1 पतरस 1:3 में जीवित आशा क्या है?


प्रश्न: 1 पतरस 1:3 में जीवित आशा क्या है?

उत्तर:
पहला पतरस 1:3 कहता है, "हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्‍वर और पिता का धन्यवाद हो, जिसने यीशु मसीह के मरे हुओं में से जी उठने के द्वारा, अपनी बड़ी दया से हमें जीवित आशा के लिये नया जन्म दिया।"

प्रेरित पतरस ने अपने पत्र को परमेश्वर पिता और उसके पुत्र, यीशु मसीह के लिए स्तुति के शब्दों के साथ, पाठकों को यह स्मरण दिलाते हुए आरम्भ किया कि उद्धार परमेश्वर की दया का उपहार है। तब पतरस ने कहा कि विश्वासियों को "यीशु मसीह के मरे हुओं में से जी उठने के द्वारा, जीवित आशा" दी जाती है। जब वह "जीवित आशा" की बात करता है, तो पतरस का वास्तव में क्या अर्थ है?

पतरस कहता है कि यह "नया जन्म" है, जो हमारी जीवित आशा, यह पुष्टि करते हुए प्रदान करता है कि उद्धार परमेश्वर की ओर से एक उपहार है। जिस तरह एक शिशु को जन्म लेने के लिए कुछ भी नहीं करना पड़ता है, हम नए जन्म का अनुभव इसलिए नहीं करते हैं, कि हम कौन हैं या हमने कुछ किया है। हम मृतकों में से यीशु के पुनरुत्थान के माध्यम से परमेश्वर की ओर से जन्म लेते हैं (यूहन्ना 1:13)। उद्धार हम में उस परिवर्तन को ले आता है कि हम क्या हैं (2 कुरिन्थियों 5:17), जिससे हम पाप में मृत हो जाते हैं और यीशु मसीह में धार्मिकता के लिए जीवित हो जाते हैं (इफिसियों 2:5)। यह नया जन्म हमारी आशा के लिए-उद्धार के आश्वासन के रूप में कार्य करता है।

बाइबल के टीकाकार अक्सर पतरस को आशा का प्रेरित कह कर पुकारते हैं। इस सन्दर्भ में, पतरस हमारे नए जन्म को — हमारे उद्धार को — "एक जीवित आशा" के विचार के साथ जोड़ देता है। जिस आशा की बात पतरस करता है, वह महत्वाकांक्षा नहीं है, जिसे सामान्य रूप से आज की आशा के शब्द के साथ जोड़ा जाता है। हम कह सकते हैं, "मुझे आशा है कि वर्षा नहीं होगी," या "मुझे आशा है कि मैं परीक्षा पास करूँगा।" परन्तु पतरस के मन में इस तरह की आशा नहीं है।

इस वचन में "आशा" के लिए यूनानी शब्द का अर्थ "एक उत्सुक, आश्वस्त अपेक्षा" से है। एक मसीही विश्वासी की यह आशा न केवल "जीवित" है, अपितु "जीवन्त" है। इस संसार की खाली, मृत आशा के विपरीत, यह "जीवित आशा" है, जो ऊर्जा से भरी हुई, जीवन्त, और एक विश्वासी की आत्मा में सक्रिय है। यह अपेक्षित और चलते रहने वाली है। हमारी जीवित आशा एक जीवित, पुनर्जीवित उद्धारकर्ता से उत्पन्न होती है। पतरस की जीवित आशा यीशु मसीह है।

प्रेरित उन मसीही विश्वासियों से बात कर रहा है, जो एशिया माइनर में सताव में जीवन व्यतीत कर रहे थे। उसके शब्द उनकी परेशानी में उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए थे। यीशु मसीह के पुनरुत्थान के कारण उनका भविष्य सुरक्षित था। उनकी आशा यीशु की मृत्यु और उसके पुनरुत्थित जीवन के ऊपर हुए जय में पाई जाती थी। इस संसार में जो भी सताया हुआ विश्वासी होगा, वह भविष्य के पुनरुत्थान की आशीष और अनन्त काल में आने वाले जीवन की तुलना नहीं कर सकता है।

जीवित आशा अतीत में लंगर डालती है — अर्थात् यीशु मृतकों में से जी उठा (मत्ती 28:6)। यह वर्तमान में चलती रहती है — अर्थात् यीशु जीवित है (कुलुस्सियों 3:1)। और यह आने वाले पूरी भविष्य में पूरी होती है — अर्थात् यीशु शाश्वतकालीन, पुनरुत्थान के जीवन की प्रतिज्ञा करता है (यूहन्ना 3:16; 4:14; 5:24; रोमियों 6:22; 1 कुरिन्थियों 15:23)। जीवित आशा हमें निराशा के बिना जीने में भी सक्षम बनाती है, क्योंकि हम इस वर्तमान जीवन में दु:ख और परीक्षाओं का सामना करते हैं: "इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्व नष्‍ट होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है। क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्लेश हमारे लिये बहुत ही महत्वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है; और हम तो देखी हुई वस्तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्तुओं को देखते रहते हैं; क्योंकि देखी हुई वस्तुएँ थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएँ सदा बनी रहती हैं" (2 कुरिन्थियों 4:16-18)।

हमारी जीवित आशा का उद्देश्य 1 पतरस 1:4 में वर्णित है, "एक अविनाशी, और निर्मल, और अजर मीरास के लिये जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी है।" हमारे पास एक मीरास है, जिसे कभी भी मृत्यु के द्वारा छुआ नहीं जाएगा, जो बुराई से दागी नहीं गई है या जो समय के साथ फीकी नहीं पड़ती है; यह मृत्यु-भेद्यी, पाप-भेद्यी और युग-भेद्यी है। यह मीरास साथ विफलता-भेद्यी भी है, क्योंकि हमारे लिए परमेश्वर स्वर्ग में इसकी रक्षा करता और इसकी सुरक्षा करता है। यह पूरी तरह से सुरक्षित है। कुछ भी हमारे भविष्य की मीरास की निश्चितता को कम नहीं कर सकता है।

लोग आशा के बिना लम्बे समय तक जीवित नहीं रह सकते। आशा हमें पीड़ादायी अनुभवों और उस डर के विषय में से कि भविष्य क्या थामे हुए है, जाने में सहायता करती है। पाप से पतित इस संसार में जहाँ लोग गरीबी, बीमारी, भूख, अन्याय, आपदा, युद्ध और आतंकवाद का सामना करते हैं, हमें एक जीवित आशा की आवश्यकता है। बाइबल हमें इफिसियों 2:12 में बताती है कि जिन लोगों के पास यीशु मसीह नहीं है, उन्हें कोई आशा नहीं है। विश्वासियों को यीशु मसीह के पुनरुत्थान के माध्यम से वास्तविक और पर्याप्त आशा के साथ आशीष दी जाती है। परमेश्‍वर के वचन की सामर्थ्य और पवित्र आत्मा के वास करने के कारण, यह जीवित आशा हमारे मन और आत्माओं को उत्साहित करती है (इब्रानियों 4:12)। यह हमारे विचारों, शब्दों और कार्यों को परिवर्तित करती है। अपने पापों के प्रति मर जाने के बाद, हम अब अपने पुनरुत्थान की आशा के साथ जीते हैं।

मसीही विश्वासी की जीवित आशा ठोस और सुरक्षित है: "वह आशा हमारे प्राण के लिये ऐसा लंगर है जो स्थिर और दृढ़ है, और परदे के भीतर तक पहुँचता है, जहाँ यीशु ने मलिकिसिदक की रीति पर सदा काल का महायाजक बनकर, हमारे लिये अगुआ के रूप में प्रवेश किया है" (इब्रानियों 6:19-20)। यीशु मसीह हमारा उद्धारकर्ता, हमारा उद्धार, हमारी जीवित आशा है।

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