दूसरों के लिए प्रार्थना करना क्यों महत्वपूर्ण है?


प्रश्न: दूसरों के लिए प्रार्थना करना क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर:
दूसरों के लिए प्रार्थना करना — और यह सामान्य प्रार्थना के ऊपर लागू होता है – इस प्रश्‍न को पूछना एक आसान बात है। यदि पहले से ही परमेश्‍वर के मन में हमारे लिए सर्वोत्तम बात है, तो हमें क्यों प्रार्थना करनी चाहिए? वह हमारी तुलना में असीमित रूप से बुद्धिमान है। उसे क्यों हमारी प्रार्थना की आवश्यकता है? क्या यह उत्तम नहीं होगा कि हम केवल उसके ऊपर जो कुछ वह अच्छा करता है, भरोसा करे? यह सच है कि परमेश्‍वर हम से अधिक बुद्धिमान है (1 कुरिन्थियों 1:25) और हमें उस के ऊपर भरोसा करना चाहिए (नीतिवचन 3:5-6)। और यह वही कारण हैं, जिनके कारण हमें प्रार्थना करने की आवश्यकता है, क्योंकि स्वयं के लिए प्रार्थना करना और दूसरों के लिए प्रार्थना करना कुछ ऐसी बात है, जिसे परमेश्‍वर हमें करने के लिए आदेश देता है।

दूसरों के लिए प्रार्थना करने की अनुशंसा पापांगीकार के साथ चंगाई के स्रोत के रूप में की जाती है (याकूब 5:16)। याकूब हमें बताता है कि "धर्मी जन की प्रार्थना के प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है।" अब, क्या इसका अर्थ यह है कि केवल अच्छे लोगों की ही प्रार्थनाएँ सुनी जाती हैं? नहीं, बाइबल में शब्द धर्मी उन लोगों को सन्दर्भित करता है, जिनके पास विश्‍वास है, और जो यीशु की धार्मिकता से ढके हुए हैं (रोमियों 5:1; 3:21-22; 4:2-3)।

यीशु ने हमें उसके नाम में प्रार्थना करने के लिए कहा है (यूहन्ना 14:13-14)। यदि आप "किसी और के नाम में" कुछ करते हैं, तो इसका अर्थ है कि आप इसे उसकी इच्छाओं के अनुसार करते हैं। इसलिए, परमेश्‍वर को जानना और उसे समझना प्रार्थना का एक अभिन्न अंग है। अब हम देखना आरम्भ करते हैं कि क्यों दूसरों के लिए प्रार्थना करना महत्वपूर्ण है। प्रार्थना प्रत्येक बात को पाने या दूसरों की सुरक्षा, स्वस्थ और समस्या मुक्त रहने के बारे में नहीं है। प्रार्थना एक सामर्थी तरीका है, जिस में हम अपने उद्धारकर्ता को जानते हैं, और यह विश्‍वासियों को एक साथ ले आती है। दूसरों के लिए प्रभावी रूप से प्रार्थना करना हमें परमेश्‍वर की निकटता में ले आएगा, क्योंकि प्रभावी प्रार्थना उसकी इच्छा के ज्ञान के ऊपर आधारित होती है (1 यूहन्ना 5:14)। यह हमें दूसरों के निकटता में भी लाएगा, क्योंकि हम उनके बारे में और अधिक सीखते हैं और उनकी आवश्यकताओं के ऊपर ध्यान केन्द्रित करते हैं।

हम में से अधिकांश के लिए, दूसरों के लिए प्रार्थना करना इन निम्नलिखित पंक्तियों के साथ चलना है: परमेश्‍वर, मेरे मित्र को नौकरी, विश्‍वसनीय परिवहन, अच्छा स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रदान करें। यदि हम वास्तव में किसी को अच्छी तरह से जानते हैं, तो हम उसके विवाह या अन्य सम्बन्धों के लिए प्रार्थना कर सकते हैं। इन बातों के लिए प्रार्थना करने में कुछ भी गलत नहीं है; वास्तव में, बाइबल हमें सब कुछ के लिए प्रार्थना करने के लिए प्रोत्साहित करती है और ऐसा करने से हमारी चिन्ताओं को समाप्त कर देती है (फिलिप्पियों 4:6)। स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करना और अच्छी बातों के लिए प्रार्थना करना सही है (3 यूहन्ना 1:2)।

यद्यपि, बाइबल में लिपिबद्ध की गई अधिकांश प्रार्थनाएँ अन्य प्रकार की हैं। जब यीशु दूसरों के लिए प्रार्थना कर रहा था, तो उसने उनके विश्‍वास के लिए प्रार्थना की (लूका 22:32), उसने उनके जीवन में आने वाली परीक्षा के विरूद्ध प्रार्थना की (लूका 22:40), उसने उनकी एकता के लिए प्रार्थना की (यूहन्ना 17:11), और उसने उन्हें पवित्रता पाने के लिए प्रार्थना की (यूहन्ना 17:17)। पौलुस ने उद्धार न पाए हुए लोगों के लिए प्रार्थना की (रोमियों 10:1); उसने प्रार्थना की कि भाई सही पथ पर बने रहें (2 कुरिन्थियों 13:7); उसने प्रार्थना की कि विश्‍वासियों को आत्मा के द्वारा दृढ़ किया जाए, वे प्रेम में जड़ें पकड़ें और इसी के ऊपर खड़े किए जाएँ, परमेश्‍वर के प्रेम को समझने में सक्षम हों, और परमेश्‍वर की पूर्णता से भरे हों (इफिसियों 3:14-19)। ये सभी प्रार्थनाएँ आत्मिक आशीष पाने के लिए हैं; वे सभी "यीशु के नाम में" और पिता की इच्छा – की जाने वाली प्रार्थनाओं हैं, जो मसीह में "हाँ" के साथ उत्तर पाने की गारंटी के साथ है (2 कुरिन्थियों 1:20)।

दूसरों के लिए प्रार्थना करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह नए नियम के एक आदेश को पूरा करता है। हमें सभी लोगों के लिए प्रार्थना करना है (1 तीमुथियुस 2:1)। हमें शासकीय अगुवों के लिए प्रार्थना करना है (1 तीमुथियुस 2:2)। हमें न बचे हुए लोगों के लिए प्रार्थना करना है (1 तीमुथियुस 2:3-4)। हमें साथी मसीहियों के लिए प्रार्थना करना है (इफिसियों 6:18)। हमें सुसमाचार के सेवकों के लिए प्रार्थना करनी है (इफिसियों 6:19-20)। हमें सताए गई कलीसिया के लिए प्रार्थना करना है (इब्रानियों 13:3)। दूसरों के लिए प्रार्थना करना हमें हमारे स्वयं के बारे में और अपने चारों ओर की आवश्यकताओं के ऊपर से हमारे ध्यान को केन्द्रित करने से हटा देती है। जब हम "एक-दूसरे के भार को उठाएंगे," हम "मसीह की व्यवस्था को पूरा करेंगे" (गलतियों 6:2)। आज दूसरों के लिए प्रार्थना करना आरम्भ करें और मसीह की देह को निर्मित करने में सहायता करें।

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