एक तलाक ली हुई स्त्री से विवाहित पुरूष क्या कलीसियाई नेतृत्व में सेवा प्रदान करने के कार्य को कर सकता है?


प्रश्न: एक तलाक ली हुई स्त्री से विवाहित पुरूष क्या कलीसियाई नेतृत्व में सेवा प्रदान करने के कार्य को कर सकता है?

उत्तर:
इस लेख की पृष्ठभूमि को प्राप्त करने के लिए, कृपया हमारा 1 तीमुथियुस 3:2, 12 और तीतुस 1:6 में उद्धृत वाक्यांश "एक ही पत्नी का पति" पर आधारित लेख को पहले पढ़ लें। यहाँ पर लिखी हुई "एक ही पत्नी का पति" योग्यता कुछ घटनाओं में कलीसियाई नेतृत्व दल में सेवा करने के लिए तलाकशुदा स्त्री से विवाहित होने और पुनः विवाह किए जाने के कारण कुछ पुरूषों को अयोग्य ठहरा दे, परन्तु इससे भी अधिक कठिन प्रश्‍न उस विवाहित पुरूष के सम्बन्ध में है, जिसने कभी किसी को तलाक नहीं दिया हो, परन्तु जिसने एक ऐसी स्त्री से विवाह किया हो, जो पहले से ही तलाकशुदा थी। पवित्रशास्त्र का ऐसा कोई भी वचन इस विषय का निपटारा करने के लिए हमें नहीं मिलता है, परन्तु बाइबल आधारित कुछ ऐसे सिद्धान्त हैं, जिन्हें यहाँ पर लागू किया जा सकता है।

पहला तीमुथियुस 3:11 यहाँ इस विषय के सम्बन्ध में एक रूचिपूर्ण वचन है। यह स्पष्ट नहीं है कि क्या यह वचन डीकनों की पत्नी या महिला (स्त्री) डीकनों की ओर संकेत कर रही है। यह सम्भावना अधिक दिखाई पड़ती है कि यहाँ पर दी हुई व्याख्या "डीकनों की पत्नी" के लिए है, क्योंकि वचन 8-10 और 12-13 में दिए डीकनों की योग्यताओं की तुलना में पौलुस के लिए यहाँ पर महिला डीकनों की योग्यताओं को देना अनोखी सी बात होगी। इस बात के आलोक में, यह बात ध्यान में रखना अत्यन्त महत्वपूर्ण है कि यहाँ पर "एक ही पति का पत्नी" जैसी योग्यता डीकन की पत्नी के लिए नहीं मिलती है। न ही यहाँ पर "निर्दोष" होने और "बिना किसी दोष" के होने की शर्त मिलती है। इसकी अपेक्षा यहाँ पर "गम्भीर, दोष न लगाने वाली, सचेत और सब बातों में विश्‍वासयोग्य" होने की योग्यता दी गई है (1 तीमुथियुस 3:11)।

ऐसे कई विषय हैं, जो इस प्रश्‍न से सम्बन्धित हैं। क्या पत्नी एक व्यभिचारी या दुर्व्यवहार करने वाले पति की ओर निर्दोष पक्ष थी? क्या जब तलाक हुआ तब पत्नी एक विश्‍वासी थी? क्या पत्नी का भूतपूर्व पति अब भी समस्याओं या झगड़ों का कारण है? इनमें से प्रत्येक प्रश्‍न के ऊपर विचार किया जाना चाहिए। अन्त में, तथापि, यह विषय प्राचीनों और डीकनों के लिए निर्धारित शर्त "बिना किसी दाग/निर्दोष" के ऊपर ही आ टिकता है। क्या यह सच है कि किसी की पत्नी पहले से तलाकशुदा थी, समाज में कमजोर गवाही होने का परिणाम बन जाता है? क्या सम्भावित कलीसियाई अगुवे को वास्तव में एक भक्त व्यक्ति के रूप में देखा जा सकता है, जो सम्मान के योग्य हो और जिनका अनुसरण एक नमूने के रूप में किया जा सके?

ऐसा प्रतीत होता है कि इस प्रश्‍न का सार्वभौमिक रूप से उत्तर नहीं दिया जा सकता है। इसलिए क्योंकि इसमें बहुत से तथ्य सम्मिलित हैं। एक कलीसिया जिसके सामने इस तरह की एक घटना आ गई है, को अवश्य ही प्रार्थनापूर्वक परिस्थिति की जाँच और जितना अधिक हो सके इसे समझने का प्रयास करना चाहिए, कि क्या एक सम्भावित अगुवे को "बिना किसी दोष" के रूप में माना जा सकता है। इसे समझा जाना चाहिए कि यदि कलीसियाई गवाही को कोई सम्भावित नुकसान नहीं होता है, तब तो एक पुरूष जिसने तलाकशुदा स्त्री से विवाह किया है, कलीसियाई नेतृत्व की सेवा में कार्य करने के योग्य माना जा सकता है।

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एक तलाक ली हुई स्त्री से विवाहित पुरूष क्या कलीसियाई नेतृत्व में सेवा प्रदान करने के कार्य को कर सकता है?