाद वास्तव में "बहकाया" था। सन्दर्भ और शैक्षणिक विद्वता इस बात से असहमत होंगे। नीतिवचन 30:20 रूपक के रूप से खाने और यौन अनैतिकता की तुलना करता है; जिसे सर्प-का वंश आधारित विश्‍वासियों के द्वारा बढ़ा चढ़ा कर उपयोग किया जाता कि पाप में पतित होना यौन सम्पर्क था। अन्य सन्दर्भों में यहूदा 1:14 और मत्ती अध्याय 13 में जंगली बीजों के दृष्टान्त सम्मिलित हैं। जो लोग सर्प का वंश धर्मसिद्धान्त में विश्‍वास करते हैं, वे शिक्षा देते हैं कि इस दृष्टान्त में "शैतान के बच्चों" के लिए यीशु के द्वारा दिया हुआ विवरण जैविक अर्थ में सत्य है। एक बार फिर से, जब आप इस विश्‍वास को बाइबल में दृढ़ता से लगाए जाने के लिए प्रयास कर रहे होते है, तो आप उसे इसी तरह से देखेगा; यह स्वाभाविक रूप से पवित्रशास्त्र में से नहीं पढ़ा जा सकता है।

बाइबल में वास्तव दर्जनों ऐसे स्थान हैं, जहाँ पर इस झूठे विचार की धज्जियाँ उड़ाई हुई है, तौभी इस सिद्धान्त में विश्‍वास रखने वाला प्रत्येक यही चाहता है कि एक व्यक्ति को पहले से ही सर्प-के वंश के दृष्टिकोण में विश्‍वास करने की आवश्यकता है। केवल एक वचन पढ़कर और यह कहकर कि, "यदि आप मानते हैं कि सर्प का वंश सिद्धान्त सत्य है, तो यह अर्थ रखता है..।" क्या कोई व्यक्ति इस झूठे दर्शन का समर्थन कर सकता है। इस कारण से, सर्प का वंश आधारित धर्मसिद्धान्त के विरूद्ध तर्क प्रस्तुत करना कठिन हो सकता है। जो लोग इस सिद्धान्त को मानते हैं, वे "सर्प-का वंश सूक्ष्मदर्शी" के माध्यम से पवित्रशास्त्र की व्याख्या करते हैं और उनमें अन्य व्याख्याओं को स्वीकार करने की सम्भावना नहीं है, यह बात कोई अर्थ नहीं रखती है कि चाहे आप सन्दर्भ और शैक्षणिक विद्वता के साथ कितनी भी अच्छी तरह से समर्थित क्यों न हो।

सर्प का वंश धर्मसिद्धान्त में निहित कुछ मूलभूत प्रश्न और विरोधाभास पाए जाते हैं, जिनका उपयोग सत्य की कमी को प्रदर्शित करने के लिए किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, गलतियों 3:28 स्पष्ट रूप से बताता है कि परमेश्‍वर के आगे खड़े होने के लिए हमारी जाति और लिंग का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। दूसरा पतरस 3:9 कहता है कि परमेश्‍वर चाहता है कि हर किसी को बचाया जाए, न कि "कैन के बच्चों के अतिरिक्त और कोई नहीं।" कहीं भी पवित्रशास्त्र में किसी को भी "कैन वंशी" के रूप में नहीं पहचाना जाता है या कैन के वंश का होने के कारण निन्दा की जाती है। नए नियम के लेखकों के द्वारा हमें ऐसे लोगों के बारे में कभी भी चेतावनी नहीं दी जाती है। साथ ही, यह प्रश्न भी सामने आ जाता है कि कैसे या क्यों जल प्रलय से ऐसे लोग बच गए थे। यह धर्मसिद्धान्त कल्पना करता है कि मूल पाप यौन था, परन्तु यह इस बात की व्याख्या नहीं कर सकता कि क्यों बाइबल का पूरा शेष भाग मूल पाप का आज्ञा की अवहेलना के रूप में प्रगट करता है, यौन सम्पर्क के रूप में नहीं।

सर्प-का वंश दर्शन इसलिए सबसे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि यह दो मुख्य समस्याओं की ओर सीधे और तार्किक रूप से ले जाता है। नस्लवाद जिसने अब तक सबसे अधिक क्षति पहुँचाई है; का यह विश्‍वास है कि कुछ निश्‍चित जातियाँ छुटकारा न पाने के लिए ठहराई हुई हैं, जिसके लिए कोई सकारात्मक उत्तर नहीं है। इस तरह के एक वैश्‍विक दृष्टिकोण का एकमात्र सम्भावित परिणाम पूर्वाग्रह और कट्टरता से ग्रसित होना है। सर्प का वंश धर्मसिद्धान्त के आलोचकों को भी स्वीकार करने से इन्कार करने की प्रवृत्ति पाई जाती है, क्योंकि दर्शन के यह सिद्धान्त में "कैन वंश" के होने में विश्‍वास करता है। अर्नोल्ड मुरे इसी दुर्व्यवहार के लिए विशेष रूप से दोषी पाए जाते हैं। सौभाग्य से विश्‍वासियों के लिए, परमेश्‍वर ने हमें पवित्रशास्त्र एक संसाधन के रूप में दिया है, जो हमें सत्य दिखा सकता है। हमें केवल सही ज्ञान को खोजने के लिए निष्पक्ष और खुली आँखों के साथ इसे पढ़ने की आवश्यकता है।

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