प्रार्थना सभा का मूल्य क्या है?


प्रश्न: प्रार्थना सभा का मूल्य क्या है?

उत्तर:
कलीसिया के आरम्भ से ही, मसीही विश्‍वासी प्रार्थना करने के लिए इकट्ठे होते हैं (प्रेरितों 4:24; 12:5; 21:5)। प्रार्थना सभा पूरी तरह से कलीसिया के लिए और भाग लेने वाले व्यक्तियों के लिए मूल्यवान होती है।

प्रार्थना केवल उन लोगों के लिए होती है, जो विश्‍वास करते हैं कि परमेश्‍वर व्यक्तिगत् है, और जो उसके साथ व्यक्तिगत् सम्बन्ध रखना चाहते हैं। मसीही विश्‍वासी जानते हैं कि प्रार्थनाएँ कार्य करती हैं, क्योंकि उन्होंने एक ऐसे परमेश्‍वर का सामना किया है, जो यह घोषणा करता है, "मुझसे बात करो और मैं सुनूँगा।" प्रेरित यूहन्ना ने यह पुष्टि की है कि: "और हमें उसके सामने जो हियाव होता है, वह यह है; कि यदि हम उसकी इच्छा के अनुसार कुछ माँगते हैं, तो वह हमारी सुनता है। जब हम जानते हैं कि जो कुछ हम माँगते हैं वह हमारी सुनता है, तो यह भी जानते हैं कि जो कुछ हम ने उससे मांगा, वह पाया है" (1 यूहन्ना 5:14-15)।

अपनी प्रार्थनाओं के माध्यम से, विशेष रूप से एक दूसरे के लिए, हम यीशु में हमारे विश्‍वास को प्रदर्शित करते और इसे वैद्य ठहराते हैं। बहुत बड़े मसीही सेवक और प्रभावशाली लेखक एन्ड्र्यू मुरे ने कहा है कि, "प्रार्थना मुख्य रूप से पूरी तरह से इस बात के ऊपर निर्भर करती है, कि हम क्या सोचते हैं कि हम किस से प्रार्थना कर रहे हैं।" यह एक दूसरे के लिए प्रार्थना करने के अनुशासन के माध्यम से होता है कि हम परमेश्‍वर के साथ बढ़ते हुए घनिष्ठता को विकसित करते हैं, और एक दूसरे के साथ आत्मिक बन्धन को निर्मित करते हैं। एक दूसरे के लिए प्रार्थना करने का यह सबसे मूल्यवान पहलुओं में से एक है।

प्रार्थना सभाओं का एक और मूल्यवान लाभ अपने पापों को एक-दूसरे के सामने स्वीकार करना। प्रार्थना सभाएँ हमें "एक दूसरे के सामने अपने-अपने पापों को मान लो, और एक दूसरे के लिये प्रार्थना करो, जिस से चंगे हो जाओ" का अवसर प्रदान करती हैं (याकूब 5:16)। यहाँ, याकूब आवश्यक रूप से शारीरिक चँगाई की बात नहीं करता है, अपितु वह आत्मिक पुनर्स्थापना की बात करता है (इब्रानियों 12:12-13)। यह परमेश्‍वर की क्षमा को भी सन्दर्भित करती है, जो मसीही विश्‍वासी को फिर से आत्मिक रूप से पूर्ण बनाने में सक्षम करती है। याकूब जानता था कि जो भेड़ भटक जाती है, वह पाप के खतरों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होती है। परमेश्‍वर चाहता है कि उसके लोग प्रेमपूर्ण संगति, पारस्परिक निष्ठा और पापांगीकार में एक-दूसरे को प्रोत्साहित करें और एक दूसरे का समर्थन करें, क्योंकि हम एक-दूसरे के साथ और एक-दूसरे के लिए प्रार्थना करते हैं। इस तरह की घनिष्ठ संगति पाप के ऊपर विजय का अनुभव करने के लिए आत्मिक सामर्थ्य प्रदान करने में सहायता करती है।

प्रार्थना सभाओं का एक और बड़ा मूल्य यह है कि विश्‍वासी एक-दूसरे को धैर्य धरने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। हम सभों को बाधाओं का सामना करना पड़ता है, परन्तु मसीही विश्‍वासियों के रूप में साझा और प्रार्थना करने के द्वारा, हम अक्सर दूसरों को उनके आत्मिक जीवन में निराशा से बचने में सहायता प्रदान करते हैं। सामूहिक प्रार्थना का मूल्य मनों को एकता में ले आने की सामर्थ्य में है। अपने भाइयों और बहनों की ओर से परमेश्‍वर के सामने प्रार्थना करना आत्मिक रूप से एक दूसरे को जोड़ने के लिए सम्पर्क स्थापित करता है। जब हम "एक-दूसरे के भार को उठा लेते हैं," हम "मसीह की व्यवस्था को पूरा करते हैं" (गलातियों 6:2)। जहाँ प्रार्थना है, वहाँ एकता है, जिस को यीशु ने उसके अनुयायियों में होने के लिए बहुत अधिक उत्सुकता से प्रार्थना की (यूहन्ना 17:23)।

किसी और बात से ज्यादा, प्रार्थना सभाएँ परिवर्तन को लाती हैं। एक दूसरे के साथ प्रार्थना करते हुए, विश्‍वासी परमेश्‍वर के द्वारा आश्‍चर्यकर्मों को होते हुए और मनों के परिवर्तनों की गवाही को दे सकते हैं।

एक प्रार्थना सभा वास्तविक मूल्य का एक समय है, क्योंकि विश्‍वासी इसमें परमेश्‍वर के सिंहासन के पास परमेश्‍वर के साथ गहरी निकटता और शान्त सहभागिता की खोज करते हैं। यह परमेश्‍वर की उपस्थिति में साथी विश्‍वासियों के साथ एकता का समय है। यह हमारे चारों ओर के लोगों की देखभाल करने का समय है, क्योंकि हम उनके बोझ को साझा करते हैं। यह एक ऐसा समय है, जब परमेश्‍वर अपने अन्त-हीन प्रेम और उनसे संवाद करने की इच्छा को प्रकट करता है, जो उससे प्रेम करते हैं।

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