सृष्टि के समय परमेश्‍वर ने "उजियाला हो" क्यों कहा?


प्रश्न: सृष्टि के समय परमेश्‍वर ने "उजियाला हो" क्यों कहा?

उत्तर:
सृष्टि के पहले दिन, परमेश्‍वर ने कहा, "उजियाला हो" (उत्पत्ति 1:3), और उजियाला अन्धेरे से अलग वस्तु के रूप में दिखाई दिया। वाक्यांश में उजियाला हो इब्रानी वाक्यांश येही' ओर का अनुवाद है या जिसे लैटिन में "फिएट लक्स" के रूप में अनुवाद किया गया था। इसका शाब्दिक अनुवाद एक आदेश होगा, कुछ ऐसा कि "प्रकाश अस्तित्व में आ जा।" परमेश्‍वर ने शून्य में बोला और प्रकाश को अस्तित्व में आने के लिए कहा। बाइबल हमें बताती है कि परमेश्‍वर ने स्वर्ग और पृथ्वी और शेष सब कुछ को अस्तित्व में आने के लिए बोलने भर से आदेश दिया है (उत्पत्ति 1)। उसका व्यक्तित्व, सामर्थ्य, रचनात्मकता और सौन्दर्य को सृष्टि में व्यक्त किया गया था, ठीक वैसे ही जैसे एक कलाकार के व्यक्तित्व और उसके व्यक्तिगत गुण कला या संगीत के माध्यम से व्यक्त किए जाते हैं। प्रकाश या उजियाले के अस्तित्व में आने का विचार, सबसे पहले परमेश्‍वर के मन में विद्यमान था, जिसे "उजियाला हो" या "प्रकाश विद्यमान हो जा" शब्दों के द्वारा आकार दिया गया था।

परमेश्‍वर की आवाज़ की रचनात्मक सामर्थ्य की वास्तविकता में आत्मिक निहितार्थों के प्रभाव पाए जाते हैं, जो कि स्वयं सृष्टि के वृतान्त से कहीं आगे चले जाते हैं। प्रकाश को अक्सर बाइबल में एक रूपक के रूप में प्रयोग किया जाता है। प्रबोधन ("सत्य के साथ मानवीय मन का ईश्‍वरीय ज्ञान से जागृत करना") का लेना देना प्रकाश में चीजों को लाने से है। आत्मिक प्रबोधन एक प्रकार की "सृष्टि" है, जो एक मानवीय मन में प्रगट होती है। "इसलिये कि परमेश्‍वर ही है, जिसने कहा, 'अन्धकार में से ज्योति चमके,' और वही हमारे हृदयों में चमका कि परमेश्‍वर की महिमा की पहिचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो" (2 कुरिन्थियों 4:6)। यीशु स्वयं "जगत की ज्योति" है (यूहन्ना 8:12)।

जब परमेश्‍वर ने कहा सृष्टि के समय, "उजियाला हो," कहा और प्रकाश दिखाई दिया, तो इसने परमेश्‍वर की रचनात्मक सामर्थ्य और पूर्ण नियन्त्रण को दिखाया। सृष्टि के पहले दिन परमेश्‍वर ने जिस भौतिक प्रकाश को रचा वह इस बात का एक अद्भुत चित्र है, जिसे वह प्रत्येक उस व्यक्ति के मन में करता है, जो सच्ची ज्योति मसीह के ऊपर विश्‍वास करता है। पाप और मृत्यु के अन्धेरे में चलने की कोई आवश्यकता नहीं है; मसीह में, हम "अन्धकार में न चलेंगे, परन्तु जीवन की ज्योति पाएंगे" (यूहन्ना 8:12)।

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