यीशु नाम का अर्थ क्या है? यीशु के नाम का क्या अर्थ है?


प्रश्न: यीशु नाम का अर्थ क्या है? यीशु के नाम का क्या अर्थ है?

उत्तर:
यदि कभी किसी नाम को महत्व दिया गया है, तो यह यीशु का नाम है। पवित्रशास्त्र कहता है कि यीशु को "वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्‍ठ है, कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और पृथ्वी के नीचे हैं, वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें" (फिलिप्पियों 2:9–10)। हमारे प्रभु का नाम इतना अधिक सामर्थी क्यों है? यीशु के नाम का क्या अर्थ है?

यीशु के नाम की घोषणा स्वर्गदूतों के द्वारा यूसुफ और मरियम को की गई थी (मत्ती 1:21; लूका 1:31), जिसका अर्थ "याहवे बचाता है" या "याहवे उद्धार है।" इब्रानी और अरामी भाषा से अनुवादित, यह नाम येशुआ है। यह शब्द याह का संयोजन है, जो कि याहवे अर्थात् परमेश्वर के लिए एक संक्षिप्त नाम है, यह इस्राएल के परमेश्वर का नाम (निर्गमन 3:14); और क्रिया याशा, जिसका अर्थ "बचाव," "उद्धार," या "बचाओ" से है।

इब्रानी भाषा के येशुआ की अंग्रेजी वर्तनी जोशुआ और हिन्दी बाइबल में यहोशू है। परन्तु जब इब्रानी भाषा से प्रचलित यूनानी में अनुवाद किया गया, तो नए नियम की मूल भाषा में, येशुआ शब्द ईसीओस बन गया। अंग्रेजी में, ईसीओस शब्द जीस़स बन जाता है और हिन्दी में यीशु बन जाता है। इस प्रकार, येशुआ और, इसी तरह, जोशुआ या यहोशू और यीशु का अर्थ "यहोवा बचाता है" या "प्रभु उद्धार है" से है।

पहली सदी के यहूदिया में यीशु नाम बहुत अधिक लोकप्रिय था। इस कारण, हमारे प्रभु को अक्सर "नासरत का यीशु" कहा जाता था, जो उसे गलील के नासरत नगर में उसके बचपन के घर से अलग करता था, (मत्ती 21:11, मरकुस 1:24, लूका 18:37, यूहन्ना 1:45, यूहन्ना 19:19, प्रेरितों के काम 2:22)। इस नाम के सामान्य होने के बाद भी, यीशु का नाम उल्लेखनीय रूप से महत्वपूर्ण है। यीशु को परमेश्वर ने एक विशेष उद्देश्य के लिए भेजा था, और उसका व्यक्तिगत् नाम उसके मिशन की साक्षी थी। जिस तरह पुराने नियम में यहोशू/जोशुआ ने अपने लोगों को कनानियों पर विजय दिलाने के लिए प्रेरित किया, ठीक उसी तरह येशुआ/यीशु ने नए नियम में अपने लोगों को पाप और उनके आत्मिक शत्रुओं पर विजय दिलाने के लिए नेतृत्व प्रदान किया।

गलातियों 4:4-5 कहता है कि, "परन्तु जब समय पूरा हुआ, तो परमेश्‍वर ने अपने पुत्र को भेजा जो स्त्री से जन्मा, और व्यवस्था के अधीन उत्पन्न हुआ, ताकि व्यवस्था के अधीनों को मोल लेकर छुड़ा ले, और हम को लेपालक होने का पद मिले।" यीशु को हमें बचाने के लिए भेजा गया था (यूहन्ना 3:17)। यीशु के नाम का अर्थ — "यहोवा बचाता है" — जो उसके मिशन (बचाने और छुड़ाने के लिए) और संसार के उद्धारकर्ता के रूप में उसकी पहचान को प्रगट करता है। ठीक उसी समय, यीशु के नाम का सामान्य होना उसकी मानवता और विनम्रता को रेखांकित करता है। परमेश्‍वर के पुत्र ने एक विनम्र व्यक्ति बनने के लिए स्वयं को अपनी महिमा से शून्य कर दिया (फिलिप्पियों 2:6–8)।

यीशु का नाम अपने अर्थ के कारण महत्वपूर्ण है और इसलिए कि जिसका यह प्रतिनिधित्व करता है। मसीह यीशु के व्यक्तित्व में सामर्थ्य और अधिकार हैं, और निश्चित रूप से, व्यक्ति अपने नाम से मनोनीत होता है। अन्य नामों की तुलना में कहीं अधिक, हम यीशु के नाम को उसके विशेष चरित्र, गुण और कार्य के साथ जोड़ते हैं, जैसा कि निम्नलिखित बाइबल आधारित सच्चाइयों में देखा गया है:

मुक्ति केवल यीशु के नाम में ही है: "यीशु ही वही पत्थर है 'जिसे तुम राजमिस्त्रियों ने तुच्छ जाना और वह कोने के सिरे का पत्थर हो गया।' किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं;, क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिसके द्वारा हम उद्धार पा सकें" (प्रेरितों के काम 4:11-12; के साथ यूहन्ना 14:6; 20:31; प्रेरितों के काम 2:21; योएल 2:32; 1 कुरिन्थियों 6:11; 1 यूहन्ना 2:12 को भी देखें)।

यीशु के नाम के माध्यम से पापों की क्षमा प्राप्त की जाती है: "उसकी सब भविष्यद्वक्‍ता गवाही देते हैं कि जो कोई उस पर विश्‍वास करेगा, उसको उसके नाम के द्वारा पापों की क्षमा मिलेगी" (प्रेरितों के काम 10:43; के साथ ही प्रेरितों 22:16 को भी देखें)।

विश्वासियों को यीशु के नाम में बपतिस्मा दिया जाता है: "पतरस ने उनसे कहा, 'मन फिराओ, और तुम में से हर एक अपने अपने पापों की क्षमा के लिये यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा ले; तो तुम पवित्र आत्मा का दान पाओगे''' (प्रेरितों के काम 2:38; के साथ ही मत्ती 28:19; प्रेरितों के काम 8:12,15-16; 10:48; 19:5 को भी देखें)।

यीशु के नाम में चँगाई और आश्चर्यकर्म किए गए: "और उसी के नाम ने, उस विश्‍वास के द्वारा जो उसके नाम पर है, इस मनुष्य को जिसे तुम देखते हो और जानते भी हो सामर्थ्य दी है। उसी विश्‍वास ने जो उसके द्वारा है, इसको तुम सब के सामने बिलकुल भला चंगा कर दिया है" (प्रेरितों के काम 3:16; इन वचनों को भी पढ़ें 6-8 और प्रेरितों के काम 4:30)।

यीशु विश्वासियों को उसके नाम में प्रार्थना करने की शिक्षा देता है; अर्थात्, उसके अधिकार में प्रार्थना करने के लिए, प्रार्थना के जिस प्रकार को वह देता है, वह यह है कि: "जो कुछ तुम मेरे नाम से माँगोगे, वही मैं करूँगा कि पुत्र के द्वारा पिता की महिमा हो। यदि तुम मुझ से मेरे नाम से कुछ माँगोगे, तो मैं उसे करूँगा" (यूहन्ना 14:13-14; के साथ ही यूहन्ना 15:16; 16:23–24 को भी देखें)।

प्रत्येक तरीके से, यीशु उसके नाम के अर्थ को पूरा करता है। यीशु का नाम हमें जी उठे हुए मसीह की सामर्थ्य, उपस्थिति और उद्देश्य के बारे में स्मरण दिलाता है। यह हमें विश्वास दिलाता है कि परमेश्वर का अनुग्रह हमें बचाने के लिए है। हमारा प्रभु यीशु परमेश्वर को मानवता में ले आया और अब मनुष्यों को उसके द्वारा खरीदे गए उद्धार के माध्यम से परमेश्वर के पास लाता है। बाइबल में, जब लोग यीशु के नाम से बोलते या काम करते थे, तो उन्होंने ऐसा प्रभु के प्रतिनिधि के रूप में उसके अधिकार का उपयोग करने के लिए किया। एक विश्वासी के जीवन को यीशु के नाम पर बने रहना है (कुलुस्सियों 3:17) और ऐसा करने से परमेश्‍वर की महिमा होती है: "ताकि हमारे परमेश्‍वर और प्रभु यीशु मसीह के अनुग्रह के अनुसार हमारे प्रभु यीशु का नाम तुम में महिमा पाए, और तुम उस में" (2 थिस्सलुनीकियों 1:12)।

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