दागे हुए विवेक का क्या अर्थ है?


प्रश्न: दागे हुए विवेक का क्या अर्थ है?

उत्तर:
बाइबल 1 तीमुथियुस 4:2 में दागे हुए विवेक या अन्तरात्मा के बारे में बात करती है। विवेक हम में से प्रत्येक के भीतर वास करता हुआ परमेश्‍वर-प्रदत्त नैतिक नियन्त्रक है (रोमियों 2:15)। यदि विवेक "दागा" हुआ है — शाब्दिक अर्थ "सुन्न" पड़ गया है — तो यह यह असंवेदनशील हो गया है। ऐसा विवेक ठीक से कार्य नहीं करता; ऐसा प्रतीत होता है, कि मानो सही और गलत के अर्थ का पता लगाने वाले "ऊत्तक आत्मिक रूप से सुन्न" पड़ गए हैं। जिस तरह से एक पशु को दागने वाले जलते हुए लोहे से दागा जाता है, ताकि वह पीड़ा के लिए आगे के जीवन के प्रति सुन्न हो जाए, ठीक उसी प्रकार एक दागे हुए विवेक वाले व्यक्ति का मन नैतिक संताप के प्रति संवेदनहीन हो जाता है।

पौलुस 1 तीमुथियुस 4:1-2 में ऐसे लोगों की पहचान करता है, जिनका विवेक दागा हुआ है: "परन्तु आत्मा स्पष्टता से कहता है कि आनेवाले समयों में कितने लोग भरमानेवाली आत्माओं, और दुष्टात्माओं की शिक्षाओं पर मन लगाकर विश्‍वास से बहक जाएँगे। यह उन झूठे मनुष्यों के कपट के कारण होगा, जिनका विवेक मानों जलते हुए लोहे से दागा गया है।" इस सन्दर्भ में, हम झूठे शिक्षकों के बारे में तीन बातों की शिक्षा पाते हैं, जो दूसरों को धर्म त्याग के मार्ग पर ले जाते हैं : 1) कि वे दुष्टात्माओं के प्रवक्ता हैं, क्योंकि वे ऐसी शिक्षाओं के ऊपर मन लगाते हैं, जिनकी "शिक्षा दुष्टात्माओं के द्वारा" दी जाती हैं; 2) कि वे कपट से भरे हुए झूठे लोग हैं, क्योंकि वे पवित्रता का मुखौटा तो पहनते हैं, परन्तु झूठ से भरे हुए हैं; और 3) कि वे विवेकहीन हैं, क्योंकि उनके विवेक को जलते हुए लोहे से संवेदनहीन कर दिया गया है। यह स्पष्टता से बताता है कि कैसे झूठे शिक्षक बिना किसी शर्म के झूठ बोलते हैं और कुटिलता के साथ धोखा दे सकते हैं? क्योंकि उनका विवेक दागा हुआ है। वे संवेदना रहित लोग हैं, जिनके लिए झूठ बोलना गलत नहीं है।

इसी पत्री में पहले, पौलुस ने दागे हुए विवेक के स्थान पर "अच्छे विवेक" की बात की है। "परमेश्‍वर के कार्य में वृद्धि" करने के लिए, वह कहता है, यह विश्‍वास और उस प्रेम के द्वारा होता है जो, "शुद्ध मन और अच्छे विवेक और कपटरहित विश्‍वास से प्रेम" से आता है (1 तीमुथियुस 1:4–5)। एक अच्छे विवेक में गलत से सही कहने की क्षमता है और यह अपराध से मुक्त होता है। एक अच्छे विवेक वाला व्यक्ति अपनी निष्ठा को बनाए रखता है। वह उन लोगों की संगति का आनन्द लेता है, जो "ज्योति में चलते हैं, जैसे वह [यीशु] ज्योति में है" (1 यूहन्ना 1:7)। शैतान के झूठ एक अच्छे विवेक वाले व्यक्ति के लिए शाप हैं। धर्म त्यागियों के झूठ का अनुसरण करने की अपेक्षा, वह "विश्‍वास और अच्छे विवेक को थामे" रहता है (1 तीमुथियुस 1:18–19)।

नीतिवचन 6:27 व्यभिचार के परिणामों को स्पष्ट करने के लिए एक अंलकारिक प्रश्‍न को पूछता है: " क्या हो सकता है कि कोई अपनी छाती पर आग रख ले; और उसके कपड़े न जलें?" झूठी शिक्षा के सम्बन्ध में प्रश्‍न का संक्षिप्त वर्णन यह होगा कि, "क्या एक धर्मत्यागी व्यक्ति स्वयं के दागे हुए विवेक के बिना नरक के अज्ञात अग्निमयी झूठों से बच सकता है?"

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