सबसे पुराना धर्म कौन सा है?


प्रश्न: राशिफल का उद्देश्य किसी व्यक्ति के चरित्र और भविष्य की भविष्यवाणी में?

उत्तर:
उत्पत्ति 4:26 में बताए गए अनुसार, संसार का सबसे पुराना धर्म एक सच्चे परमेश्वर की आराधना करना है, "...उसी समय से लोग याहवे से प्रार्थना करने लगे।" जिस नाम को उन्होंने पुकारा वह यहोवा था (नाम "यहोवा" अंग्रजी का हिन्दी संस्करण है)। सच्चाई यह है कि उन्होंने इस नाम को पुकारना "आरम्भ" करके समाज में परिवर्तन का संकेत दिया - पहली बार, लोग स्वयं को परमेश्वर के आराधकों के रूप में संगठित कर रहे और पहचान रहे थे। यह शेत के माध्यम से आदम के पोते एनोश के जीवनकाल में, अर्थात् पहले जोड़े को अदन से निष्कासित करने के लगभग 250 वर्षों के पश्चात् घटित हुआ।

आराधना के आरम्भिक रूप के बारे में हमारे पास परमेश्वर से औपचारिक निर्देशों या परम्पराओं को निर्धारित करने के बारे में कोई जानकारी नहीं है कि लोगों ने उसकी आराधना कैसे की। हम कल्पना कर सकते हैं कि इसमें बलिदान सम्मिलित थे, क्योंकि कैन और हाबिल ने पहले पीढ़ी में ही व्यक्तिगत रूप से बलिदान दिए जाने की आवश्यकता को समझ लिया था (उत्पत्ति 4:3-4)। मूसा हमें बताता है कि पहला "धर्म" यही है कि वे परमेश्वर के नाम को जानते थे और उन्होंने उसके सामने इस नाम से प्रार्थना की।

शैतान भ्रष्ट और विभाजित करता है। अधिक समय नहीं बीता था कि परमेश्वर के नाम से प्रार्थना किए जाने वाला शुद्ध धर्म मूर्तिपूजा के द्वारा भ्रष्ट हो गया और यह वास्तव में सैकड़ों धर्मों में विभाजित हो गया। नूह के दिनों के आने तक, परमेश्वर का नाम भूला दिया गया, और "मानवीय मन के विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है वह निरन्तर बुरा ही होता है" (उत्पत्ति 6:5)। अगली बार जब हम किसी को परमेश्वर से प्रार्थना करते हुए बुलाते हैं, तो यह उत्पत्ति 12:8 में मिलता है; यह वह स्थान है, जब अब्राहम ने "यहोवा के लिये एक वेदी बनाई और यहोवा से प्रार्थना की।"

सबसे पुराना मूर्तिपूजा धर्म जिसका अनुसरण करने के लिए हमारे पास एक संगठित प्रमाण, मिस्र मिलता है। अपने कई देवताओं के साथ मिस्र की संस्कृति पहले से ही उत्पत्ति की पुस्तक के उत्तरार्ध और निर्गमन की पुस्तक में वर्णित समय से अच्छी तरह से स्थापित थी। अब्राहम ने एक धनी, प्रभावशाली मिस्र और उसके फैरो के साथ संवाद स्थापित किया था (उत्पत्ति 12:10 से आगे के वचन)।

15 वीं शताब्दी ईसा पूर्व में मूसा के समय में, परमेश्वर ने एक बार फिर से उसके नाम को प्रकाशित किया (निर्गमन 3:14) और इस्राएलियों के लिए नियमबद्ध धर्म को व्यक्त किया। यहोवा से प्रार्थना किए जाने में आवश्यक अन्य सभी देवताओं का त्याग सम्मिलित था (निर्गमन 20:3-4)। एक मूर्तिपूजक, बहुलवादी संसार के बीच में, इब्री लोगों का एकेश्वरवाद अन्धेरे स्थान में एक प्रकाश स्तंभ के रूप में खड़ा था।

मसीहियत के रूप में हम जिसे धर्म जानते हैं, वह वास्तव में इस्राएलियों के लिए परमेश्वर की योजना की निरन्तरता है। सुसमाचार "हर एक विश्‍वास करनेवाले के लिये, पहले तो यहूदी फिर यूनानी के लिये, उद्धार के निमित्त परमेश्‍वर की सामर्थ्य है" (रोमियों 1:16)। इसलिए, संसार के इतिहास में परमेश्वर के द्वारा स्वयं को मानव जाति के ऊपर प्रकट होने का एक चक्र सम्मिलित है, मनुष्य उस ज्ञान, और परमेश्वर की सच्चाई की बहाली अर्थात् पुनर्स्थापना से दूर हो रहा है। उत्पत्ति 4:26 में पाई जाने वाली सच्चाई और उत्पत्ति 3:15 में दी हुई प्रतिज्ञा का पता लगाते हुए, कोई भी यह कह सकता है कि मसीह में परमेश्वर की आराधना संसार का सबसे पुराना धर्म है।

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