परमेश्वर के दर्शन की खोज करने का क्या अर्थ है?


प्रश्न: परमेश्वर के दर्शन की खोज करने का क्या अर्थ है?

उत्तर:
कई बार पवित्रशास्त्र में, परमेश्वर के लोगों को परमेश्वर के दर्शन या चेहरे की खोज करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। एक परिचित वचन घोषणा करता है, "तब यदि मेरी प्रजा के लोग जो मेरे कहलाते हैं, दीन होकर प्रार्थना करें और मेरे दर्शन के खोजी होकर अपनी बुरी चाल से फिरें, तो मैं स्वर्ग में से सुनकर उनका पाप क्षमा करूँगा और उनके देश को ज्यों का त्यों कर दूँगा" (2 इतिहास 7:14)। यदि हम परमेश्वर का चेहरा ही नहीं देख सकते हैं, तो हम कैसे परमेश्वर के चेहरे की खोज कैसे करेंगे?

पुराने नियम में "चेहरे" के लिए इब्रानी शब्द का अनुवाद अक्सर "उपस्थिति" के रूप में किया जाता है। जब हम परमेश्वर के चेहरे की खोज करते हैं, तो हम उसकी उपस्थिति की खोज करते हैं। परमेश्वर के चेहरे की खोज करने का आह्वान उसके लोगों के लिए किया गया था क्योंकि उन्होंने उसे त्याग दिया था और उन्हें उसकी ओर वापस लौटने की आवश्यकता थी।

एक व्यक्ति के चेहरे से उसके चरित्र और व्यक्तित्व के बारे में बहुत कुछ पता चलता है। हम एक व्यक्ति की आन्तरिक भावनाओं को चेहरे के बाहरी रूप से व्यक्त करते हुए देख सकते हैं। हम किसी व्यक्ति को उसके चेहरे को देखकर पहचानते हैं। एक अर्थ में, एक व्यक्ति का चेहरा उस पूरे व्यक्ति का ही प्रतिनिधित्व करता है। बाइबल के लेखकों के लिए, मानवीय चेहरा पूरे व्यक्ति का प्रतिनिधित्व कर सकता है।

भजन संहिता 105:4 में, परमेश्वर के विश्वासयोग्य लोगों को "उसके दर्शन के लगातार खोजी बने रहने" के लिए बुलाया गया था। यहाँ तक कि यदि हम परमेश्वर को नहीं भी छोड़ते हैं, तौभी ऐसे समय आते हैं जब हम उसकी उपेक्षा करते हैं। परमेश्‍वर का चेहरा, उसका पवित्र चरित्र, अक्सर हमारी मानवीय दशा और शारीरिक इच्छाओं से प्रेरित होता है। यही कारण है कि प्रभु परमेश्वर हमें निरन्तर उसके चेहरे या दर्शन की खोज करने के लिए कहता है। जीवन के प्रत्येक अनुभव में प्रभु हमारा निरन्तर साथी बनना चाहता है। वह चाहता है कि हम उसके माध्यम से उसे पूरी तरह से जानें। यदि हम उसके निकट आते हैं, तो परमेश्वर हमारे निकट आएगा: "परमेश्‍वर के निकट आओ तो वह भी तुम्हारे निकट आएगा। हे पापियो, अपने हाथ शुद्ध करो; और हे दुचित्ते लोगो, अपने हृदय को पवित्र करो" (याकूब 4:8)।

जब हम प्रार्थना में परमेश्वर के पास पहुँचते हैं, तो हम उसके चेहरे की खोजते हैं: "यहोवा के पर्वत पर कौन चढ़ सकता है? और उसके पवित्रस्थान में कौन खड़ा हो सकता है? जिसके काम निर्दोष और हृदय शुद्ध है, जिसने अपने मन को व्यर्थ बात की ओर नहीं लगाया, और न कपट से शपथ खाई है। वह यहोवा की ओर से आशीष पाएगा, और अपने उद्धार करनेवाले परमेश्‍वर की ओर से धर्मी ठहरेगा। ऐसे ही लोग उसके खोजी हैं, वे तेरे दर्शन के खोजी याकूबवंशी हैं" (भजन संहिता 24:3-6)।

परमेश्वर के दर्शन की खोज करना ही आराधना का सही स्वरूप है। मसीही जीवन एक ऐसा जीवन है जो परमेश्वर की उपस्थिति और अनुग्रह की खोज के प्रति समर्पित है। प्रभु परमेश्वर चाहता है कि हम विनम्रतापूर्वक और भरोसे के साथ उसके चेहरे को प्रार्थनाओं और अपने समय में उसके वचन में खोजें। किसी व्यक्ति के चेहरे को ध्यान से देखने के लिए निकटता की आवश्यकता होती है। परमेश्‍वर के चेहरे को देखना उसके साथ अन्तरंग सम्बन्ध विकसित करने के जैसा है: "हे परमेश्‍वर, तू मेरा परमेश्‍वर है, मैं तुझे यत्न से ढूँढ़ूँगा; सूखी और निर्जल ऊसर भूमि पर, मेरा मन तेरा प्यासा है, मेरा शरीर तेरा अति अभिलाषी है। इस प्रकार से मैं ने पवित्रस्थान में तुझ पर दृष्‍टि की, कि तेरी सामर्थ्य और महिमा को देखूँ। क्योंकि तेरी करुणा जीवन से भी उत्तम है, मैं तेरी प्रशंसा करूँगा!" (भजन संहिता 63:1-3)।

परमेश्वर के चेहरे पर हमारे लिए मुस्कान होना हमारे प्रति आशीष, प्रेम और कृपा की अभिव्यक्ति है: "यहोवा तुझ पर अपने मुख का प्रकाश चमकाए, और तुझ पर अनुग्रह करे" (गिनती 6:25; भजन संहिता 80:3, 7, 19 को भी देखें)। जब हम परमेश्वर के निकट आते हैं, तो हम उसके चमकते हुए अनुग्रह से आशीषित होते हैं। हम उसे केवल उससे प्राप्त करने और अपनी आवश्यकताओं की एक सूची देने के लिए उसका पीछा नहीं करते क्योंकि हम जानते हैं कि परमेश्वर को पहले से ही पता है कि हमें क्या चाहिए (मत्ती 6:7-8, 32-33)। हमें भरोसा है कि वह हमारी देखभाल करेगा।

परमेश्वर के चेहरे की खोज करने का अर्थ है कि उसके चरित्र को जानना और किसी भी अन्य वस्तु की अपेक्षा — उसकी उपस्थिति — की चाहता है जिसे वह हमें दे सकता है।

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