क्या विवाह परमेश्‍वर के साथ आपके सम्बन्ध में बाधा है?



प्रश्न: क्या विवाह परमेश्‍वर के साथ आपके सम्बन्ध में बाधा है?

उत्तर:
यह विषय कि विवाह एक व्यक्ति के लिए परमेश्‍वर की सेवा करने में बाधा बन सकता है, पौलुस की ओर से 1 कुरिन्थियों 7 में लिखी हुई चिन्ता के रूप में मिलता है। इस कारण उसने ऐसे कहा है कि एक व्यक्ति को जैसा वह — अकेला है, वैसे ही अकेला रहना चाहिए। परन्तु वह अकेले जीवन को वासना से "जलते" रहित होने के द्वारा यापन करने की क्षमता को समझ चुका था कि यह हर किसी को दिया हुआ वरदान नहीं था (वचन 7-9)। उसने वचन 32-35 में कहा है कि एक अविवाहित व्यक्ति प्रभु की सेवा बिना किसी "बाधा" के हो अच्छी रीति से कर सकता है, क्योंकि उसे उसके जीवन साथी की प्रसन्नता में स्वयं के जीवन को केन्द्रित करके व्यतीत नहीं करना होता है। परन्तु साथ ही वह यह भी कहता है कि चाहे विवाहित हो या अविवाहित, हमारा ध्यान मसीह की सेवा करने के ऊपर ही केन्द्रित रहना चाहिए (वचन 28-31)।

परन्तु सच्चाई यह है कि यीशु ने अकेले पुरूषों को ही सेवकाई के लिए नहीं बुलाया है — और उसने तो यहाँ तक कि पतरस जैसे एक विवाहित व्यक्ति को (मत्ती 8:14), अपने तीन घनिष्ठ शिष्यों में से एक होना चुन लिया था — जो यह संकेत देता है कि विवाह अवश्य नहीं है कि एक व्यक्ति को मसीह के साथ घनिष्ठता के सम्बन्ध में बाधा बन सकता है। ठीक इसी तरह से, पुराने नियम में (अन्यों के मध्य में) दो व्यक्ति मिलते हैं, जिनका परमेश्‍वर के साथ घनिष्ठता का सम्बन्ध था। जिनमें से एक दानिय्येल था; और दूसरा मूसा था। एक अविवाहित था; जबकि दूसरा विवाहित था। इस प्रकार, विवाह परमेश्‍वर के साथ घनिष्ठता का सम्बन्ध स्थापित करने के लिए एक निर्धारित करने वाला तथ्य नहीं है।

मसीह के साथ एक व्यक्ति के घनिष्ठ सम्बन्ध के लिए विवाह में कुँजी की मुख्य बात यह है कि "प्रभु में ही विवाह" किए जाने को सुनिश्चित करना है (1 कुरिन्थियों 7:39) या, दूसरे शब्दों में ऐसे कहना कि असमान जुए में (2 कुरिन्थियों 6:14) एक अविश्‍वासी के साथ एक मसीही विश्‍वासी को करते हुए या फिर एक ऐसे मसीही विश्‍वासी से विवाह में एक नहीं होना है, जिसकी धर्मसैद्धान्तिक नींव एक जैसी नहीं है या फिर जब दोनों में ही मसीह की सेवा अपने पूरे मन से करने की इच्छा न हो। यदि एक व्यक्ति "प्रभु में विवाह" करता है, तो पवित्रशास्त्र एक अच्छे सहायक के लाभ को दिए जाने की प्रतिज्ञा करता है (नीतिवचन 27:17; सभोपदेशक 4:9-12), और जीवनसाथी मसीह के साथ जीवन व्यतीत करने में एक अच्छा सहयोगी और उत्साह प्रदान करने वाला बन जाता है।

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