विवाह पूर्व परामर्शदान क्यों महत्वपूर्ण है?


प्रश्न: विवाह पूर्व परामर्शदान क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर:
विवाह पूर्व परामर्शदान सामान्य रूप से स्थानीय पास्टर या कलीसिया के अगुवे के उत्तरदायित्व के अधीन है, यद्यपि यह पासबानी देखभाल विभाग के किसी कर्मचारी सदस्य या किसी अन्य मसीही परामर्शदाता के द्वारा भी दिया जा सकता है। कुछ पास्टर विवाह समारोह को तब तक सम्पन्न नहीं करते जब तक कि मंगनी किया हुआ जोड़ा विवाह से सम्बन्धित परामर्श सत्र की श्रृंखला का अध्ययन नहीं कर लेता है। पास्टर विवाह की आशीषों और चुनौतियों से अवगत होते हैं और सफल विवाह के लिए जोड़े को विवाह में सम्मिलित होने में सहायता करना चाहते हैं। वे जोड़ों को खुली आँखों के साथ विवाह वाचा में प्रवेश करने और दृढ़ एकता को बनाने और बनाए रखने के लिए अच्छी तरह से सुसज्जित होने में सहायता करने के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में आरम्भिक कार्य के रूप में परामर्शदान को देखते हैं।

प्रेरित पौलुस ने तीतुस को अपने पासबानी निर्देशों में उन लोगों को सुसज्जित करने के लिए कहा जो उसके स्थान पर युवा पीढ़ी को शिक्षा देंगे (तीतुस 2:1-6)। यह वह परामर्श है, जो मूल रूप से दूसरों के साथ अपने सम्बन्ध को बनाने के लिए बाइबल की सच्चाई, मापदण्डों या पूर्णता में अपने केन्द्र बिन्दु को पाता है। यह विवाह पूर्व अवस्था में विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है। हम जिसे नहीं जानते हैं, उसका उपयोग नहीं कर सकते हैं, और वयस्क होना परिपक्व होने की गारन्टी नहीं देता है। जो युगल एक होने की मंशा रखता है, उसे विवाह से सम्बन्धित परमेश्‍वर के दृष्टिकोण में निर्देशित किया जाना चाहिए।

बाइबल के सिद्धान्तों के आधार पर विवाह पूर्व परामर्शदान पति और पत्नी की भूमिकाओं को रेखांकित करता है, क्योंकि वे एक दूसरे से और उनके सम्भावित बच्चों से सम्बन्धित हैं (इफिसियों 5:22-6:4; कुलुस्सियों 3:18-21)। विवाह पूर्व परामर्शदान विवाह के बारे में गलत धारणाओं को दूर करने, लक्ष्य को निर्धारित करने और परमेश्‍वर के मापदण्डों और संसार के मापदण्डों के बीच भिन्नता को समझने का अद्भुत तरीका है। यह महत्वपूर्ण है कि विवाह पूर्व परामर्शदान देने वाले पास्टर, प्राचीन, या परामर्शदाता, धर्मसैद्धान्तिक रूप से दृढ़, अपने विवाह और पारिवारिक सम्बन्धों में सुरक्षित, (1 तीमुथियुस 3:4-5; तीतुस 1:7), और परमेश्‍वर के वचन के प्रति आज्ञाकारी रहने वाले हों। ऐसा परामर्शदाता स्पष्ट रूप से और बिना किसी समझौते के साथ परमेश्‍वर के दृष्टिकोण को प्रदान करने के लिए सुसज्जित होता है।

विवाह पूर्व परामर्शदान एक ऐसा उत्कृष्ट स्थान है, जिसमें ऐसे विषयों को सम्बोधित किया जा सकता है, जिसके विषय में जोड़े ने नहीं सोचा है, जैसे कि वे कैसे अपने वित्त प्रबंधन को करने की मंशा रखते हैं, वे घर के काम कैसे विभाजित कर सकते हैं, वे छुट्टियों को बीताने के लिए कैसे योजना बना सकते हैं, बच्चों को कैसे अनुशासन दे सकते हैं, और ऐसे ही कई अन्य विषय। परामर्शदाता इस बात को पहचानने में भी मार्गदर्शन दे सकता है कि उन्होंने अपने माता-पिता के विवाह में क्या देखा और वे उनके विवाह में क्या नकल करना चाहते या क्या नहीं करना चाहते हैं।

ठोस, बाइबल आधारित विवाह पूर्व परामर्शदान एक जोड़े के बीच भिन्नता ला सकता है, जो यह जानता है कि कैसे समस्याओं के बीच में भी सफलतापूर्वक कार्य संचालित करना है और एक जोड़ा मानवीय दृष्टिकोण और सांसारिक मापदण्डों से अधिक मार्गदर्शन के लिए किसी और बात के प्रति संघर्षरत् नहीं होता है। एक सम्भावित दुल्हे और दुल्हन को परमेश्‍वर के द्वारा विवाह की व्यवस्था के ऊपर विवाह को निर्मित करने के प्रयास में विवाह पूर्व दिए जाने वाले परामर्शदान के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए।

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