पवित्रिकृत किए हुए होने का क्या अर्थ है?


प्रश्न: पवित्रिकृत किए हुए होने का क्या अर्थ है?

उत्तर:
पवित्रिकृत किए हुए होने का अर्थ "अलग किए हुए होने" से है। पवित्रिकृत किए हुए होने के लिए समानार्थी शब्द पवित्र, पुनीत और प्रतिष्ठित हैं। बाइबल उन वस्तुओं की बात करती है, जिन्हें "पवित्रिकृत" किया गया था, जैसे कि सीनै पर्वत (निर्गमन 19:23) और मन्दिर की वस्तुएँ (मत्ती 23:17); दिन, जैसे सब्त का दिन (निर्गमन 20:8); नाम, जैसे परमेश्‍वर का नाम (मत्ती 6: 9); और लोग, जैसे इस्राएली (लैव्यव्यवस्था 20:7-8) और मसीही विश्‍वासी (इफिसियों 5:26)।

एक वस्तु को पवित्र करने का अर्थ यह है कि इसे एक विशेष उपयोग के लिए पृथक किया गया है। व्यवस्था देने के लिए सीनै को अन्य सभी पहाड़ों से अलग किया गया था। यरूशलेम में मन्दिर एक सच्चे परमेश्‍वर की आराधना के लिए अन्य सभी स्थानों से अलग किया गया था: "मैं ने इस भवन को अपनाया और पवित्र किया है कि मेरा नाम सदा के लिये इसमें बना रहे; मेरी आँखें और मेरा मन दोनों नित्य यहीं लगे रहेंगे"(2 इतिहास 7:16)।

जो वस्तुएँ पवित्रिकृत की गई हैं, वे परमेश्‍वर के उद्देश्यों की प्राप्ति लिए आरक्षित हैं, और इन्हें सांसारिक कार्यों के लिए उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। जिस रात बेबीलोन का पतन हुआ, राजा बेलशस्सर ने "सोने-चाँदी के पात्र...जो यरूशलेम के मन्दिर में से निकाले थे, उन्हें लाने का आदेश दिया ताकि राजा अपने प्रधानों, और रानियों और रखेलियों समेत उनमें पीए" (दानिय्येल 5:2)।

यीशु ने स्वयं के पवित्रिकृत होने के विषय में यूहन्ना 17:19 में में बताया है; दूसरे शब्दों में, वह पवित्र है और पाप से "पृथक" है। उसके अनुयायियों को वैसे ही पाप से और परमेश्‍वर के लिए उपयोग किए जाने के लिए पृथक होना चाहिए (1 पतरस 1:16 को देखें)।

जो लोग पवित्रिकृत किए गए हैं, उनका नया जन्म हुआ है और इसलिए वे परमेश्‍वर के परिवार का अंग हैं (इब्रानियों 2:11)। वे परमेश्‍वर के उपयोग के लिए आरक्षित हैं। वे अपने जीवन में "आत्मा के पवित्र करने वाले कार्य" को जानते हैं (1 पतरस 1:2)। वे समझते हैं कि उन्हें "पवित्र होने के लिए बुलाया गया है" (1 कुरिन्थियों 1:2)।

पवित्रिकृत किए हुए होने का अर्थ यह है कि परमेश्‍वर हमारे जीवनों में काम कर रहा है। पुराने नियम की व्यवस्था के अधीन, बलिदान के लहू को परमेश्‍वर के लिए अलग करना आवश्यक था: "सच तो यह है कि व्यवस्था के अनुसार प्राय: सब वस्तुएँ लहू के द्वारा शुद्ध की जाती हैं..." (इब्रानियों 9:22)। तम्बू के वस्त्र, पुरोहित के वस्त्र और लोगों के ऊपर लहू को छिड़क दिया जाता था। लहू के सम्पर्क में आने तक कुछ भी पवित्रिकृत नहीं माना जाता था। यह हमारे उद्धार के लिए मसीह के लूह को आत्मिक रूप से लागू किए जाने का चित्र था – हमारे ऊपर "उसका लहू छिड़का" गया है (1 पतरस 1:2)। जैसे पुराने मन्दिर को परमेश्‍वर के कार्य के उपयोग के लिए पवित्र किया गया था, वैसे ही हमारे शरीर, पवित्र आत्मा के मन्दिर, परमेश्‍वर के पवित्र उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए अलग किए गए हैं (1 कुरिन्थियों 6:19)।

पवित्रिकृत किए हुए होने का अर्थ यह है कि परमेश्‍वर के वचन का हम पर प्रभाव पड़ा है। यह "वचन के द्वारा" है कि परमेश्‍वर हमें शुद्ध करता है, और हमें पवित्र बनाता है (इफिसियों 5:26; यूहन्ना 17:17)।

परमेश्‍वर हम पापियों को उसके पास "जैसे हम हैं" वैसे ही आने के लिए आमन्त्रित करता है, और हम उसकी दया और क्षमा को प्राप्त करते हैं। जब हम बचाए जाते हैं, तब पवित्र आत्मा हमें मसीह के स्वरूप और समानता में परिवर्तित करने के अपने अद्भुत काम को आरम्भ करता है। पवित्रिकृत किए हुए होने का अर्थ यह है कि परमेश्‍वर हमें इतना अधिक प्रेम करता है कि हम वैसे ही बने रहें।

प्रेरित की प्रार्थना सभी विश्‍वासियों के लिए यह थी, कि प्रत्येक स्थान पर: "शान्ति का परमेश्‍वर आप ही तुम्हें पूरी रीति से पवित्र करे; और तुम्हारी आत्मा और प्राण और देह हमारे प्रभु यीशु मसीह के आने तक पूरे पूरे और निर्दोष सुरक्षित रहें" (1 थिस्सलुनीकियों 5:23)।

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