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प्रश्न

प्राचीनों और डीकनों की योग्यताएँ क्या हैं?

उत्तर


बाइबल विश्‍वासियों की देह के लिए एक डीकन और एक प्राचीन के पदों के लिए योग्यता को स्पष्टता के साथ दिया गया है। कलीसिया में व्यावहारिक विषय से निपटने के लिए डीकन के पद को विकसित किया गया था:: "तब उन बारहों ने चेलों की मण्डली को अपने पास बुलाकर कहा, 'यह ठीक नहीं कि हम परमेश्‍वर का वचन छोड़कर खिलाने-पिलाने की सेवा में रहें'" (प्रेरितों के काम 6:2)। शब्द "खिलाने-पिलाने" का अनुवाद यूनानी शब्द डायकोनीन से किया गया है, जो "परिचर, वेटर, या जो दूसरे की सेवा करता है" के अर्थ को देता है। डीकनों का पहला समूह यरूशलेम की कलीसिया में सात पुरुषों का था, जिन्हें प्रतिदिन भोजन वितरण के काम को करने के लिए नियुक्त किया गया था। इसलिए, एक डीकन वह होता है, जो कलीसिया में आधिकारिक क्षमता के साथ दूसरों की सेवा करता है।

शब्द "बिशप" का अनुवाद यूनानी शब्द एपीसकोपोस से किया गया है। बिशप अधीक्षक, पर्यवेक्षक या मण्डली का एक सामान्य प्रभारी अधिकारी हैं। बाइबल में बिशप को "प्राचीन" (1 तीमुथियुस 5:19) और "पास्टर" भी कहा जाता है (इफिसियों 4:11)।

बिशप/प्राचीन/पास्टर की योग्यता 1 तीमुथियुस 3:1-7 में पाई जाती है: "यह बात सत्य है कि जो अध्यक्ष होना चाहता है, वह भले काम की इच्छा करता है। यह आवश्यक है कि अध्यक्ष निर्दोष, और एक ही पत्नी का पति, संयमी, सुशील, सभ्य, अतिथि-सत्कार करनेवाला, और सिखाने में निपुण हो। पियक्‍कड़ या मारपीट करनेवाला न हो; वरन् कोमल हो, और न झगड़ालु, और न धन का लोभी हो। अपने घर का अच्छा प्रबन्ध करता हो, और अपने बाल-बच्‍चों को सारी गम्भीरता से अधीन रखता हो। (जब कोई अपने घर ही का प्रबन्ध करना न जानता हो, तो परमेश्‍वर की कलीसिया की रखवाली कैसे करेगा?) फिर यह कि नया चेला न हो, ऐसा न हो कि अभिमान करके शैतान का सा दण्ड पाए। और बाहरवालों में भी उसका सुनाम हो, ऐसा न हो कि निन्दित होकर शैतान के फंदे में फँस जाए।" पौलुस तीमुथियुस को उन बातों के ऊपर भी निर्देश देता है जो एक अच्छे सेवक की शिक्षा का उदाहरण देती हैं। 1 तीमुथियुस 4:11 के आरम्भ से लेकर और 6:2 तक निरन्तर बताते हुए, पौलुस तीमुथियुस को बारह बातें बताता है कि उसे "आज्ञा और शिक्षा देनी" चाहिए।

प्रेरित पौलुस तीतुस को लिखे अपने पत्र में बिशप/प्राचीन/पास्टर की योग्यता को दोहराता है। "एक प्राचीन निर्दोष और एक ही पत्नी के पति हों, जिस के बच्‍चे विश्‍वासी हों, और उसमें लुचपन और निरंकुशता का दोष न हो। क्योंकि अध्यक्ष को परमेश्‍वर का भण्डारी होने के कारण निर्दोष होना चाहिए; न हठी, न क्रोधी, न पियक्‍कड़, न मारपीट करनेवाला, और न नीच कमाई का लोभी हो, पर अतिथि सत्कार करनेवाला, भलाई का चाहनेवाला, संयमी, न्यायी, पवित्र और जितेन्द्रिय हो; और वह विश्‍वासयोग्य वचन पर जो धर्मोपदेश के अनुसार है, स्थिर रहे कि खरी शिक्षा से उपदेश दे सके और विरोधियों का मुँह भी बन्द कर सके" (तीतुस 1:6-9)।

एक डीकन की योग्यता बिशप/प्राचीन/पास्टर के जैसी ही होती है। "वैसे ही सेवकों को भी गम्भीर होना चाहिए, दोरंगी, पियक्‍कड़ और नीच कमाई के लोभी न हों; पर विश्‍वास के भेद को शुद्ध विवेक से सुरक्षित रखें। और ये भी पहले परखे जाएँ, तब यदि निर्दोष निकलें तो सेवक का काम करें। इसी प्रकार से स्त्रियों को भी गम्भीर होना चाहिए; दोष लगानेवाली न हों, पर सचेत और सब बातों में विश्‍वासयोग्य हों। सेवक एक ही पत्नी के पति हों और बाल-बच्‍चों और अपने घरों का अच्छा प्रबन्ध करना जानते हों। क्योंकि जो सेवक का काम अच्छी तरह से कर सकते हैं, वे अपने लिये अच्छा पद और उस विश्‍वास में जो मसीह यीशु पर है, बड़ा साहस प्राप्‍त करते हैं" (1 तीमुथियुस 3:8-13)। इस वचन में अनुवादित शब्द "डीकन" प्रेरितों के काम 6:2 में उपयोग किए गए यूनानी शब्द का ही एक रूप है, इसलिए हम जानते हैं कि हम एक ही पद के बारे में बात कर रहे हैं।

ये योग्यताएँ सरल और स्पष्ट हैं। डीकन और बिशप/प्राचीन/पास्टर दोनों ही को पुरुष, एक पत्नी का पति, निर्दोष चरित्र का होना चाहिए और जो बाइबल के बताए तरीके से अपने घर की देखभाल करता है। ये योग्यताएँ इस बात की भी पूर्वकल्पना करती हैं कि इस तरह के पद पर कार्य करने वाला नया-जन्म प्राप्त किया हुआ विश्‍वासी हो और परमेश्‍वर के वचन की अधीनता में जीवन को व्यतीत करता हो। दोनों योग्यताओं में एकमात्र महत्वपूर्ण अन्तर यह है कि बिशप/प्राचीन/पास्टर को "सिखाने में सक्षम" होना चाहिए, जबकि शिक्षा देने के कार्य को डीकन के लिए आवश्यक नहीं बताया गया है।

प्रभु यीशु ने स्वयं को "आपके प्राणों के रखवाले और अध्यक्ष" कह कर पुकारा है (1 पतरस 2:25)। यह शीर्षक रूचिपूर्ण हैं। रखवाले शब्द यूनानी शब्द पोईमेन का अनुवाद है, जिसका अनुवाद "पास्टर" के रूप में भी कहीं और हुआ है (उदाहरण के लिए, इफिसियों 4:11 में)। यह पोईमेन एक ऐसा व्यक्ति है, जो झुण्ड या भेड़-बकरियों का पालन करता है और मसीही पास्टरों के लिए रूपक के रूप में प्रयोग किया जाता है, क्योंकि पास्टर को परमेश्‍वर के "झुण्ड" का मार्गदर्शन करना चाहिए और उन्हें परमेश्‍वर के वचन से भोजन कराना चाहिए। "अध्यक्ष" का अनुवाद किया गया शब्द, एपिस्कोपोस, वही शब्द है, जिसे प्रेरित पौलुस ने 1 तीमुथियुस और तीतुस में प्रयोग किया था।

स्पष्ट है, कि कलीसिया में प्राचीन और डीकन के पद महत्वपूर्ण हैं। वचन और कार्य में परमेश्‍वर के लोगों की सेवा करना एक व्यक्ति के लिए गम्भीर दायित्व है और इसे कभी भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। बाइबल पर आधारित एक अयोग्य व्यक्ति को या तो प्राचीन या डीकन के पद पर कार्य नहीं करना चाहिए; कलीसिया को उत्तम सेवकों की आवश्यकता है।

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