settings icon
share icon
प्रश्न

धर्म अध्यादेशों और संस्कारों के मध्य में क्या भिन्नता है?

उत्तर


रोमन कैथोलिकवादी, पूर्वी रूढ़िवादी, और कुछ प्रोटेस्टेंट सम्प्रदाय शब्द "संस्कार" का प्रयोग "एक प्रतीक/अनुष्ठान" का उल्लेख करने के लिए करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप परमेश्‍वर का अनुग्रह एक व्यक्ति तक पहुँचता है। सामान्य रूप से, इन सम्प्रदायों में सात संस्कार पाए जाते हैं। ये बपतिस्मा, दृढ़ीकरण, प्रभु भोज, पापांगीकार, विवाह, सेवकाई के पवित्र आदेश और बीमारों को तेलाभिषेक करना हैं। कैथोलिक कलीसिया के अनुसार, "संस्कारों की सँख्या सात हैं। इनकी स्थापना मसीह के द्वारा की गई थी और इन्हें संचालित होने के लिए इन्हें कलीसिया को दिया गया है। ये उद्धार के लिए आवश्यक हैं। संस्कार अनुग्रह के माध्यम हैं, जिन्हें वे व्यक्त करते हैं।" इसके विपरीत, बाइबल हमें बताती है कि न तो अनुग्रह हमें बाहरी प्रतीक के लिए और न ही किसी अनुष्ठान के द्वारा "उद्धार के लिए आवश्यक" होने के लिए दिया जाता है।" अनुग्रह मुफ्त है। "पर जब हमारे उद्धारकर्ता परमेश्‍वर की कृपा और मनुष्यों पर उसका प्रेम प्रगट हुआ। तो उसने हमारा उद्धार किया; और यह धर्म के कामों के कारण नहीं, जो हम ने आप किए, पर अपनी दया के अनुसार नए जन्म के स्नान और पवित्र आत्मा के हमें नया बनाने के द्वारा हुआ। जिसे उसने हमारे उद्धारकर्ता यीशु मसीह के द्वारा हम पर अधिकाई से उण्डेला। जिस से हम उसके अनुग्रह से धर्मी ठहरकर, अनन्त जीवन की आशा के अनुसार वारिस बनें" (तीतुस 3:4-7)।

एक धर्म अध्यादेश मात्र एक साधारण सा "निर्धारित प्रथा या अनुष्ठान" होता है। प्रोटेस्टेंटवादी और इवैन्जेलिकल अर्थात् सुसमाचारवादी अध्यादेशों को उस सुसमाचार के सन्देश को प्रतीकात्मक रूप से पुनः कार्यान्वित होते हुए देखते हैं, जिसमें मसीह ने जीवन यापन किया, मर गया, मृतकों में से जी उठा, स्वर्ग में चढ़ाया गया, और एक दिन वापस आएगा। उद्धार के लिए शर्तों के होने की अपेक्षा, धर्म अध्यादेश जो कुछ यीशु मसीह ने हमारे लिए उसके छुटकारे के कार्य को पूरा किया है, उसे अच्छी रीति से समझने के लिए सहायता प्रदान करने के लिए दृश्य सामग्रियाँ हैं। धर्म आध्यादेश तीन तथ्यों के द्वारा निर्धारित किए गए हैं : उन्हें मसीह ने स्थापित किया है, उनकी शिक्षा प्रेरितों ने दी है, और उनका पालन आरम्भिक कलीसिया के द्वारा किया गया था। क्योंकि बपतिस्मा और प्रभु भोज ही एकमात्र पवित्र अनुष्ठान हैं, जो इन शर्तों को पूरा करते हैं, इसलिए केवल दो ही धर्म अध्यादेश हो सकते हैं। किसी भी अध्यादेश के लिए उद्धार की शर्त नहीं है, और न ही ये "अनुग्रह के माध्यम" हैं।

धर्म अध्यादेशों को सामान्य रूप से वे बातें समझा गया है, जिन्हें यीशु ने अन्य विश्‍वासियों के साथ पालन करने के लिए हमें कहा है। बपतिस्मे के बारे में, मत्ती 28:18-20 ऐसा कहता है, "यीशु ने उनके पास आकर कहा, 'स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिये तुम जाओ, सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ; और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो, और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदैव तुम्हारे संग हूँ।'" जहाँ तक सहभागिता की बात है, जिसे प्रभु भोज कह कर भी पुकारा जाता है, लूका 22:19 कहता है, "फिर उस ने रोटी ली, और धन्यवाद करके तोड़ी, और उनको यह कहते हुए दी, 'यह मेरी देह है जो तुम्हारे लिये दी जाती है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।'" अधिकांश कलीसियाएँ इन दो प्रथाओं का पालन करती हैं, परन्तु यह आवश्यक नहीं है कि वे इन्हें धर्म अध्यादेश के रूप में उद्धृत करती हों।

English



हिन्दी के मुख्य पृष्ठ पर वापस जाइए

धर्म अध्यादेशों और संस्कारों के मध्य में क्या भिन्नता है?
इस पृष्ठ को साझा करें: Facebook icon Twitter icon Pinterest icon Email icon
© Copyright Got Questions Ministries