बरनबास के जीवन से हमें क्या सीखना चाहिए?


प्रश्न: बरनबास के जीवन से हमें क्या सीखना चाहिए?

उत्तर:
प्रेरितों के काम की पुस्तक में, हमें साइप्रस से योसेस नाम का एक लेवी मिलता है (प्रेरितों के काम 4:36), जिसे प्रेरित ने बरनबास कह कर पुकारा है। वह उपनाम, जिसका अर्थ "शान्ति का पुत्र" (प्रेरितों के काम 4:36-37) या "प्रोत्साहन का पुत्र" है, कदाचित् यह नाम उसे दूसरों की सेवा करने के अपने झुकाव के कारण (प्रेरितों के काम 4:36-37, 9:27) और उसके द्वारा वह सब कुछ करने के लिए जिसे कलीसिया के अगुवे चाहते थे, दिया गया था (प्रेरितों के काम 11:25-30)। उसे एक "भला मनुष्य, और पवित्र आत्मा और विश्‍वास से परिपूर्ण" व्यक्ति के रूप में जाना जाता था। उसकी सेवकाई के माध्यम से, "बहुत से लोग प्रभु में आ मिले" थे (प्रेरितों के काम 11:24)। पौलुस बरनबास का उपयोग धन और सम्पत्ति के ऊपर उचित दृष्टिकोण रखने वाले एक व्यक्ति को दिखाने के लिए एक उदाहरण के रूप में करता है। जब उसने अपनी भूमि बेची, तो वह इसके मूल्य को प्रेरितों के पास ले आया और उसे उनके पैरों पर रख दिया (प्रेरितों के काम 4:36-37)।

जैसे-जैसे आरम्भिक कलीसिया का विकास होने लगा, हेरोदेस के द्वारा सताव दिए जाने के पश्‍चात् भी, पवित्र आत्मा के द्वारा बरनबास को एक मिशनरी यात्रा पर पौलुस के साथ जाने के लिए बुलाया गया (प्रेरितों के काम 13:1-3)। बरनबास के चचेरे भाई, यूहन्ना मरकुस ने उसकी सेवा की और पौलुस को उसके सहायक के रूप में कार्य किया (प्रेरितों के काम 13:5; कुलुस्सियों 4:10)। उस पहली मिशनरी यात्रा के समय, एक न बताए हुए कारण से, यूहन्ना मरकुस ने उन्हें छोड़ दिया और उनके साथ यात्रा को पूरी नहीं किया (प्रेरितों के काम 13:13)। यद्यपि, बरनबास पौलुस के साथ मिशनरी यात्रा में बना रहा और उसके साथ तब तक था, जब उसे सुसमाचार की सेवकाई के साथ अन्यजातियों तक पहुँचने के लिए पुनर्निर्देशित किया गया (प्रेरितों के काम 13:42-52)।

उस पहली यात्रा के पश्‍चात्, पौलुस और बरनबास ने अपनी अगली यात्रा की योजना बनानी आरम्भ की। बरनबास अपने चचेरे भाई को अपने साथ ले जाना चाहता था, परन्तु पौलुस ने इन्कार कर दिया और उनके मध्य अनबन इतनी अधिक बढ़ गई कि वे दो समूहों में बँट गए (प्रेरितों के काम 15:36-41)। बरनबास, अपने उपनाम को सत्य प्रमाणित करते हुए, यूहन्ना मरकुस को अपने साथ ले गया और उसे शिष्य बनाने में अपने समय को व्यतीत किया।

स्पष्ट है कि उसकी सेवकाई इतनी अधिक प्रभावी थी, कि वर्षों पश्‍चात्, पौलुस ने विशेष रूप से यूहन्ना मरकुस को उसके पास आने के लिए कहा, क्योंकि मरकुस अपनी सेवकाई में पौलुस के लिए सहायक बनने के बिन्दु तक परिपक्व हो गया था (2 तीमुथियुस 4:11)।

पवित्रशास्त्र में बरनबास के लिए एकमात्र नकारात्मक उल्लेख एक घटना के सन्दर्भ में पाया जाता है, जिसमें पतरस के पाखण्ड ने अन्य यहूदियों (बरनबास सहित) को कुछ अन्यजातियों के साथ रात के भोजन को करने से दूर रहने के लिए प्रभावित किया था (गलातियों 2:13)।

बरनबास की तरह, मसीही विश्‍वासी के रूप में हमें उत्साह देने वाला कहा जाता है, विशेषकर उन लोगों को, जो विश्‍वास में कमजोर या संघर्षरत् हैं। प्रेरितों के काम 11:23 में बरनबास को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में दर्शाया गया है, जो दूसरों के लिए अपने जीवन में परमेश्‍वर के अनुग्रह को प्रदर्शित करते हुए, उन्हें विश्‍वासयोग्य बने रहने के लिए प्रोत्साहन और उपदेश देते हुए देखकर प्रसन्न होता है। उसी तरह, हमें उन लोगों की प्रशंसा करने के अवसरों की खोज करनी चाहिए, जो अपने ऐसे जीवनों के माध्यम से परमेश्‍वर के लिए महिमा और सम्मान को ले आते हैं, जो उनके विश्‍वास को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, बरनबास एक परोपकारी आत्मा वाला उदाहरण भी है, जब बात प्रभु के कार्य के लिए बलिदान देने की आती है।

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बरनबास के जीवन से हमें क्या सीखना चाहिए?