क्या बाइबल यह शिक्षा देती है कि जीवन गर्भधारण करते समय ही आरम्भ हो जाता है?


प्रश्न: क्या बाइबल यह शिक्षा देती है कि जीवन गर्भधारण करते समय ही आरम्भ हो जाता है?

उत्तर:
बाइबल बताती है कि जीवन गर्भधारण करते समय ही आरम्भ हो जाता है। कब मानवीय जीवन का आरम्भ होता है, के प्रति प्रत्येक संस्कृति का अपना ही दृष्टिकोण यह है, क्योंकि मानवीय समाज के मूल्यों, नैतिक मानकों और भ्रूण विकास परिवर्तन की प्रक्रिया के बारे में ज्ञान के रूपों में परिवर्तन होता रहता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में 1973 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के आने से पहले मांग आधारित गर्भपात की अनुमति थी, विकसित होते हुए भ्रूण को अजन्मा व्यक्ति माना जाता था। अब, यहाँ तक कि एक भ्रूण, जो अपनी मां के गर्भ से बाहर भी जीवित रह सकता है, को कुछ चिकित्सा परिस्थितियों में कानूनी रूप से गर्भपात किया जा सकता है। इससे पता चलता है कि हम एक अजन्मे बच्चे को एक वास्तविक मानवीय प्राणी नहीं मानते हैं।

विज्ञान हमें बताता है कि मानवीय जीवन गर्भधारण के समय से ही आरम्भ हो जाता है। जिस क्षण निषेचन होता है, उसी क्षण से, बच्चे का आनुवंशिक ढाँचा पहले ही पूरा हो चुका होता है। उसका लिंग, उसकी ऊँचाई और बाल, आँख और त्वचा का रंग पहले से ही निर्धारित हो चुके होते हैं। भ्रूण को पूर्ण रूप से कार्य करने के लिए केवल एक ही बात विकास और विकास के समय की आवश्यकता होती।

इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि परमेश्‍वर ने अपने वचन में हमें अवगत कराया है कि न केवल जीवन गर्भधारण के समय आरम्भ होता है, अपितु परमेश्‍वर हमें इससे पहले से ही जानता है कि हम कौन हैं (यिर्मयाह 1:5)। राजा दाऊद ने हमारे गर्भधारण के बारे में परमेश्‍वर की भूमिका के बारे में ऐसे कहा है: "मेरे मन का स्वामी तो तू है; तू ने मुझे माता के गर्भ में रचा...तेरी आँखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे" (भजन संहिता 139:13, 16)।

समाज निरन्तर अजन्मे हुए जीवन के मूल्य को कम करने के लिए प्रयासरत्, नैतिकता के विकृत विचारों के आधार पर मानवता की अपनी परिभाषाएँ बनाते हुए कर रहा है। परन्तु निर्विवाद तथ्य यह है कि एक जीवन का सृजन ठीक उसी समय हो जाता है, जब एक भ्रूण गर्भधारण करता या करती है। परमेश्‍वर हमारी सृष्टि के समय उपस्थित होता है; वह, सच्चाई तो यह है कि हमारा सृष्टिकर्ता है। हमारे मानवीय प्राणी होने का मूल्य यह है कि इससे पहले कि हमारा गर्भधारण होता, हम उसके स्वरूप में सृजे गए हैं।

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क्या बाइबल यह शिक्षा देती है कि जीवन गर्भधारण करते समय ही आरम्भ हो जाता है?