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प्रश्न

पवित्रीकरण क्या है? पवित्रीकरण की मसीही परिभाषा क्या है?

उत्तर


यूहन्ना के सुसमाचार के 17वें अध्याय में यीशु ने पवित्रीकरण के बारे में बहुत कुछ बोला है। वचन 16 में प्रभु कहता है, "जैसे मैं संसार का नहीं वैसे ही वे भी संसार के नहीं हैं," और उसने पिता से ऐसी विनती की: "सत्य के द्वारा उन्हें पवित्र कर : तेरा वचन सत्य है।" पवित्रीकरण परमेश्‍वर के निमित्त पृथक होने की अवस्था है; सभी विश्‍वासी उस समय इस अवस्था में प्रवेश करते हैं, जब उनका जन्म परमेश्‍वर से होता है: "परन्तु उसी ही की ओर से तुम मसीह यीशु में हो जो परमेश्‍वर की ओर से हमारे लिये ज्ञान ठहरा — अर्थात् धर्म और पवित्रता और छुटकारा" (1 कुरिन्थियों 1:30)। यह अनन्तकालीन परमेश्‍वर के निमित्त सदैव-के लिए-एक बार किए जाने वाली पृथकता है। यह हमारे उद्धार का, मसीह के साथ हमारे सम्पर्क का अभिन्न अंग है (इब्रानियों 10:10)।

पवित्रीकरण साथ ही परमेश्‍वर के निमित्त किए जाने वाले इस पृथक्करण के व्यावहारिक अनुभव को भी संदर्भित करता है, जो परमेश्‍वर के वचन के प्रति आज्ञाकारिता के प्रभाव में होता है और विश्‍वास के द्वारा गम्भीरता से अपनाया जाता है (1 पतरस 1:15; इब्रानियों 12:14)। ठीक वैसे ही जैसे प्रभु ने यूहन्ना 17 में प्रार्थना की, पवित्रीकरण के दृष्टिकोण में विश्‍वासियों को उस कार्य के लिए अलग कर दिया जाता है जिसके लिए उन्हें संसार में भेजा जाता है : "जैसे तू ने मुझे जगत में भेजा, वैसे ही मैं ने उन्हें जगत में भेजा; और उनके लिये मैं अपने आप को पवित्र करता हूँ, ताकि वे सत्य के द्वारा पवित्र किये जाएँ" (वचन 18, 19)। यह कि उसने स्वयं को उस उद्देश्य के लिए अलग कर लिया जिसके लिए उसे दोनों बातों के लिए भेजा गया था अर्थात् हमारे लिए उस कार्य के लिए अलग किए जाने के आधार और शर्ते बनने के लिए जिसके लिए हमें भेजा गया है (यूहन्ना 10:36)। उसकी पवित्रता हमारे लिए आदर्श और सामर्थ्य है। भेजना और पवित्र किए जाने का कार्य पृथक न करने योग्य है। इसी आधार पर विश्‍वासियों को सन्त यूनानी में हागीयो कह कर पुकारा गया है : अर्थात् "पवित्र किए हुए।" जबकि पहले उनके व्यवहार ने परमेश्‍वर से अलग होने के कारण संसार में उनके उसके विरुद्ध खड़े होने की गवाही दी थी, परन्तु अब उनके व्यवहार को संसार से अलग होने से पहले परमेश्‍वर के सामने खड़े होने की अपनी साक्षी देनी होगी।

पवित्र शास्त्र में वर्णित इस शब्द "पवित्रीकरण" में एक और भावार्थ पाया जाता है। पौलुस 1 थिस्सलुनीकियों 5:23 में ऐसी प्रार्थना करता है, "शान्ति का परमेश्‍वर आप ही तुम्हें पूरी रीति से पवित्र करे; और तुम्हारी आत्मा और प्राण और देह हमारे प्रभु यीशु मसीह के आने तक पूरे पूरे और निर्दोष सुरक्षित रहे।" पौलुस साथ ही कुलुस्सियों के विश्‍वासियों को लिखता है कि "उस आशा की हुई वस्तु के कारण जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी हुई है, जिसका वर्णन तुम उस सुसमाचार के सत्य वचन से सुन चुके हो" (कुलुस्सियों 1:5)। उसने कुछ समय पश्चात् स्वयं मसीह के विषय में "महिमा की आशा" कह कर पुकारा है (कुलुस्सियों 1:27) और तब उस आशा सच्चाई का उल्लेख ऐसे किया है जब वह कहता है, "तब मसीह जो हमारा जीवन है, प्रगट होगा, तब तुम भी उसके साथ महिमा सहित प्रगट किए जाओगे" (कुलुस्सियों 3:4)। महिमा की यह अवस्था पाप से पूर्ण रीति से पृथक होना, प्रत्येक पहलू में पूर्ण रीति से पवित्र होने की होगी। "हे प्रियो, अब हम परमेश्‍वर की सन्तान हैं, और अभी तक यह प्रगट नहीं हुआ कि हम क्या कुछ होंगे। इतना जानते हैं कि जब वह प्रगट होगा तो हम उसके समान होंगे, क्योंकि उसको वैसा ही देखेंगे जैसा वह है" (1 यूहन्ना 3:2)।

इन बातों को सारांशित करते हुए, पवित्रीकरण शब्द पवित्रता का पर्यायवाची है, यूनानी भाषा में दोनों शब्दों का अर्थ "पृथक होने से" है, हमारे उद्धार के लिए मसीह के निमित्त सदैव-के लिए-एक बार किए जाने वाली स्थितीय पृथकता; दूसरा मसीह के आगमन की प्रतीक्षा में रहने वाले विश्‍वासियों के जीवन में यह एक व्यावहारिक प्रगतिशील पवित्रता है, और अन्त में जब हम स्वर्ग में पहुँचेंगे तब यह पाप से सदैव के लिए पृथक होना है।

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