भविष्यद्वाणी आधारित सेवकाई क्या है?


प्रश्न: भविष्यद्वाणी आधारित सेवकाई क्या है?

उत्तर:
आज के करिश्माई समूहों के द्वारा समझी जाने वाली भविष्यद्वाणी आधारित सेवकाई, ऐसी कोई भी सेवकाई है, जो कलीसिया को परिपक्वता की ओर आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन देने के लिए परमेश्वर की ओर से भविष्यद्वाणी और नए प्रकाशनों के वरदानों के ऊपर निर्भर रहना है। भविष्यद्वाणी आधारित सेवकाई में सम्मिलित लोग कभी-कभी इसे पाँच-गुण सेवकाई के रूप में सन्दर्भित करते हैं और मानते हैं कि प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं के कार्यालयों को आधुनिक कलीसिया में पुनर्स्थापित बहाल किया जा रहा है।

हम पुराने नियम में अक्सर भविष्यद्वाणी आधारित सेवकाई को देखते हैं, क्योंकि परमेश्वर ने परेशानी या विद्रोह के समय में इस्राएल की जाति को प्रोत्साहित करने और फटकारने के लिए भविष्यद्वक्ताओं को खड़ा किया था। राजा दाऊद के शासन के समय (2 शमूएल), भविष्यद्वक्ता नातान ने, दूसरों के बीच में, दाऊद से यहोवा की ओर से बात की, उसे मार्गदर्शन दिया और अगुवाई देने के साथ ही बेतशेबा के साथ उसके पाप से भरे हुए सम्बन्ध के लिए उसका सामना किया। नि:सन्देह, यशायाह, यिर्मयाह, होशे, आमोस, मीका, जकर्याह, इत्यादि के पास भी भविष्यद्वाणी आधारित सेवकाई थी - वे भविष्यद्वक्ता थे। एक भविष्यद्वक्ता की बुलाहट परमेश्वर की ओर से बोलना होता था। एक भविष्यद्वक्ता आवश्यकता के समय मार्गदर्शन, परामर्श, या फटकार लगाने के कार्य को करता था।

नए नियम में, हम ऐसे लोगों को पाते हैं, जिनके पास एक भविष्यद्वाणी की सेवकाई था। कुछ लोगों को परमेश्वर के ओर से लोगों को मार्गदर्शन, निर्देश, परामर्श इत्यादि देने के लिए भविष्यद्वक्ता के रूप में वरदान दिया गया था। भविष्यद्वाणी का वरदान विशेष रूप से 1 कुरिन्थियों 12:10 और इफिसियों 4:11 में वर्णित है। कृपया ध्यान दें कि यह वरदान कलीसिया के उन्नति के लिए दिया गया था (इफिसियों 4:12)। इस प्रकार, भविष्यद्वक्ता कलीसिया के लिए परमेश्वर का वचन बोलने के लिए थे, ताकि विश्वासी प्रभु के मन को जान सकें और यह जानें कि उन्हें कलीसिया में कैसे कार्य करना चाहिए।

हमें विश्वास है कि आज अपनी सच्चाई में भविष्यद्वाणी की सेवकाई केवल बाइबल का सही और स्पष्ट रूप से प्रचार करना मात्र है। भविष्यद्वाणी का वरदान आज लिखित शब्द का "बोलना" है, न कि स्वर्ग से नई सूचना को प्राप्त करने के लिए निर्भर होना है। आरम्भिक कलीसिया में चिन्हों के वरदानों का उद्देश्य नए नियम के पूरा होने तक और प्रेरितों की सेवकाई को मान्यता प्रदान करने तक ही सीमित था। एक बार जब बाइबल पूरी हो गई और प्रेरितों की मृत्यु हो गई, आश्चर्यकर्मों के वरदानों का उपयोग कलीसिया में बन्द हो गया। हम इसे नए नियम में देख सकते हैं कि 1 कुरिन्थियों और इफिसियों जैसी आरम्भिक पुस्तकों में आश्चर्यकर्मों के वरदानों का उल्लेख मिलता है, जबकि बाद की पुस्तकों जैसे 1 और 2 तीमुथियुस में उनका उल्लेख नहीं मिलता है। पूरी बाइबल हमारे लिए विश्वासयोग्यता के साथ प्रभु की आज्ञा पालन करने के लिए पर्याप्त है। दूसरा तीमुथियुस 3:16-17 इस पर पूर्ण रीति से स्पष्ट है (इब्रानियों 1:1-2 को भी देखें)। प्रभु की ओर से अतिरिक्त शब्द को पाना अनावश्यक है।

आज ऐसे कई मसीही विश्वासी पाए जाते हैं, जो भविष्यद्वाणी आधारित सेवकाई में सम्मिलित होने का दावा करते हैं, जो विश्वास करते हैं कि भविष्यद्वाणी अभी भी आती है, और जो स्वयं को स्वर्ग से नए प्रकाशन को पाने के लिए प्रस्तुत करते हैं। जो कलीसियाएँ भविष्यद्वाणी आधारित सेवकाई में विश्वास करती हैं, वे सामान्य रूप से स्वप्नों की व्याख्या करने, भविष्य के लिए भविष्यद्वाणी करने और अन्यभाषाओं में बोलने का प्रयास करती हैं - यद्यपि नए नियम में वर्णित अन्यभाषा का वरदान (सुसमाचार को साझा करने के उद्देश्य से न सीखी हुई गैर-विदेशी भाषाओं में बोलने के लिए अलौकिक क्षमता है) वह प्रकार नहीं है, जिसका अभ्यास आज के समय किया जा रहा है।

बाइबल पूर्ण है। परमेश्वर के वचन में जोड़ने के विरूद्ध पवित्रशास्त्र भी चेतावनी देता है (प्रकाशितवाक्य 22:18)। इस प्रकार, भविष्यद्वाणी, परमेश्वर की ओर से एक "नए" वचन को प्राप्ति किए जाने अर्थ में अब आवश्यक नहीं है।

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