यीशु की मृत्यु के समय मृतकों में जीवित हुए लोगों का क्या अर्थ है (मत्ती 2::52-53)?


प्रश्न: यीशु की मृत्यु के समय मृतकों में जीवित हुए लोगों का क्या अर्थ है (मत्ती 2::52-53)?

उत्तर:
मत्ती 27:50-53 लिपिबद्ध करता है कि, "तब यीशु ने फिर बड़े शब्द से चिल्‍लाकर प्राण छोड़ दिए। और देखो, मन्दिर का परदा ऊपर से नीचे तक फटकर दो टुकड़े हो गया; और धरती डोल गई और चट्टानें तड़क गईं, और कब्रें खुल गईं, और सोए हुए पवित्र लोगों के बहुत से शव जी उठे, और उसके जी उठने के बाद वे कब्रों में से निकलकर पवित्र नगर में गए और बहुतों को दिखाई दिए।"

यह घटना अकेले ही यीशु मसीह को दी गई नश्वर सामर्थ्य की गवाही को सम्बोधित करती है (1 तीमुथियुस 6:14-16)। केवल परमेश्वर के पास ही जीवन और मृत्यु की सामर्थ्य है (1 शमूएल 2:6; व्यवस्थाविवरण 32:29)। इसलिए, पुनरुत्थान मसीही विश्वासी की आधारशिला अर्थात् कोने के सिरे का पत्थर है। अन्य सभी धर्मों और उनसे सम्बन्धित अगुवे एक जी उठे हुए प्रभु की सेवा नहीं करते हैं। मृत्यु पर जय पाने के द्वारा, यीशु मसीह तुरन्त श्रेष्ठता को प्राप्त करता है, क्योंकि वह जीवन में वापस आया जबकि अन्य कोई भी नहीं। पुनरुत्थान ने हमें दूसरों को उसके बारे में बताने और परमेश्वर में विश्वास रखने का कारण दिया है (1 कुरिन्थियों 15:14)। पुनरुत्थान ने हमें आश्वासन दिया है कि हमारे पाप क्षमा किए जाते हैं (1 कुरिन्थियों 15:17)। इस वचन में पौलुस स्पष्ट रूप से कहता है कि पुनरुत्थान के बिना हमारे पापों को पूर्ण रूप से क्षमा नहीं किया जा सकता है। और, अन्त में, पुनरुत्थान ने हमें आज आशा रखने का एक कारण दिया है (1 कुरिन्थियों 15:20-28)। यदि मसीह को मृतकों में से नहीं उठाया गया था, तो मसीही विश्वासी गैर-मसीहियों की तुलना में आत्मिक रूप से किसी भी तरह से उत्तम नहीं होंगे। परन्तु तथ्य यह है कि परमेश्वर ने "हमारे प्रभु यीशु को मरे हुओं में से जिलाया। वह हमारे अपराधों के लिये पकड़वाया गया, और हमारे धर्मी ठहरने के लिये जिलाया भी गया" (रोमियों 4:24-25)।

सन्तों का मृतकों में से जी उठना मत्ती के द्वारा उसके सुसमाचार में प्रयुक्त होने वाली कहानी की व्यापक बनावट शैली और रणनीतियों के अनुसार है। इस कहानी के सम्बन्ध में यहेजकेल 37 की जाँच और मृतकों में से जीवित की गई हड्डियों से पता चलता है कि इन सन्तों के प्रति मृतकों में से जी उठने के लिए पुराने नियम की एक भविष्यद्वाणी पूरी हुई थी। इसके अतिरिक्त, सन्तों का मृतकों में से जी उठना सीधे ही आने वाले राज्य से सम्बन्धित है। कुछ ही सन्तों का जी उठना और सभी सन्तों से पता चलता है कि यीशु के पास मृतकों में से जी उठाने की सामर्थ्य है, परन्तु साथ ही यह यीशु मसीह के दूसरे आगमन और न्याय के प्रति भी इंगित करता है, जिसमें उन सभी को सम्मिलित किया जाएगा जिनके नाम जीवन की पुस्तक में परमेश्वर के अनुग्रह में विश्वास करने के द्वारा लिखे गए हैं। यह जानते हुए कि यीशु मर गया है और अपने पुनरुत्थान के माध्यम से मृत्यु पर जय पा ली है, हमारी इच्छा को केवल उसी में ही उद्धार की प्राप्ति के लिए पश्चाताप और विश्वास करने के लिए शीघ्रता करने के प्रति उत्साहित करनी चाहिए ताकि हम भी एक दिन "पलक मारते हुए जी उठें" (1 कुरिन्थियों 15:52)।

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