साराप क्या हैं? क्या साराप स्वर्गदूत हैं?



प्रश्न: साराप क्या हैं? क्या साराप स्वर्गदूत हैं?

उत्तर:
साराप (अग्निमयी, ज्वालामयी) ऐसे स्वर्गीय प्राणी हैं जो मन्दिर में भविष्यद्वक्ता यशायाह को हुए परमेश्‍वर के दर्शन से सम्बन्धित हैं, जब परमेश्‍वर ने उसे भविष्यद्वक्ता की सेवकाई के लिए बुलाहट दी थी (यशायाह 6:1-7)। यशायाह 6:2-4 लिपिबद्ध करता है, “उससे ऊँचे पर साराप दिखाई दिए; उनके छ: छ: पंख थे; दो पंखों से वे अपने मुँह को ढाँपे थे और दो अपने पाँवों को, और दो से उड़ रहे थे। वे एक दूसरे से पुकार पुकारकर कह रहे थे: "सेनाओं का यहोवा पवित्र, पवित्र, पवित्र है; सारी पृथ्वी उसके तेज से भरपूर है।" और पुकारनेवाले के शब्द से डेवढ़ियों की नींवें डोल उठीं, और भवन धूएँ से भर गया।" साराप ऐसे स्वर्गदूत हैं जो परमेश्‍वर की आराधना निरन्तर करते रहते हैं।

यशायाह अध्याय 6 ही केवल एक ऐसा स्थान हैं जहाँ पर बाइबल विशेष रूप से सारापों के बारे में उल्लेख करती है। प्रत्येक साराप के छ: छ: पंख थे। वे दो का उपयोग उड़ने, दो का उपयोग पैरों को ढकने और दो का उपयोग अपने चेहरे को ढकने के लिए करते थे (यशायाह 6:2)। साराप उस सिंहासन के ऊपर उड़ते थे जिसके ऊपर परमेश्‍वर विराजमान है, उसकी स्तुति करते हुए वे परमेश्‍वर की महिमा और वैभवता की ओर विशेष ध्यान को आकर्षित करते है। ऐसा आभासित होता है कि ये प्राणी यशायाह के लिए शुद्धिकरण के कार्य के लिए प्रतिनिधि के रूप में भी कार्य करते हैं जब वह उसकी भविष्यद्वक्ता की सेवकाई को आरम्भ करता है। एक ने यशायाह के होठों के ऊपर गर्म अंगारे को इन शब्दों के साथ कहते हुए रख दिया, "देख, इसने तेरे होठों को छू लिया है, इसलिये तेरा अधर्म दूर हो गया और तेरे पाप क्षमा हो गए" (यशायाह 6:7)। अन्य तरह के पवित्र स्वर्गदूतों की तरह ही, साराप भी पूर्ण रीति से परमेश्‍वर के प्रति आज्ञाकार हैं। करूबों की तरह ही, साराप भी विशेष रूप से परमेश्‍वर की आराधना के ऊपर ध्यान को केन्द्रित करते हैं।



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