क्या हमें अपनी आत्मा को शैतान को बेचना सम्भव है?



प्रश्न: क्या हमें अपनी आत्मा को शैतान को बेचना सम्भव है?

उत्तर:
डॉ. फाऊतुस की कल्पित कथा में, एक व्यक्ति शैतान के साथ एक समझौता या सौदा करता है: कि यह व्यक्ति उसके शरीर और आत्मा या प्राण के बदले में, 24 वर्षों के लिए अलौकिक शक्ति और सुख प्राप्त करेगा। शैतान इस सौदे के लिए सहमत हो जाता है और डॉ. फाऊतुस निश्चित समय के लिए आमोद प्रमोद का आनन्द प्राप्त करता है, परन्तु उसका अन्धकार से भरा हुआ भविष्य मुहरबंद हो जाता है। 14 वर्षों के पश्चात्, फाऊतुस शैतान की योजनाओं को विफल करने का प्रयास करता है, परन्तु इतना करने पर भी, वह एक भयंकर मृत्यु को प्राप्त करता है। यह कल्पित कथा नैतिक शिक्षा को देने वाली एक कहानी और पाप की मजदूरी के लिए एक रूपक के रूप में अच्छी तरह से कार्य करती है, परन्तु इसकी कहानी के विवरण बाइबल आधारित नहीं हैं।

बाइबल कहीं पर भी शैतान को एक व्यक्ति के द्वारा "स्वयं की आत्मा" को बेचने जैसी कोई घटना नहीं बताती है, और न ही यह ऐसा कोई निहितार्थ प्रदान करती है, जिसमें शैतान के साथ इस तरह का कोई मोल भाव किया गया हो। यहाँ पर कुछ ऐसी बातें दी गई हैं, जिसे पवित्र शास्त्र शैतान के बारे में प्रगट करता है:

1) शैतान के पास यहाँ तक कि स्वर्गदूतों का विरोध करने के लिए पर्याप्त मात्रा में सामर्थ्य है (यहूदा 9; दानिय्येल 10:12-13)।

2) शैतान ज्योति के स्वर्गदूत का रूप धारण करके धोखा देने का प्रयास करता है (2 कुरिन्थियों 11:14-15)।

3) परमेश्‍वर ने शैतान के आक्रमणों के विरूद्ध हमारे लिए सुरक्षा प्रदान करने वाले तरीकों का प्रबन्ध किया है (इफिसियों 6:11-12)।

4) शैतान की सामर्थ्य परमेश्‍वर की इच्छा के द्वारा सीमित की गई है (अय्यूब 1:10-12; 1 कुरिन्थियों 10:13)।

5) इस "संसार का ईश्‍वर" होने के नाते शैतान का आधिपत्य उन लोगों के ऊपर है, जो मसीह के बिना इस संसार में जीवन व्यतीत करते हैं (2 कुरिन्थियों 4:4)।

निश्चित ही, ये वे लोग हैं, जो शैतान के प्रत्यक्ष नियन्त्रण के अधीन दु:खों से पीड़ित होते हैं, जैसे कि फिलिप्पी नगर की भावी कहने वाली दासी (प्रेरितों के काम 16:16-19)। और ऐसे भी लोग हैं, जो स्वयं को शैतान के कार्यों को करने के लिए समर्पित कर देते हैं, जैसे कि शमौन जादूगर (प्रेरितों के काम 8:9-11) और इलिमास टोन्हा (प्रेरितों के काम 13:8)। तथापि, इन तीनों उदाहरणों में से प्रत्येक में, परमेश्‍वर की सामर्थ्य शैतान के दासत्व के ऊपर जय पाती है। सच्चाई तो यह है कि, शमौन को पश्चाताप करने का अवसर प्रदान किया जाता है (प्रेरितों के काम 8:22)। स्पष्ट है कि, शमौन की आत्मा का विकल्प में "बेचने" जैसी कोई बात नहीं पाई जाती है।

मसीह के बिना, हम सभी मृत्यु के दण्ड के अधीन हैं (रोमियों 3:23)। हमारा उद्धार होने से पहले हम सभी शैतान के बन्धन में थे, जैसा कि 1 यूहन्ना 5:19 कहता है, "सारा संसार उस दुष्ट के वश में है।" परमेश्‍वर की स्तुति हो, कि हमारे पास एक नया स्वामी है, जो पाप के बन्धन को तोड़ सकता और हमें स्वतन्त्र कर सकता है (1 कुरिन्थियों 6:9-11; मरकुस 5:1-15)।

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