क्या बाइबल भविष्यद्वाणी करती है कि अन्त के समय में विश्‍व में एक-ही-सरकार और विश्‍व में एक-ही-मुद्रा होगी?


प्रश्न: क्या बाइबल भविष्यद्वाणी करती है कि अन्त के समय में विश्‍व में एक-ही-सरकार और विश्‍व में एक-ही-मुद्रा होगी?

उत्तर:
बाइबल अन्त के समय के सन्दर्भ में "विश्‍व में एक-ही-सरकार" या "विश्‍व में एक-ही-मुद्रा" के वाक्यांश का उपयोग नहीं करती है। यद्यपि, यह निष्कर्ष निकालने में सक्षम होने के लिए पर्याप्त प्रमाण प्रदान करती है कि दोनों ही अन्तिम दिनों में मसीह विरोधी के शासन में पाए जाएंगे।

प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में अपने भविष्य-सूचक या रहस्योद्-घाटन या प्रकाशनात्मक दर्शन में, प्रेरित यूहन्ना एक "पशु" को देखता, जिसे समुद्र से बाहर निकलने वाला मसीह विरोधी भी कहा जाता है। इस पशु के सात सिर और दस सींग हैं (प्रकाशितवाक्य 13:1)। इस दर्शन को दानिय्येल को इस तरह के प्राप्त हुए दर्शन के साथ जोड़ कर देखने से (दानिय्येल 7:16-24), हम निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि पूरे संसार में एक प्रकार की राजनीतिक व्यवस्था का उद्घाटन पशु के द्वारा किया जाएगा, सबसे शक्तिशाली "सींग", दस राजाओं में से तीन को पराजित करेगा और मसीही विश्‍वासियों के विरूद्ध युद्ध को छेड़ेगा। दानिय्येल 2:41-42 में दी हुई मूर्ति में दस राष्ट्रों की संधि के रूप में एक साथ आने को भी देखा जाता है। इस दर्शन में दस इकाइयों से मिलकर बनी संसार की अन्तिम सरकार मूर्ति के पैर की दस अंगुलियों का प्रतिनिधित्व करती है। ये दस इकाइयाँ कोई भी क्यों न हो और ये कैसे भी सत्ता में क्यों न आए, पवित्रशास्त्र स्पष्ट है कि पशु उनके मध्य में से सत्ता में ऊपर उठेगा और उनमें प्रधान राजा बन जाएगा। अन्त के समय में, अन्य राजा उसके आदेश का पालन करेंगे।

यूहन्ना इस विशाल साम्राज्य के शासक को स्वयं शैतान के द्वारा दी गई शक्ति और बड़े अधिकार के रूप में वर्णित करता है (प्रकाशितवाक्य 13:2)। वह "पूरे संसार" (13:3-4) से पूजा को प्राप्त करता है और उसके पास "हर एक कुल और लोग और भाषा और जाति" के ऊपर अधिकार है (13:7)। इस विवरण से, यह मानना तार्किक है कि यह व्यक्ति संसार की एक-ही-सरकार का अगुवा है, जिसे अन्य सभी सरकारों के ऊपर प्रभुत्व के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह कल्पना करना कठिन है कि इस तरह की विविध सरकारें आज सत्ता में कैसे हैं, स्वेच्छा से स्वयं को एक शासक के अधीन कर देंगी और इस विषय पर कई सिद्धान्त पाए जाते हैं। एक विचार यह है कि प्रकाशितवाक्य में वर्णित विपत्तियों और पीड़ाओं को मुहर और तुरही के न्यायों (अध्याय 6-11) के रूप में वर्णित किया जाएगा और जो इतने बड़े पैमाने पर वैश्विक संकट को उत्पन्न करेंगे कि लोग आराम देने की प्रतिज्ञा करने वाले किसी भी व्यक्ति को अपना लेंगे।

एक बार सत्ता पर अधिकार प्राप्त कर लेने के पश्‍चात्, पशु (मसीह विरोधी) और उसके पीछे कार्य करने वाली शक्ति (शैतान) पृथ्वी के सभी लोगों के ऊपर पूर्ण नियन्त्रण को स्थापित करने के लिए आगे बढ़ेगी। उनका सच्चा अन्त उस पूजा को प्राप्त करना है, जिसे स्वर्ग से बाहर फेंक दिए जाने के पश्‍चात् से शैतान लालसा कर रहा है (यशायाह 14:12-14)। एक तरह से वे इसे सभी वाणिज्यिक व्यवसायों को नियन्त्रित करके पूरा करेंगे, जब बात विश्‍व की एक-ही-मुद्रा के विचार की आती है। प्रकाशितवाक्य 13:16-17 किसी प्रकार के शैतानिक चिन्ह का वर्णन करती है, जो कि खरीदने और बेचने के लिए आवश्यक होगा। कोई भी व्यक्ति जो इस चिह्न को लेने से इनकार करता है, वह भोजन, कपड़े या अन्य आवश्यकताओं को खरीदने में असमर्थ होगा। इसमें कोई सन्देह नहीं है कि संसार के अधिकांश लोगों को मात्र जीवित रहने के लिए ही यह चिन्ह प्राप्त होगा। वचन 16 यह स्पष्ट करता है कि यह एक सार्वभौमिक पद्धति होगी, जिसमें हर कोई, धनी और निर्धन, बड़ा और छोटा, अपने हाथ या माथे पर इस चिन्ह को लगाएगा। बहुत अधिक अटकलों का आगमन होगा कि इस चिह्न को वास्तव में कैसे जोड़ा जाएगा, परन्तु अभी तक की उपलब्ध प्रौद्योगिकियाँ इसे आसानी से पूरा कर सकती हैं।

जिन लोगों को कलीसिया के मेघारोहण अर्थात् कलीसिया के बादलों पर हवा में उठा लिए जाने के पश्‍चात् पीछे छोड़ दिया गया है, उन्हें मर्मांतक रूप से किसी एक विकल्प का चुनाव करना पड़ेगा — मसीह विरोधी और उसके अनुयायियों द्वारा भूखमरी और भयानक सताव का सामना करना या जीवन बचाने के लिए पशु के चिन्ह को स्वीकार करना। परन्तु जो लोग इस समय में मसीह के पास आते हैं, जिनके नाम मेम्ने की जीवन की पुस्तक (प्रकाशितवाक्य 13:8) में लिखे गए हैं, वे शहादत से भरी हुई मृत्यु तक धैर्य से सताव को सहन करना चुनेंगे।

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