क्या शैतान के पास वातारण को नियन्त्रित करने की शक्ति है?


प्रश्न: क्या शैतान के पास वातारण को नियन्त्रित करने की शक्ति है?

उत्तर:
प्राकृतिक आपदाओं और भयानक तूफानों की बढ़ती हुई सँख्या के कारण कई लोग अचम्भे में हैं, कि वातारण को परमेश्‍वर या शैतान कौन नियन्त्रित करता है? कुछ लोग इफिसियों 2:2 में "आकाश के अधिकार के हाकिम" और 2 कुरिन्थियों 4:4 में "संसार के ईश्‍वर" के रूप में शैतान के विवरण के बारे में बताते हैं। पवित्रशास्त्र की जाँच से पता चलता है कि शैतान और उसकी दुष्टात्माओं के द्वारा जो कुछ भी प्रभाव वातावरण के ऊपर पड़ता है, वह परमेश्‍वर की परम सम्प्रभुता के द्वारा प्रतिबन्धित है। शैतान, हमारे "विरोधी" को गम्भीरता से लिया जाना चाहिए; हमें धर्मनिरपेक्ष संसार में उसके अस्तित्व और इसके ऊपर उसकी सीमित शक्ति को स्वीकार करना चाहिए। साथ ही, शैतान, एक पराजित पाप में गिरा हुआ स्वर्गदूत, सुपर-प्राणी है, परन्तु अलौलिक नहीं है, उसके पास केवल वही शक्ति है, जिसे परमेश्‍वर उसे प्रयोग करने की अनुमति देता है (2 थिस्सलुनीकियों 2:6-11)।

यदि शैतान वातावरण को प्रभावित कर सकता है, तो ऐसा केवल परमेश्‍वर की अनुमति और प्रतिबन्धों के अधीन ही होगा, जैसा कि अय्यूब की घटना में पाया जाता है। शैतान को परमेश्‍वर के द्वारा उसकी परीक्षा लेने के लिए दु:ख दिए जाने की अनुमति दी गई थी और इसमें "परमेश्‍वर की आग" (कदाचित् बिजली) भी सम्मिलित थी, जो "आकाश से गिरी और उस से भेड़-बकरियाँ और सेवक जलकर भस्म हो गए" (अय्यूब 1:16)। इसके पश्‍चात् एक "प्रचण्ड वायु" (सम्भवतः एक बवण्डर) ने उसके सबसे बड़े बेटे के घर को नष्ट कर दिया और अय्यूब के बच्चों को मार डाला (वचन 18-19)। इस कारण यदि स्वर्ग से आग और बवण्डर किसी तरह से शैतान के कारण आए थे, तो वे अभी भी अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अन्तिम रूप से परमेश्‍वर के ही नियन्त्रण में थे।
यह परमेश्‍वर है, शैतान नहीं, जो वातारण को नियन्त्रित करता है (निर्गमन 9:29; भजन संहिता 135:6-7; यिर्मयाह 10:13)।
परमेश्‍वर आकाश और वर्ष को नियन्त्रित करता है (भजन संहिता 77:16-19)।
परमेश्‍वर हवा को नियन्त्रित करता है (मरकुस 4:35-41; यिर्मयाह 51:16)।
परमेश्‍वर ब्रह्माण्ड को थामे रखता है और बनाए रखता है (इब्रानियों 1:3)।
परमेश्‍वर के पास बादलों के ऊपर सामर्थ्य है (अय्यूब 37:11-12, 16)।
परमेश्‍वर के पास बिजली के ऊपर सामर्थ्य है (भजन संहिता 18:14)।
परमेश्‍वर की सारी प्रकृति के ऊपर सामर्थ्य है (अय्यूब 26)।

परमेश्‍वर वातावरण सहित सभी बातों को अपने नियन्त्रण में रखता है। अपने प्रयोजन के माध्यम से, परमेश्‍वर उसकी सन्तान के लिए प्रबन्ध करता है और उनकी रक्षा करता है, परन्तु वह शैतान, दुष्टात्माओं और मानव जाति को पाप, बुराई और दुष्टता के कार्यों को करने के लिए उनकी सीमित इच्छा का उपयोग करने की अनुमति देता है। ये वही प्राणी हैं, जो किसी भी और सभी मानव निर्मित आपदाओं और त्रासदियों के कारण पूरी तरह से उत्तरदायी हैं। हम जानते हैं कि परमेश्‍वर ने जो कुछ भी ठहराया है, वह पूरा होता ही है (इफिसियों 1:11; रोमियों 11:36) और इसलिए उसका अदृश्य हाथ हमारी पीड़ा में है, यद्यपि वह पाप नहीं कर सकता या बुराई का अपराधी नहीं हो सकता (याकूब 1:13-17 )।

विश्‍वासी के लिए कोई भी पीड़ा अर्थहीन नहीं हो सकती है, चाहे पीड़ा मानव जाति या प्राकृतिक घटना के कारण ही क्यों न आई हो। हम सदैव यह नहीं जानते कि बुरे कार्य या प्राकृतिक आपदाएँ क्यों घटित होते हैं, परन्तु हमें आश्‍वस्त किया गया है कि हमारे सभी परीक्षाओं और क्लेशों में परमेश्‍वर अपनी महिमा को ले आने और हमारे अनन्तकालीन भले के लिए सभी बातों को एक साथ मिलाकर काम कर रहा है (रोमियों 8:18-28)।

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