निकट-मृत्यु के अनुभवों के बारे में बाइबल क्या कहती है?


प्रश्न: निकट-मृत्यु के अनुभवों के बारे में बाइबल क्या कहती है?

उत्तर:
एक निकट-मृत्यु का अनुभव तब होता है, जब कोई व्यक्ति मृत्यु के होने की कगार पर खड़ा होता है और चंगा होने के पश्‍चात्, असामान्य घटना, सामान्य रूप से शरीर के बाहर का अनुभव या स्वर्ग या नरक के किसी प्रकार के दृष्टिकोण की रिपोर्ट करता है। निकट-मृत्यु अनुभवों के लिए कोई विशेष पवित्रशास्त्रीय समर्थन नहीं पाया जाता है। बहुत से लोग 2 कुरिन्थियों 12:2-5 का उपयोग निकट-मृत्यु के अनुभवों के लिए बाइबल के प्रमाण पाठ के रूप में करते हैं। यद्यपि, यह व्याख्या के लिए बहुत अधिक स्वतन्त्रता को लेता है और इस धारणा को निर्मित करता है कि एक व्यक्ति (माना जाता है कि पौलुस) मृत्यु के निकट था या वास्तव में मरा हुआ था, जब उसने स्वयं को स्वर्ग में पाया। सन्दर्भ कहीं भी ऐसा नहीं कहता है कि व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी या मृत्यु निकट आ गई थी। यह एक दर्शन था, जिसे परमेश्‍वर ने स्वर्ग के उस व्यक्ति को दिया, निकट-मृत्यु का अनुभव नहीं था।

ऐसा कहा जाता है कि परमेश्‍वर के लिए किसी को निकट-मृत्यु के समय, या इस विषय में किसी को भी स्वर्ग का दर्शन देना असम्भव नहीं है। यद्यपि, बाइबल के कैनन अर्थात् प्रमाणिक पुस्तकों के पूरा होने के साथ ही, दर्शन मसीहियों के लिए एक आदर्श अनुभव नहीं है।

हमें अपने अनुभवों को वैधता प्रदान करने के लिए अत्यधिक सावधान रहना होगा। किसी भी अनुभव की सबसे महत्वपूर्ण जाँच इसे बाइबल के साथ तुलना करना है। शैतान सदैव धोखे और लोगों की सोच को तोड़ने मोड़ने के लिए तैयार रहता है। "यह कुछ अचम्भे की बात नहीं क्योंकि शैतान आप भी ज्योतिर्मय स्वर्गदूत का रूप धारण करता है। इसलिये यदि उसके सेवक भी धर्म के सेवकों का सा रूप धरें, तो कोई बड़ी बात नहीं, परन्तु उनका अन्त उनके कामों के अनुसार होगा"(2 कुरिन्थियों 11:14-15)।

क्योंकि बाइबल निकट-मृत्यु के अनुभवों के बारे में चुप है, और वैज्ञानिक अनुसंधान के द्वारा विश्‍वसनीय रूप से निपटारा नहीं किया जा सकता है, हम जैसे कहे गए हैं, निकट-मृत्यु अनुभवों की वैधता को स्वीकार नहीं कर सकते हैं। यह कहना बहुत अधिक दृढ़ होगा कि सभी निकट-मृत्यु अनुभव नकली, कल्पना किए हुए, या शैतानिक हैं, परन्तु अभी भी बाइबल आधारित कहना, निकट-मृत्यु के अनुभवों की वैधता के बारे में गम्भीर सरोकार पाए जाते हैं। एक बार फिर से, निकट-मृत्यु अनुभव का कोई भी विवरण पवित्रशास्त्र की सत्यता के विरूद्ध वैध ठहराया जाना चाहिए। यदि ऐसा अनुभव परमेश्‍वर की ओर से आता है, तो वह उसके वचन में पहले से ही जो कुछ प्रकट हुआ है, उसके अनुरूप होगा और अन्त में यीशु मसीह के नाम की महिमा को ले आएगा।

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