धार्मिक बहुलवाद क्या है?


प्रश्न: राशिफल का उद्देश्य किसी व्यक्ति के चरित्र और भविष्य की भविष्यवाणी में?

उत्तर:
धार्मिक बहुलवाद सामान्य रूप से दो या दो से अधिक धार्मिक वैश्विक दृष्टिकोण की मान्यताओं को समान रूप से वैद्य ठहराना या स्वीकार करना है। मात्र सहिष्णुता से कहीं अधिक, धार्मिक बहुलवाद परमेश्वर या देवतागणों की ओर जाने वाले असँख्य पथों की सम्भावना को स्वीकार करता है और सामान्य रूप में पर "व्यावर्तकतावाद", की धारणा के विपरीत होता है, अर्थात् यह विचार कि केवल एक ही सच्चा धर्म है या केवल एक तरीके से परमेश्वर को जाना जा सकता है।

जबकि धार्मिक बहुलवाद कम से कम सत्रहवीं शताब्दी से अस्तित्व में बना हुआ है, वहीं पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अमेरिका में बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध से यह धारणा अधिक लोकप्रिय हुई। विशेष रूप से, धार्मिक सार्वभौमिकता (सभी धर्मों का मिलकर एक धर्म के रूप में कार्य करना) और निवर्तमान में प्रसिद्ध हुए अन्तर-धर्मीय आन्दोलन के विचार से प्रचलित संस्कृति में धार्मिक बहुलवाद की स्वीकृति बढ़ गई है।

बहुलवाद कुछ सामाजिक विषयों के ऊपर निश्चित मूल्यों या समझौते को साझा करने से कहीं अधिक बढ़कर विषय है। बौद्ध और मसीही अनुयायी दोनों सहमत हैं कि गरीबों की सहायता करना महत्वपूर्ण है, परन्तु इस तरह के सीमित समन्वय बहुलवाद नहीं है। बहुलवाद का लेना देना प्रतिस्पर्धात्मक सच्चे दावों और परमेश्वर और उद्धार के बारे में विभिन्न मान्यताओं को स्वीकार करने के जैसे है।

इसके अतिरिक्त, दो या दो से अधिक धर्म कुछ सैद्धान्तिक मान्यताओं को साझा कर सकते हैं, तौभी विश्वास पद्धति के रूप में वे मूल रूप से भिन्न ही रहते हैं। उदाहरण के लिए, मुस्लिम और मसीही अनुयायी इस बात से सहमत हैं कि केवल एक ही परमेश्वर है - तौभी दोनों धर्म परमेश्वर को भिन्न रूप में परिभाषित करते हैं और कई अन्य न समझौता की जाने वाली मान्यताओं को थामे हुए हैं।

धार्मिक बहुलवाद के बारे में बाइबल क्या शिक्षा देती है? सबसे पहले, बाइबल केवल परमेश्वर के एक होने को ही स्वीकार करती है (व्यवस्थाविवरण 6:5)। इसलिए, धार्मिक बहुलवाद बाइबल की शिक्षा के साथ असंगत है, क्योंकि बहुलवाद परमेश्वर या यहाँ तक कि कई देवताओं के विचार को स्वीकार करता है।

दूसरा, बाइबल में विशेष से व्यावर्तकतावाद अर्थात् स्वयं के एकमात्र सत्य होने की शिक्षा देती है कि परमेश्वर को जानने का तरीका केवल यीशु मसीह के माध्यम से ही है। यूहन्ना 14:6 ध्यान आकर्षित करता है कि यीशु ही मार्ग, सत्य और जीवन है और कोई भी उसके बिना पिता के पास नहीं आ सकता है। प्रेरितों ने प्रेरितों 4:12 में एक ही सन्देश की शिक्षा दी गई है : "किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिसके द्वारा हम उद्धार पा सकें।"

तीसरा, बाइबल अक्सर अन्य धर्मों को वर्णित देवताओं की निन्दा करती है, जो वास्तव में ईश्वर नहीं हैं। उदाहरण के रूप में, यहोशू 23:16 कहता है, "यदि जब तुम उस वाचा का, जिसे तुम्हारे परमेश्‍वर यहोवा ने तुम को आज्ञा देकर अपने साथ बन्धाया है, उल्‍लंघन करके पराये देवताओं की उपासना और उनको दण्डवत् करने लगो, तब यहोवा का कोप तुम पर भड़केगा, और तुम इस अच्छे देश में से जिसे उसने तुम को दिया है शीघ्र नष्‍ट हो जाओगे..."

धार्मिक स्वतन्त्रता गारन्टी देता है कि कई धर्म शान्तिपूर्वक आराधना कर सकते हैं, और मसीही ऐसी स्वतन्त्रता की सराहना करते हैं, क्योंकि यह परमेश्वर की खुली आराधना की अनुमति देता है। इसके विपरीत, धार्मिक बहुलवाद शिक्षा देता है कि कई धर्म सत्य हैं या समान रूप से मान्य हैं, यह कुछ ऐसी बात जिसे बाइबल स्पष्ट रूप से अस्वीकार करती है। हम धार्मिक स्वतन्त्रता को प्रोत्साहित करते हैं, परन्तु साथ ही हम बाइबल की इस शिक्षा को देते हैं कि "परमेश्‍वर एक ही है, और परमेश्‍वर और मनुष्यों के बीच में भी एक ही बिचवई है, अर्थात् मसीह यीशु जो मनुष्य है" (1 तीमुथियुस 2:5)।

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