क्या मूल बाइबल अभी भी अस्तित्व में है?


प्रश्न: क्या मूल बाइबल अभी भी अस्तित्व में है?

उत्तर:
इस प्रश्‍न का उत्तर दोनों "नहीं" और "हाँ" में है। अपने कठोर अर्थ में उत्तर, नहीं में है, मूल दस्तावेज जिसमें बाइबल की 66 पुस्तकें सम्मिलित हैं, जिसे — कभी-कभी "ऑटोग्राफ" अर्थात् ग्रन्थकार की व्यक्तिगत् पाण्डुलिपि भी कहा जाता है — किसी भी संगठन के पास नहीं हैं। यद्यपि, एक बहुत ही वास्तविक तरीके से उत्तर, हाँ में भी है, मानव जाति के पास वास्तविक शब्द और पुस्तकें हैं, जो मिलकर परमेश्‍वर के वचन को बनाते हैं। यह कैसे हो सकता है? मूल अर्थात् असल बाइबल को कैसे लिखा गया था और आज इसकी तुलना कैसे की जाती है, इस बारे में समझने के लिए, उस प्रक्रिया को देखना आवश्यक है, जिसके परिणामस्वरूप इसका मूल संकलन हुआ और उस समय से क्या घटित हुआ है।

मूल बाइबल की पृष्ठभूमि
सन्देहवादियों के अनुसार, कभी भी एक वास्तविक "मूल" बाइबल अस्तित्व में नहीं रही है। उनका मानना है कि बाइबल मनुष्य का उत्पाद है, न कि परमेश्‍वर का, और यह सदियों के संशोधन के माध्यम से "विकसित" हुई है।

यह सही है कि बाइबल लम्बे समय तक लिखी गई थी। लगभग 1,500 वर्षों की अवधि में 40 लेखकों के द्वारा लिखित, पवित्रशास्त्र में पुराने नियमों में 66 पुस्तकें — 39 पुराने नियम में और 27 नए नियम में सम्मिलित हैं। पुराने नियम को अक्सर तीन खण्डों में विभाजित किया जाता है: (1) पेन्टाट्यूक अर्थात् पंचग्रन्थ, जिसे कभी-कभी "व्यवस्था" भी कहा जाता है और इसमें बाइबल की पहली पाँच पुस्तकें सम्मिलित हैं; (2) भविष्यद्वक्ता, जिसमें सभी बड़ी और छोटी भविष्यद्वाणियों के लेखन सम्मिलित है; और (3) लेख, जिसमें भजन संहिता, नीतिवचन और कई अन्य पुस्तकें सम्मिलित हैं।

नया नियम को भी तीन खण्डों में विभाजित किया गया है: (1) सुसमाचार; (2) कलीसियाई इतिहास, जिसमें मूल रूप से केवल प्रेरितों के काम की पुस्तक सम्मिलित है; (3) प्रेरितों के लेख, जिसमें शेष सब कुछ सम्मिलित है।

मूल पुराने नियम का संकलन
मूल बाइबल को कैसे संकलित किया गया था? इसका इकट्ठा किया जाना पवित्रशास्त्र के द्वारा अत्यधिक सटीक तरीके से पता लगाया जा सकता है। मूसा ने पंचग्रन्थ को लिखा (निर्गमन 17:14; 24: 4, 7; 34:27; गिनती 33: 2; यहोशू 1:8; मत्ती 19: 8; यूहन्ना 5:46-47; रोमियों 10:5), यह वाचा के सन्दूक में रखा गया था और सुरक्षित था (व्यवस्थाविवरण 31:24)। समय के साथ, बाइबल की पहली पाँच पुस्तकों में अन्य प्रेरणा प्रदत्त ग्रन्थों को जोड़ा गया। दाऊद और सुलैमान के समय, पहले से संकलित पुस्तकों को मन्दिर के भण्डारगृह में रखा गया था (1 राजा 8:6) और मन्दिर में सेवा करने वाले याजकों के द्वारा इनकी देखभाल की जाती थी (2 राजा 22:8)। और अधिक पुस्तकों को राजा हिजकिय्याह के शासनकाल के समय में जोड़ा गया जैसे — दाऊद के भजन, सुलैमान की कहानियों और यशायाह, होशे और मीका जैसे भविष्यद्वाणियों की पुस्तकें (नीतिवचन 25:1)। सामान्य रूप से, जैसा कि परमेश्‍वर के भविष्यद्वक्ताओं ने कहा था, उनके शब्दों को लिखा गया और जो लिपिबद्ध किया गया वह आज पुराने नियम में सम्मिलित है।

छठी शताब्दी में यहूदियों के निर्वासन के समय, पुस्तकें बिखरी हुईं थीं, परन्तु खोई नहीं थीं। लगभग 538 ईसा पूर्व में यहूदियों की बेबीलोन की बन्धुवाई से वापसी पर और एज्रा याजक के पश्‍चात् सभी पहले की पुस्तकों को फिर से इकट्ठा किया गया और संकलन में अन्य कार्यों को जोड़ा गया। तब एक प्रतिलिपि को दूसरे मन्दिर के लिए बनाए गए सन्दूक में सुरक्षित रख दिया गया और एक से सावधानीपूर्वक प्रक्रिया के पश्‍चात् प्रेरणा प्रदत्त प्रतियों की सुरक्षा के लिए अन्य प्रतियों को बनाई जाता था। इब्रानी भाषा में लिखी गई पुराने नियम की पुस्तकों के इस संग्रह को यहूदी धर्म की "इब्रानी बाइबल" कहा जाता है।

तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में, पुराने नियम की पुस्तकों का अनुवाद 70 यहूदी विद्वानों के एक समूह के द्वारा यूनानी में किया गया था, जिसे LXX (जो "70" की सूचना देता है), या सेप्तुआजिन्त अर्थात् सप्तति अनुवाद (इस वाक्यांश की व्युत्पित लैटिन शब्द "सत्तर अनुवादकों के अनुवाद" से हुई है) कहा जाता है। सेप्तुआजिन्त का उपयोग पौलुस समेत प्रेरितों ने निश्‍चित रूप से किया था और उनके लेखों को उद्धृत किया गया था। सेप्तुआजिन्त की सबसे पुरानी पाण्डुलिपियों में कुछ प्रथम और दूसरी शताब्दी ईस्वी सन् की पाण्डुलिपियाँ सम्मिलित हैं।

1947 ईस्वी सन् में, इस्राएल में कुमरान के क्षेत्र में मृत सागर कुण्डल पत्रों की खोज की गई। विभिन्न कुण्डल पत्र 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर पहली शताब्दी ईस्वी सन् की किसी तिथि के आस-पास के हैं। इतिहासकारों का मानना है कि यहूदी शास्त्रियों ने परमेश्‍वर के वचन को सुरक्षित रखने के लिए और ईसा पूर्व 70 में यरूशलेम के विनाश के समय से इन लेखों की रक्षा के लिए इस स्थान का उपयोग किया। मृत सागर के कुण्डल पत्र पुराने नियम की लगभग प्रत्येक पुस्तक का प्रतिनिधित्व करते हैं और अभी के समय की पाण्डुलिपियों की तुलना उन्हें वस्तुतः एक जैसा होना दिखाती है — मुख्य विचलन कुछ व्यक्तियों के नामों और पवित्रशास्त्र में उद्धृत विभिन्न सँख्याओं की वर्तनी में पाया जाता हैं।

मृत सागर के कुण्डल पत्र पुराने नियम की शुद्धता और सुरक्षित बने रहने की गवाही देते हैं और विश्‍वास दिलाते हैं कि हमारे पास उपलब्ध आज के पुराना नियम का उपयोग यीशु के द्वारा उपयोग किया जाने वाला ही पुराना नियम है। वास्तव में, लूका ने पुराने नियम के इकट्ठा किए जाने के बारे में यीशु के द्वारा किए गए एक कथन को लिपिबद्ध किया है: "इसलिये परमेश्‍वर की बुद्धि ने भी कहा है, 'मैं उनके पास भविष्यद्वक्ताओं और प्रेरितों को भेजूँगी, और वे उनमें से कुछ को मार डालेंगे, और कुछ को सताएँगे।' ताकि जितने भविष्यद्वक्ताओं का लहू जगत की उत्पत्ति से बहाया गया है, सब का लेखा इस युग के लोगों से लिया जाए : हाबील की हत्या से लेकर जकरयाह की हत्या तक, जो वेदी और मन्दिर के बीच में घात किया गया। मैं तुम से सच कहता हूँ, इन सब का लेखा इसी समय के लोगों से लिया जाएगा'" (लूका 11:49-51, अतिरिक्त बल जोड़ा गया है)। यीशु ने इन वचन में पुराने नियम की 39 पुस्तकों की पुष्टि की है। हाबिल की मृत्यु इतिहास की 2 पुस्तकों उत्पत्ति और जकर्याह में पाई जाती है — जो इब्रानी बाइबल की पहली और अन्तिम पुस्तकें हैं।

मूल नए नियम का संकलन
नए नियम के संकलन को आधिकारिक रीति से ईस्वी सन् 397 में कार्थेज की परिषद् में निपटाया गया था। यद्यपि, नए नियम के बहुमत को पहले बहुत ही आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया था। नए नियम की पुस्तकों का पहला संग्रह ईस्वी सन् 140 में मार्सीअन नामक एक व्यक्ति के द्वारा प्रस्तावित किया गया था। मार्सीअन एक रूपाभासवादी था (रूपाभासवाद विश्‍वास की एक ऐसी पद्धति है, जो कहती है कि सभी आत्माएँ अच्छी हैं और सारा भौतिक पदार्थ बुरा है), और इसलिए मार्सीअन ने उस प्रत्येक पुस्तक को छोड़ दिया जो यीशु के बारे में ईश्‍वरीय और मनुष्य दोनों ही होने के बारे में बात करती थी, और उसने पौलुस के पत्रों को अपने दर्शन के अनुसार संपादित किया।

नए नियम की पुस्तकों का अगला प्रस्तावित संग्रह 170 ईस्वी सन् का मुरातोरियन कैनन अर्थात् प्रमाणिक ग्रन्थों का मुरातोरियन संग्रह लिपिबद्ध किया गया है। इसमें सभी चारों सुसमाचारों, प्रेरितों के काम, 13 पौलुस के पत्र, 1, 2, 3 यूहन्ना, यहूदा और प्रकाशितवाक्य सम्मिलित थे। नए नियम का अन्तिम कैनन पहली बार 367 ईस्वी सन् में कलीसियाई धर्माचार्य अथानेसियस के द्वारा परिचित कराया गया था और इसे 397 ईस्वी सन् में कार्थेज की परिषद् के द्वारा अनुमोदित किया गया था।

परन्तु इतिहास से पता चलता है कि आधुनिक बाइबल में वास्तविक नया नियम को आने से पहले से पहचान लिया गया था और यह "ऑटोग्राफ" के सम्बन्ध में उसका सटीक प्रतिबिम्ब है। सबसे पहले, पवित्रशास्त्र स्वयं दिखाता है कि नए नियम के लेखों को पुराने नियम के जैसे प्रेरित और तुल्य माना जाता था। उदाहरण के लिए, पौलुस लिखता है कि, "क्योंकि पवित्रशास्त्र" कहता है, 'दाँवनेवाले बैल का मुँह न बाँधना,' क्योंकि 'मजदूर अपनी मजदूरी का हक्‍कदार है' (1 तीमुथियुस 5:18, अतिरिक्त बल जोड़ गया है)। इसके पश्‍चात् आने वाला उद्धरण लूका 10:7 से है, जो यह दिखाता है कि पौलुस ने लूका के सुसमाचार को "पवित्रशास्त्र" माना है। एक और उदाहरण में पतरस ने एक कथन दिया है: "और हमारे प्रभु के धीरज को उद्धार समझो, जैसा हमारे प्रिय भाई पौलुस ने भी उस ज्ञान के अनुसार जो उसे मिला, तुम्हें लिखा है। वैसे ही उसने अपनी सब पत्रियों में भी इन बातों की चर्चा की है, जिनमें कुछ बातें ऐसी हैं जिनका समझना कठिन है, और अनपढ़ और चंचल लोग उन के अर्थों को भी पवित्रशास्त्र की अन्य बातों की तरह खींच तानकर अपने ही नाश का कारण बनाते हैं" (2 पतरस 3:15-16, अतिरिक्त बल जोड़ गया है)। यह स्पष्ट है कि पतरस ने पौलुस के शब्दों को पुराने नियम के प्रमाणिक ग्रन्थों के रूप में उनके जितना ही प्रेरित माना था।

दूसरा, आरम्भिक कलासियाई धर्माचार्यों के उद्धरण आज के पूरे नए नियम के पुनर्निर्माण की अनुमति देते हैं, जैसा कि यह आज हमारे पास उपलब्ध है। उदाहरण के लिए, क्लेमेंट (95 ईस्वी सन्) नए नियम की 11 पुस्तकों से उद्धरण को, इग्ननेशियस (107 ईस्वी सन्) नए नियम लगभग प्रत्येक पुस्तक से उद्धरण को और पॉलीकार्प (यूहन्ना का शिष्य, 110 ईस्वी सन् में) नए नियम की 17 पुस्तकें से उद्धरण देते हैं। आरम्भिक कलीसियाई धर्माचार्यों के उद्धरणों का उपयोग करते हुए, पूरे नए नियम को 20-27 वचनों को छोड़कर सब कुछ इकट्ठा किया जा सकता है, जिनमें से अधिकांश 3 यूहन्ना से हैं। इस तरह के स्पष्ट प्रमाण इस तथ्य की सच्चाई हैं कि नया नियम 397 ईस्वी सन् में कार्थेज की परिषद् की तुलना में बहुत पहले से ही पहचान लिया गया था और आज हमारे पास जो नया नियम है, वह 2,000 वर्षों पहले लिखा गया था।

तीसरा, प्राचीन संसार में पाण्डुलिपि की प्रतियों की सँख्या और नए नियम की आरम्भिक तिथि निर्धारिण के लिए किसी तरह की कोई साहित्यिक प्रतिद्वन्द्विता नहीं मिलती है। आज 5,300 यूनानी, 10,000 लैटिन और 9,000 विविध प्रतियाँ पाई जाती हैं, जो नए नियम से सम्बन्धित हैं, और अधिक के बारे में पुरातत्विक खोजों के माध्यम से पता लगाया जा रहा है। आरम्भिक तिथि निर्धारण और नए नियम की प्रतियों की भारी सँख्या में उपलब्ध होना सर फ्रेडरिक केन्यॉन (ब्रिटिश संग्रहालय के पूर्व निदेशक और प्रिन्सिपल लाइब्रेरियन) जैसे ऐतिहासिक विशेषज्ञों का यह कहने का कारण बनाती हैं कि, "मूल संकलन की तिथि निर्धारिण और शीघ्रता से मिलने वाले अंतराल की उपस्थिति के प्रमाण वास्तव में न के जितने होने के कारण बहुत ही अधिक छोटे हो जाते हैं और किसी भी सन्देह के लिए कोई अन्तिम नींव नहीं बचती है कि पवित्रशास्त्र हमारे पास ऐसे आया था, जैसा उसे लिखा गया है और अब इस सन्देह को हटा दिया गया है। नए नियम की पुस्तकों की प्रामाणिकता और सामान्य अखण्डता दोनों को अन्त में स्थापित किया जा सकता है। "

मूल बाइबल — निष्कर्ष
संक्षेप में, जबकि आज किसी के पास भी मूल ऑटोग्राफ नहीं है, तथापि हमारे पास कई उपलब्ध प्रतियाँ हैं और बाइबल के इतिहासकार मूलपाठ की आलोचना के विज्ञान के द्वारा हमें बहुत अधिक भरोसा दिलाते हैं कि आज की बाइबल मूल लेखकों के काम का सटीक प्रतिबिम्ब है।

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