पहला पुनरुत्थान क्या है? दूसरा पुनरुत्थान क्या है?


प्रश्न: पहला पुनरुत्थान क्या है? दूसरा पुनरुत्थान क्या है?

उत्तर:
दानिय्येल 12:2 मनुष्यों के द्वारा दो विभिन्न गंतव्यों को सारांशित करता है: "जो भूमि के नीचे सोए रहेंगे उन में से बहुत से लोग जाग उठेंगे, कितने तो सदा के जीवन के लिये, और कितने अपनी नामधराई और सदा तक अत्यन्त घिनौने ठहरने के लिये।" प्रत्येक व्यक्ति मृतकों में जीवित हो उठेगा, परन्तु प्रत्येक एक ही जैसे गंतव्य को प्राप्त नहीं करेगा। नया नियम धर्मी और अधर्मी के होने वाले पृथक पुनरुत्थानों का अतिरिक्त वर्णन प्रगट है।

प्रकाशितवाक्य 20:4-6 "पहले पुनरुत्थान" का उल्लेख करता है और इसमें सम्मिलित होने वालों को पहचान "धन्य और पवित्र" के रूप में करता है। दूसरी मृत्यु (आग की झील, प्रकाशितवाक्य 20:14) का इन लोगों के ऊपर कोई अधिकार नहीं है। इस तरह से, प्रथम पुनरुत्थान सभी विश्‍वासियों का जीवित हो उठना है। यह यीशु की "धर्मी के जी उठने" (लूका 14:14) और "जीवन के पुनरुत्थान" (यूहन्ना 5:29) के ऊपर दी हुई शिक्षा के अनुरूप पाई जाती है।

पहला पुनरुत्थान विभिन्न अवस्थाओं में प्रगट होगा। स्वयं यीशु मसीह ("प्रथम फल," 1 कुरिन्थियों 15:20), उन सभों के लिए मार्ग को प्रशस्त करता है, जो उसमें विश्‍वास करते हैं। यरूशलेम के सन्तों का पुनरुत्थान हुआ था (मत्ती 27:52-53) जो प्रथम पुनरुत्थान के लिए किए जाने वाले हमारे विचार में सम्लिलित किया जाना चाहिए। तत्पश्चात् प्रभु के आगमन के समय "मसीह में मरे हुओं" (1 थिस्सलुनीकियों 4:16) और क्लेशकाल के अन्त में शहीदों का पुनरुत्थान भी पाया जाता है (प्रकाशितवाक्य 20:4)।

प्रकाशितवाक्य 20:12-13 में दूसरे पुनरुत्थान में सम्मिलित होने वालों की पहचान परमेश्‍वर के द्वारा महान् श्वेत सिंहासन के समय आग की झील में डाल दिए जाने से पहले दुष्टों के न्याय किए जाने के रूप में करता है। इस तरह से, दूसरा पुनरुत्थान सभी अविश्‍वासियों का जीवित होना है; दूसरे पुनरुत्थान का सम्बन्ध दूसरी मृत्यु से है। यह यीशु की "दण्ड के पुनरुत्थान" के ऊपर दी हुई शिक्षा के अनुरूप है (यूहन्ना 5:29)।

जो घटनाएँ पहले और दूसरे पुनरुत्थान को विभाजित करते हैं, वे सहस्त्रवर्षीय राज्य से सम्बन्धित होने की प्रतीत होती हैं। धर्मियों का सबसे अन्तिम समूह "मसीह के हजार वर्षों के राज्य" में शासन करने के लिए जीवित होता है (प्रकाशितवाक्य 20:4), परन्तु "शेष बचे हुए मृतक [अर्थात्, दुष्ट] तब तक जीवित नहीं होंगे जब तक कि हजार वर्षों का राज्य समाप्त नहीं हो जाता है" (प्रकाशितवाक्य 20:5)।

प्रथम पुनरुत्थान में लोग कितने अधिक हर्ष के साथ प्रवेश करेंगे! दूसरे पुनरुत्थान के समय कितना अधिक विलाप होगा! सुसमाचार सुनाने के लिए हमारे ऊपर कितना अधिक उत्तरदायित्व है! "और बहुतों को आग में से झपटकर निकालो; और बहुतों पर भय के साथ दया करो" (यहूदा 23)।

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