क्या एक मसीही विश्वासी को देशभक्त होना चाहिए?


प्रश्न: क्या एक मसीही विश्वासी को देशभक्त होना चाहिए?

उत्तर:
इस प्रश्न का उत्तर "देशभक्ति" शब्द के अर्थ के ऊपर निर्भर करता है। जैसा कई शब्दों के साथ होता है, अर्थ में अति सूक्ष्म अन्तर पाए जाते हैं, और विभिन्न लोग विभिन्न तरीकों से शब्द का उपयोग करते हैं। उदाहरण के लिए, अपनी सबसे सरल परिभाषा में देशभक्ति का अर्थ है "एक व्यक्ति का अपने देश से प्रेम करना" है, जब तक कि देश के प्रति प्रेम किसी व्यक्ति के द्वारा परमेश्वर के प्रति किए जाने वाले प्रेम को प्रभावित नहीं करता है, और यदि इसे उचित दृष्टिकोण में रखा जाए, तो मसीही विश्वासी के देशभक्त होने में कुछ भी गलत नहीं है। तथापि, "देशभक्ति" की एक और परिभाषा यह है कि एक व्यक्ति को अपने राष्ट्र के हितों को अपने व्यक्तिगत और समूह के हितों से ऊपर रखना चाहिए। इस चरम तक पहुँचाने पर, देशभक्ति मूर्तिपूजा का एक रूप बन सकती है, विशेष रूप से यदि किसी का अपने देश के प्रति प्रेम परमेश्वर के प्रेम और परमेश्वर की, “हर एक जाति और कुल और लोग और भाषा में से” उसके लोगों को छुड़ाने की योजना से बढ़कर हो जाती है (प्रकाशितवाक्य 7:9)।

जहाँ तक सरकार के प्रति एक मसीही विश्वासी का उत्तरदायित्व है, हम रोमियों 13:1-7 से जानते हैं कि हमें सरकारी अधिकारियों के अधीन रहना है और उन्हें सम्मान देना है, भले ही वे सम्मानजनक न हों, क्योंकि यह अन्ततः परमेश्वर ही है, जिसने उन्हें हम पर अधिकारी होने के स्थान पर रखा है। इसलिए, मसीही विश्वासी के रूप में, हम परमेश्वर के प्रति एक आदर्श नागरिक होने के दायित्व के प्रति अधीन हैं, कानूनों का पालन करने, करों का भुगतान करने इत्यादि के द्वारा हमारे ऊपर शासन करने वाले अधिकारियों के प्रति अधीन हैं। तथापि, हमारा दायित्व सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण रूप में परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारी होने का है। उन राष्ट्रों में, जहाँ कुछ नागरिकों को मतदान करके या राजनीतिक रूप से सम्मिलित होकर सरकार को बदलने और प्रभावित करने की क्षमता है, एक अच्छा नागरिक होने के लिए मतदान करना है और इसके द्वारा सरकार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

जिन देशों में मसीहियों के पास अपने अगुवों के निर्णय लेने में कुछ कहने का अधिकार प्राप्त नहीं है, वहाँ देशभक्त होना अधिक कठिन है। दमनकारी सरकारों से प्रेम करना बहुत अधिक कठिन होता है। तथापि, मसीही विश्वासी के रूप में हम अभी भी अपने अगुवों के लिए प्रार्थना करने के लिए बाध्य हैं (1 तीमुथियुस 2:1-4)। परमेश्वर इस आज्ञा का पालन करने लिए हमारी आज्ञाकारिता का सम्मान करेगा, और अपने सिद्ध समय में, वह उन अगुवों का न्याय करेगा जो उसकी ओर से मुड़ जाते हैं।

क्या एक मसीही विश्वासी को देशभक्त होना चाहिए? प्रत्येक कारण से, हाँ। ठीक उसी समय, एक मसीही का अन्त में विश्वास, प्रेम, और आज्ञाकारिता केवल परमेश्वर के लिए ही आरक्षित होनी चाहिए।

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क्या एक मसीही विश्वासी को देशभक्त होना चाहिए?