क्या उत्पत्ति अध्याय 3 में शैतान सर्प था?


प्रश्न: क्या उत्पत्ति अध्याय 3 में शैतान सर्प था?

उत्तर:
हाँ, उत्पत्ति अध्याय 3 में सर्प शैतान ही था। शैतान या तो एक सांप के रूप में प्रगट हुआ था, सांप की देह में था, या आदम और हव्वा को यह विश्‍वास करने के लिए धोखा दे रहा था कि वह सांप ही था, जो उनसे बात कर रहा था। सर्पों/सांपों में बोलने की क्षमता नहीं होती है। प्रकाशितवाक्य 12:9 और 20:2 दोनों ही शैतान को एक सांप के रूप में वर्णित करते हैं। "उस ने उस अजगर, अर्थात् पुराने साँप को, जो इब्लीस और शैतान है, पकड़ के हज़ार वर्ष के लिये बाँध दिया" (प्रकाशितवाक्य 20:2)। "तब वह बड़ा अजगर, अर्थात् वही पुराना साँप जो इब्लीस और शैतान कहलाता है और सारे संसार का भरमानेवाला है, पृथ्वी पर गिरा दिया गया, और उसके दूत उसके साथ गिरा दिए गए" (प्रकाशितवाक्य 12:9)।

जबकि बाइबल स्पष्ट नहीं करती है कि सर्प खड़ा होता था या नहीं या शाप की प्राप्ति से पहले चलता था या नहीं, ऐसा प्रतीत होता है कि, अन्य सरीसृपों की तरह ही, यह कदाचित् चार पैरों पर चला करता था। यह उत्पत्ति 3:14 का सबसे अच्छा स्पष्टीकरण प्रतीत होता है, "तब यहोवा परमेश्‍वर ने सर्प से कहा, 'तू ने जो यह किया है इसलिये तू सब घरेलू पशुओं, और सब बनैले पशुओं से अधिक शापित है; तू पेट के बल चला करेगा, और जीवन भर मिट्टी चाटता रहेगा।'" सच्च तो यह है कि सर्प को उसके पेट से रेंगने और पृथ्वी की धूल को सदैव चाटते रहने के लिए शाप का दिया जाना, संकेत देने का एक तरीका है कि सर्प सदैव के लिए तुच्छ हो जाएगा और एक घृणित और घिनौना प्राणी हो जाएगा और सैदव के लिए ताड़ना और निन्दा की एक वस्तु के रूप में देखा जाएगा।

परमेश्‍वर ने सर्प को क्यों शाप दिया जबकि वह जानता था कि वास्तव में वह शैतान था, जो आदम और हव्वा को पाप की ओर ले गया था? सर्प का अन्तिम प्रतिफल एक उदाहरण है। सर्प का अभिशाप एक दिन शैतान का अन्तिम प्रतिफल होगा (प्रकाशितवाक्य 20:10; यहेजकेल 28:18-19)।

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