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प्रश्न

क्या एक मसीही विश्‍वासी महिला को मेक-अप या श्रृंगार करना चाहिए?

उत्तर


पहला शमूएल 16:7ब घोषणा करता है, “क्योंकि यहोवा का देखना मनुष्य का सा नहीं है, परन्तु यहोवा की दृष्टि मन पर बनी रहती है।" पहला तीमुथियुस 2:9-10 हमें बताता है, “वैसे ही स्त्रियाँ भी संकोच और संयम के साथ सुहावने वस्त्रों से अपने आप को संवारें; न कि बाल गूँथने और सोने और मोतियों और बहुमोल कपड़ों से, पर भले कामों से, क्योंकि परमेश्‍वर की भक्ति करनेवाली स्त्रियों को यही उचित भी है।" पौलुस ने स्त्रियों को गहने पहनने, मेक-अप करने या बालों को गूँथने से मना नहीं किया है - इसकी अपेक्षा वह कहता है, कि स्त्रियों का बाहरी दिखावा उनकी आन्तरिक सुन्दरता से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं हो जाना चाहिए।

पतरस हमें इसी आत्मिक सच्चाई का स्मरण दिलाता है: "तुम्हारा श्रृंगार दिखावटी न हो, अर्थात् बाल गूँथना और सोने के गहने, या भाँति-भाँति के कपड़े पहिनना, वरन् तुम्हारा छिपा हुआ और गुप्त मनुष्यत्व, नम्रता और मन की दीनता की अविनाशी सजावट से सुसज्जित रहे, क्योंकि परमेश्‍वर की दृष्टि में इसका मूल्य बड़ा है। पूर्वकाल में पवित्र स्त्रियाँ भी, जो परमेश्‍वर पर आशा रखती थीं, अपने आप को इसी रीति से संवारती थी और अपने-अपने पति के अधीन रहती थीं" (1 पतरस 3:3-5)। श्रृंगार के लिए गहने पहनने, मेक-अप करने या गुँथे हुए बालों में तब तक कुछ भी ऐसा नहीं है, जब तक इस शालीन तरीके से किया जाए। एक स्त्री को अपनी बाहरी दिखावे के ऊपर इतना अधिक केन्द्रित नहीं हो जाना चाहिए, कि उसकी आन्तरिक आत्मिक जीवन ही अनदेखा होने लगे। बाइबल मन के ऊपर ध्यान केन्द्रित करती है। यदि एक स्त्री अपने दिखावे के ऊपर बहुत अधिक समय और धन को व्यय कर रही है, तब तो समस्या यह है, कि उसकी प्राथमिकताएँ गलत हैं। मंहगे गहने और कपड़े समस्या का परिणाम है, न कि स्वयं में समस्या है।

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