सिर पर हाथों को रखना — बाइबल क्या कहती है?



प्रश्न: सिर पर हाथों को रखना — बाइबल क्या कहती है?

उत्तर:
"सिर पर हाथों को रखना" एक बाइबल आधारित गतिविधि है; तथापि, किसी भी आत्मिक सेवकाई के लिए हाथों पर शाब्दिक रूप से सिर पर रखने के लिए बाइबल आधारित कोई आदेश नहीं दिया गया है। यीशु ने निश्चित रूप से कइयों के सिरों के ऊपर अपने हाथों को रखा था, जिन्हें उसने चँगा किया; तथापि, उसने उन लोगों के सिरों पर हाथ रखे बिना भी उन्हें चँगा किया था। वास्तव में, ऐसे समय भी आए थे, जब वह उन लोगों के आसपास भी नहीं था, जिन्हें उसने चँगा किया था। मत्ती 8: 8 बताता है कि सेनापति के सेवक के घर जाए बिना ही यीशु उसके सेवक को चँगा कर दिया था।

विचार करने के लिए दो निम्नलिखित उदाहरण हैं: एक घटना में पवित्र आत्मा ने प्रेरितों के द्वारा हाथों को सिर पर रखे जाने के द्वारा अन्यभाषा के वरदान को दिया गया और दूसरी घटना में वह सिर पर हाथों को रखे बिना ही परन्तु केवल प्रेरितों के द्वारा उपदेश ही इस वरदान को लोगों को देता है।

"पौलुस ने कहा; 'यूहन्ना ने यह कहकर मन फिराव का बपतिस्मा दिया कि जो मेरे बाद आनेवाला है, उस पर अर्थात् यीशु पर विश्‍वास करना। यह सुनकर उन्होंने प्रभु यीशु के नाम का बपतिस्मा लिया। जब पौलुस ने उन पर हाथ रखे, तो पवित्र आत्मा उन पर उतरा और वे भिन्न-भिन्न भाषा बोलने और भविष्यद्वाणी करने लगे'" (प्रेरितों के काम 19:4-6)।

"पतरस ये बातें कह ही रहा था कि पवित्र आत्मा वचन के सब सुननेवालों पर उतर आया। और जितने खतना किए हुए विश्‍वासी पतरस के साथ आए थे, वे सब चकित हुए कि अन्यजातियों पर भी पवित्र आत्मा का दान उण्डेला गया है। क्योंकि उन्होंने उन्हें भाँति भाँति की भाषा बोलते और परमेश्‍वर की बड़ाई करते सुना?" (प्रेरितों के काम 10:44-46)।

1 तीमुथियुस 5:22 में, यह विचार कि हाथों को सिर के ऊपर रखना सचेत करने वाली गतिविधि के रूप में नहीं पाया जाता है, क्योंकि यहाँ पर यह इस विचार के साथ आता है कि आत्मिक नेतृत्व का उत्तरदायित्व (यद्यपि इसे किया जाता है) देखभाल के साथ किया जाना चाहिए। यह "अचानक" या बिना सोच विचार किए हुए नहीं किया जाना चाहिए। "किसी पर शीघ्र हाथ न रखना और दूसरों के पापों में भागी न होना; अपने आप को पवित्र बनाए रख।"

निस्सन्देह, आरम्भिक कलीसिया में सिर पर हाथ रखने का अर्थ सन्देशवाहक के सन्देश या वरदानदाता के साथ आत्मिक वरदान के साथ सम्पर्क स्थापित करने का एक साधन था। इसने एक ऐसे "चिन्ह" को प्रदान करते हुए उस व्यक्ति की पुष्टि की, जिसके द्वारा उसे आत्मिक वरदान की भौतिक अभिव्यक्ति प्रदान की गई थी। हमें यह समझने की आवश्यकता है कि कलीसिया की सेवकाई के लिए कोई बाइबल आधारित जादुई फार्मूला अर्थात् सूत्र नहीं हैं। हाथों को सिर पर रखने से कोई शक्ति नहीं आ जाती है। सिर पर हाथों को रखना केवल परमेश्‍वर के द्वारा ही तब उपयोग किया जाता है, जब इसे परमेश्‍वर के वचन की सहमति में किया जाता है।

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