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प्रश्न

क्या मानसिक रूप से बीमार लोग स्वर्ग में जाते हैं? क्या परमेश्‍वर उन लोगों पर दया दिखाता है, जो मानसिक रूप से मन्द बुद्धि, मानसिक रूप से विकलांग, अपाहिज, या दिव्यांग हैं?

उत्तर


बाइबल विशेष रूप से यह नहीं कहती है कि मानसिक रूप से बीमार लोग स्वर्ग में जाते हैं या नहीं। यद्यपि, बाइबल में कुछ ऐसे प्रमाण पाए जाते हैं कि जो लोग भी उद्धार के लिए निर्णय लेने में सक्षम नहीं है, वे मसीह की मृत्यु से ढके हुए हैं। ठीक वैसे ही जैसे यह माना जाता है कि बच्चों को स्वत: ही स्वर्ग में ले लिया जाता है, जब तक कि वे उस अपनी मृत्यु से पहले आयु के उस बिन्दु तक नहीं पहुँच जाते जब वे मसीह को स्वीकार करने या अस्वीकार करने के लिए निर्णय लेने में सक्षम नहीं हो जाते हैं। दाऊद का एक बच्चा मर गया था, और उसने स्वयं को इस विचार से सांत्वना दी थी, "क्या मैं उसे लौटा ला सकता हूँ? मैं तो उसके पास जाऊँगा, परन्तु वह मेरे पास लौट कर नहीं आएगा।" (2 शमूएल 12:23)। दाऊद जानता था कि वह एक दिन स्वर्ग में अपने बच्चे को देखेगा। इस कथन से, हम मान सकते हैं कि शिशुओं और छोटे बच्चे को परमेश्‍वर के अनुग्रह के द्वारा उद्धार के लिए मसीह की मृत्यु से ढक दिया गया है।

हम यह निर्धारित कर सकते हैं कि मानसिक रूप से विकलांग लोगों को इस सिद्धान्त में सम्मिलित करते हुए ढक दिया गया है। यद्यपि, परमेश्‍वर का वचन विशेष रूप से यह नहीं कहता है। परमेश्‍वर के प्रेम, कृपा और दया को जानना उसके चरित्र के अनुरूप होगा। कोई भी व्यक्ति जो मानसिक रूप से उस सीमा तक मन्द बुद्धि जिसमें वह स्वयं के पास पापी स्वभाव होने से अवगत नहीं हो सकता है और उद्धार के लिए मसीह में विश्‍वास नहीं करता है, ऐसा व्यक्ति उन बच्चे वाली श्रेणी में ही है, और यह मानना अनुचित नहीं है कि ऐसा व्यक्ति उसी परमेश्‍वर की कृपा और दया से बचा हुआ है, जो शिशुओं और छोटे बच्चों को बचाता है।

यद्यपि, जैसा कि प्रत्येक विषय के साथ होता, हमें सावधान रहना चाहिए कि बाइबल विशेष रूप से किसी ऐसे विषय को लेकर धर्मसैद्धान्तिक नहीं जिसे वह विशेष रूप से सम्बोधित नहीं करती है। हम जानते हैं कि यीशु ने उन सभों को स्वीकार किया है, जिन्हें पिता ने उसे दिया है और वह किसी को भी नहीं खोएगा (यूहन्ना 6:39)। यीशु ने इस के बारे में कहा है कि, "और मैं उन्हें अनन्त जीवन देता हूँ। वे कभी नष्‍ट न होंगी, और कोई उन्हें मेरे हाथ से छीन न लेगा" (यूहन्ना 10:28)। हम इस बात की जानकारी से सांत्वना प्राप्त कर सकते हैं कि हमारे परमेश्‍वर की योजना सदैव सही होती है, वह सदैव सही और ठीक ही करता है, और उसका प्रेम और दया असीमित और अनन्तकालीन है।

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क्या मानसिक रूप से बीमार लोग स्वर्ग में जाते हैं? क्या परमेश्‍वर उन लोगों पर दया दिखाता है, जो मानसिक रूप से मन्द बुद्धि, मानसिक रूप से विकलांग, अपाहिज, या दिव्यांग हैं?
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