नैतिक धर्मविज्ञान क्या है?



प्रश्न: नैतिक धर्मविज्ञान क्या है?

उत्तर:
शब्द नैतिक धर्मविज्ञान का उपयोग रोमन कैथोलिक कलीसिया के द्वारा परमेश्‍वर का अध्ययन इस दृष्टिकोण से किए जाने के लिए वर्णित किया जाता है कि मनुष्य को कैसे परमेश्‍वर की कृपा या उपस्थिति की प्राप्ति के लिए जीवन व्यतीत करना चाहिए। जबकि सैद्धान्तिक धर्मसिद्धान्त रोमन कैथोलिक कलीसिया के अधिकारिक धर्मसिद्धान्त या शिक्षा के साथ कार्य करता है, नैतिक धर्मविज्ञान का कार्य जीवन के लक्ष्य और इसे कैसे प्राप्त किया जाता है, के साथ है। इस तरह से, नैतिक धर्मविज्ञान का लक्ष्य या उद्देश्य सरल रूप से ऐसे कहा जा सकता है कि यह धर्मनिर्धारित करना कि मनुष्य को कैसे जीवन व्यतीत करना चाहिए।

नैतिक धर्मविज्ञान स्वतन्त्रता, विवेक, प्रेम, उत्तरदायित्व और व्यवस्था जैसी बातों की जाँच करता है। नैतिक धर्मविज्ञान व्यक्तियों को सही निर्णय लेने में सहायता प्रदान करने के लिए सामान्य सिद्धान्तों को तैयार करने और प्रतिदिन के जीवन के विवरणों से निपटने का प्रयास करता है, जो कि कलीसिया के सैद्धान्तिक धर्मविज्ञान के अनुसार होते हैं। नैतिक धर्मविज्ञान मूलतः रोमन कैथोलिक है, जिसे सामान्य रूप से प्रोटेस्टेंट अर्थात् सुससाचारवादी मसीही नीतिशास्त्र के रूप में सन्दर्भित करते हैं। नैतिक धर्मविज्ञान जीवन में व्यापक प्रश्नों के साथ कार्य करता है और यह परिभाषित करने का प्रयास करता है कि रोमन कैथोलिक मसीही विश्‍वासी के रूप में रहने का क्या अर्थ होता है। नैतिक धर्मविज्ञान नैतिक समझ, अर्थात् सही और गलत, भले और बुरे, पाप और धर्म इत्यादि की परिभाषाओं के विभिन्न तरीकों को सम्बोधित करता है।

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नैतिक धर्मविज्ञान क्या है?